हैदराबाद डॉक्टर मर्डर केस: क्या कहना है उस बहन का जिससे पीड़िता ने आख़िरी बार बात की

BBC Hindi

रविवार, 1 दिसंबर 2019 (10:09 IST)
बाला सतीश/नवीन कुमार, बीबीसी संवाददाता
"क्या मीडिया से एक-एक करके लोग ऐसे ही आते रहेंगे और हर बार मुझे यही सब दोहराना होगा? क्या मीडिया से 100 अलग-अलग लोगों को आना चाहिए और एक ही सवाल मुझसे बार-बार पूछना चाहिए?" ये सवाल उस लड़की के हैं जिनकी बहन को कथित रेप के बाद जलाकर मार दिया गया।
 
मृतक डॉक्टर ने आख़िरी बार अपनी बहन से फ़ोन पर बात की थी लेकिन अब वो बहन लोगों ख़ास तौर पर मीडिया से बात कर-करके थक चुकी हैं।
 
उनका कहना है "एक ही सवाल सौ बार।।।पहले से ही दुखी हूं और अब बार-बार वही सब पूछा जा रहा है।"
 
अब बहन साथ नहीं
घटना वाले दिन रात क़रीब नौ बजे तक पीड़ित युवती टोल प्लाज़ा अपनी स्कूटी लेने पहुंची थी। वहीं से उन्होंने आख़िरी बार अपनी बहन को फ़ोन किया और बताया कि उनकी स्कूटी पंचर है।
 
पीड़ित युवती ने फ़ोन पर अपनी बहन को बताया कि उन्हें अकेले सड़क पर खड़ा होने में डर लग रहा है, अचानक से कुछ लोग दिख रहे हैं, कुछ लोग उन्हें स्कूटी ठीक करने की बात भी बोल रहे हैं।
 
लड़की ने फ़ोन पर ही अपनी बहन को बताया था कि एक ट्रक ड्राइवर उनके पास रुका और उसने स्कूटी ठीक करने की बात कही। जब लड़की ने ट्रक ड्राइवर से स्कूटी ठीक करवाने से इनकार कर दिया तो उसके बाद भी वह ट्रक ड्राइवर उनका पीछा करता रहा।
 
लड़की की बहन ने उन्हें सलाह दी कि वह टोल प्लाज़ा के पास ही खड़ी हो जाएं, इस पर लड़की राज़ी नहीं हुई और उन्होंने बताया कि सभी लोग उन्हें घूर रहे हैं जिससे उन्हें डर लग रहा है।
 
इसके बाद लड़की ने अपनी बहन को थोड़ी देर में फ़ोन करने की बात कही, लेकिन इसके बाद उनका फ़ोन स्विच ऑफ़ हो गया। उसके बाद अगली सुबह उनका जला हुआ शव मिला। इस पूरी घटना को याद करके पीड़ित युवती की बहन असहज हो उठती हैं।
 
वो कहती हैं "इससे ज़्यादा क्या दुर्भाग्यपूर्ण हो सकता है। ज़िंदगी तो वापस नहीं लौट सकती है। ये किसी के भी साथ नहीं होना चाहिए। मैं सोच भी नहीं सकती कि ये सबकुछ मेरी अपनी बहन के साथ हुआ। अब मैं सिर्फ़ यही कह सकती हूं कि हर किसी को चौकन्ना रहना चाहिए। हर वक़्त। हर जगह।"
 
उस रात के उस आख़िरी फ़ोन कॉल को याद करत हुए वो कहती हैं "मेरी बहन ने मुझे कहा भी कि वो डरी हुई है। लेकिन मैं ही नहीं समझ पायी कि सबकुछ इतना गंभीर है। अब मैं ये समझ पा रही हूं कि इस तरह की बात को किसी भी सूरत में हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए। इस बात का कोई अंदाज़ा भी नहीं लगा सकता है कि अगले ही पल किसके साथ क्या हो जाए।"
 
अफ़सोस जताते हुए वो कहती हैं "मैं अपनी बहन को बचा सकती थी, अगर मैंने मौक़े की नज़ाक़त को उतनी ही गंभीरता से लिया होता तो। किसी पर भरोसा नहीं करना चाहिए भले ही वो कोई जानने वाला ही क्यों ना हो। मैं समझ रही हूं मुझे ये सबकुछ नहीं कहना चाहिए।लेकिन मैं ये बात इसलिए कह पा रही हूं कि मैंने सुना एक औरत अपने किसी जानने वाले के यहा जन्मदिन की पार्टी में गई।।।फिर उसका रेप हो गया और उसे मार डाला गया।"
 
"अगर आप किसी अपने के साथ हैं तो भी चौकन्ने रहिए। देर रात अगर कहीं जा रहे हैं तो किसी को घर पर बताकर जाएं।"
 
इस घटना के सामने आने के बाद से एक बात यह भी उठी कि अगर पीड़ित महिला डॉक्टर ने बहन के बजाय पुलिस को 100 नंबर पर फ़ोन करके मदद मांगी होती तो शायद उसे मदद मिल जाती और यह हादसा ना होता।
 
इस पर पीड़ित डॉक्टर की बहन कहती हैं कि ये ठीक है कि मेरी बहन को पुलिस को फ़ोन करना चाहिए था लेकिन उस वक़्त किस तरह की स्थितियां थी ये तो कोई नहीं जानता। वो कहती हैं "मैं हर उस महिला से जो घर से बाहर निकलती है उसे कहना चाहूंगी कि सतर्क रहें। कहीं भी अकेले ना जाएं।"
 
क़ानून को लेकर क्या कुछ कहना है
पीड़िता की बहन कहती हैं कि क़ानून और सख़्त होना चाहिए ताकि इस तरह के हादसे ना हों। वो कहती हैं "इंसानियत नाम की चीज़ नहीं रह गई है। नैतिकता को स्कूले के पाठ्यक्रम में होना चाहिए। शिक्षा दी जा रही है लेकिन अनुशासन नहीं। बच्चों को सही और ग़लत के बीच का फ़र्क समझाया जाना चाहिए। वो सिर्फ़ पैसे कमाने के लिए पढ़ाई ना करें।"
 
मीडिया के व्यवहार पर क्या कुछ कहना है
"मैं मीडिया की आलोचना नहीं करना चाहती। एक बार जब मेरे और मेरी बहन के बीच हुए अंतिम संवाद की क्लिप सार्वजनिक हो गई तो भी उसके बाद ये पूछना कि मेरे और उसके मध्य क्या बात हुई... कहां तक सही है। सब कुछ सामने है, फिर भी पूछा जा रहा है। वो ऐसा सिर्फ़ भावनाओं को दोबारा से जगाने के लिए कर रहे हैं लेकिन एक परिवार जो ऐसे दर्द से गुज़र रहा हो उसके साथ ऐसा करना क्या सही है?"
 
मीडिया पर सवाल उठाते हुए वो कहती हैं कि अगर मीडिया को कुछ पता ही करना है तो ये पता करे कि इस घटना के पीछे वजह क्या थी। बजाय बैकग्राउंड को कुरेदने के।
 
"हम पहले से ही परेशान हैं। हर बार उसे खोने का दर्द महसूस कर रहे हैं। ऐसे में ये सवाल उस दर्द को बढ़ा ही रहा है। मैं सिर्फ़ यही कहना चाहूंगी कि ज़ागरुकता बढाइए ताकि एक सुरक्षित समाज बन सके।"

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