rashifal-2026

अनुच्छेद 370: कश्मीर पर पाकिस्तान के पास क्या हैं विकल्प?

Webdunia
बुधवार, 7 अगस्त 2019 (12:06 IST)
- आज़म ख़ान (बीबीसी उर्दू, इस्लामाबाद)
 
भारत में जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देनेवाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को ख़त्म करने के फ़ैसले के बारे में पाकिस्तान और भारत के कई संविधान विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबे समय से चली आ रही समस्या और गंभीर हो जाएगी। पाकिस्तान में अंतरराष्ट्रीय क़ानून के जानकार अहमर बिलाल सूफ़ी का कहना है कि कश्मीर आज भी अंतरराष्ट्रीय क़ानून की नज़र में एक विवादास्पद क्षेत्र है।
 
वो कहते हैं, "भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रस्तावों को नज़रअंदाज किया है। अनुच्छेद 370 कश्मीर के साथ हर तरह से जुड़ा हुआ है। यह सुरक्षा परिषद द्वारा सुझाई गई व्यवस्था थी। जब तक यह समस्या ज़मीनी हक़ीकत के आधार पर तय नहीं होती, यह (विशेष दर्जा) बना रहेगा। इस क्षेत्र को (अभी भी) भारत का हिस्सा नहीं माना जाएगा। इसे बदलने का मतलब है कि आप सुरक्षा परिषद या संयुक्त राष्ट्र के अधिकार क्षेत्र में दखल कर रहे हैं।"
 
वरिष्ठ भारतीय वकील एमएम अंसारी भी इस बात से सहमत हैं कि भारत ने कश्मीर के लोगों की इच्छाओं की परवाह नहीं की। उनके अनुसार, "द्विपक्षीय बातचीत के बजाए भारत ने कश्मीर के मुद्दे को हल करने की एकतरफा कोशिश की है। फ़ैसला लेने की इस प्रक्रिया में विपक्षी पार्टियां और यहां तक कि कश्मीर दूर-दूर तक कहीं नहीं दिखाई दिया।"
 
एमएम अंसारी बिलाल सूफ़ी की इस बात से भी सहमति जताते हुए कहते हैं कि कश्मीर अब भी एक विवादास्पद क्षेत्र है और भारत सरकार की इस नई पहल के बावजूद यहां की अंतरराष्ट्रीय स्थिति नहीं बदली है।
 
अंसारी कहते हैं, "भारत ने खुद शिमला समझौते में यह तय किया था कि वह पाकिस्तान के साथ बातचीत करेगा, लेकिन अब वो बात करने को राज़ी नहीं है। अब कश्मीर मुसलमान बहुल इलाका नहीं रह जाएगा, जिससे कश्मीरी लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो जाएगी।"
 
सूफ़ी ने ये भी कहा कि कश्मीर को पाकिस्तान में शामिल होना था लेकिन कश्मीर ने भारत से जुड़ने का फ़ैसला किया और समझौते के अनुसार, कुछ समय के लिए शेख अब्दुल्ला कश्मीर के प्रधानमंत्री बने थे।
 
सूफ़ी ने कहा, "भारत के अन्य राज्यों के विपरीत, कश्मीर का भारत में कभी विलय नहीं किया गया लेकिन अब हम 70 साल पीछे चले गये हैं।"
 
"बाधा थी धारा 370"
एमएम अंसारी कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फ़ैसले से भारत और कश्मीर में चिंता की स्थिति पैदा हो गयी है। वो कहते हैं कि आज भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का एजेंडा पूरा हो गया है जिन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में वादा किया था कि अनुच्छेद 370 और 35-ए को निरस्त कर दिया जाएगा।
 
अहमर बिलाल सूफी की राय में अनुच्छेद 370 बीजेपी के लिए एक बाधा थी। सूफ़ी कहते हैं, "बीजेपी और संघ संविधान के इस प्रावधान को लेकर शुरू से ही विरोध में थे लिहाज़ा उन्होंने संविधान को बदल दिया।"
 
एमएम अंसारी के अनुसार समस्या यह है कि इस अनुच्छेद को संविधान के साथ भारत और कश्मीर के नेतृत्व की बीच हुई लंबी बातचीत के बाद शामिल किया गया था, जिसके तहत यह तय किया गया था कि विदेशी मामलों, रक्षा और संचार के अलावा कश्मीर की संप्रभुता बरकरार रहेगी।
 
वो कहते हैं, "इस अनुच्छेद को निरस्त किये जाने से पहले, न तो कोई प्रजातांत्रिक कदम उठाया गया और न ही उन कश्मीरी नेताओं से ही परामर्श लिया गया जो अब तक भारत का समर्थन कर रहे थे।"
 
अब पाकिस्तान के पास क्या विकल्प हैं?
अहमर बिलाल सूफ़ी के मुताबिक इस फ़ैसले के जवाब में पाकिस्तान के पास कई विकल्प मौजूद हैं। वो कहते हैं कि पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र का ध्यान आकर्षित करने के साथ ही क्षेत्रीय तनाव और सैन्य कूटनीति के आधार पर सुरक्षा परिषद का एक विशेष सत्र बुलाने के लिए बात कर सकता है।
 
सूफ़ी कहते हैं कि पाकिस्तान वहाँ ये कह सकता है कि अनुच्छेद 370 की समाप्ति से अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा को ख़तरा है। वो कहते हैं, "अनुच्छेद 370 को हटाया जाना सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव का उल्लंघन है और अब यह उनकी ज़िम्मेदारी है कि वो दोनों देशों से इस पर उनका पक्ष सुनें और साथ ही यह तय करें कि इस पर आगे कैसे बढ़ना है। सुरक्षा परिषद भारत और पाकिस्तान के साथ कश्मीर मुद्दे पर चर्चा के बाद एक विस्तृत रिपोर्ट पेश कर सकता है।"
 
अहमर बिलाल के मुताबिक, पाकिस्तान के पास दूसरा विकल्प है कि वो दुनिया के सामने तर्कों के साथ अपना रुख रखे। वो कहते हैं कि पाकिस्तान को दुनिया भर के देशों की राजधानी में अपना रुख और तर्क पेश करना चाहिए। 
 
मगर वो साथ ही कहते हैं कि ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, अमरीका, रूस, चीन और अन्य देश जब इस मसले पर अपना राजनीतिक पक्ष रखेंगे तो निश्चित ही अपने क़ानूनी विशेषज्ञों से राय करने के बाद ही कि, दोनों देशों में से कौन सबसे सही है।

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने PM मोदी का किया समर्थन, सोमनाथ पर लिखे ब्लॉग के लेकर क्या बोले

UP : पैतृक संपत्ति के बंटवारे की रजिस्ट्री अब सिर्फ 10 हजार रुपए में होगी संभव, योगी सरकार का बड़ा सुधारात्मक कदम

यूपी SIR : ड्रॉफ्ट लिस्ट जारी, 12.55 करोड़ वोटर बचे, लिस्ट से कटेंगे 2.89 करोड़ नाम, नाम नहीं तो क्या करें

Operation Sindoor : फूट-फूटकर रोया पाकिस्तान का आतंकी मसूद अजहर, मारे गए परिवार के 10 लोग

Delhi High Court का बड़ा बयान, छोटे बच्चे को गुप्तांग छूने के लिए मजबूर करना गंभीर यौन हमला

सभी देखें

मोबाइल मेनिया

Redmi Note 15 5G : सस्ता 5जी स्मार्टफोन, धांसू फीचर्स, कीमत में डिस्काउंट के साथ मिल रही है छूट

Year End Sale : Motorola G05 पर बड़ी छूट, 7,299 में दमदार फीचर्स वाला स्मार्टफोन

iPhone 18 Pro में दिखेंगे बड़े बदलाव, नया डिजाइन, दमदार A20 Pro चिप, कैमरा और बैटरी में अपग्रेड

जनवरी 2026 में स्मार्टफोन लॉन्च की भरमार, भारतीय बाजार में आएंगे कई दमदार 5G फोन

Best Budget Smartphones 2025: 15000 से कम में Poco से Lava तक दमदार स्मार्टफोन, जिन्होंने मचाया धमाल

अगला लेख