Hanuman Chalisa

देर रात तक जागने वालों के लिए अचूक टिप्स

Webdunia
मंगलवार, 15 मई 2018 (11:06 IST)
- एलेक्स थेरियन (स्वास्थ्य संवाददाता)
 
जल्दी और देर से सोने वाले लोगों की सेहत पर एक नया अध्ययन हुआ है जिसके नतीजे 'निशाचरों' को परेशान कर सकते हैं। इस अध्ययन में सामने आया है कि देर रात तक जागने वालों को जल्दी मौत का ख़तरा होता है। इसके अलावा उन्हें मनोवैज्ञानिक रोग और सांस लेने संबंधी दिक़्कतें भी हो सकती हैं।
 
लेकिन क्या देर रात तक जागना वाक़ई आपके लिए बुरा है? क्या इसका मतलब है कि 'रात के उल्लुओं' को अपनी आदत बदलकर सुबह की गौरैया बन जाना चाहिए?
 
'सोशल जेट लैग'
दफ़्तर के दिनों में कमबख़्त अलार्म की कर्कश ध्वनि आपको बिस्तर से उठाकर अलग कर देती है। शनिवार आते-आते आप नींद के मारे थक चुके होते हैं और फिर अपने रोज़ के समय से ज़्यादा सोते हैं।
 
यह सुनने में सामान्य लगता है, लेकिन यह इस बात का संकेत है कि आपको पर्याप्त नींद नहीं मिल रही और आप 'सोशल जेट लैग' के शिकार हैं। 'सोशल जेट लैग' हफ़्ते के दिनों के मुक़ाबले छुट्टी के दिन में आपकी नींद का अंतर है, जब हमारे पास देर से सोने और देर से उठने की 'सहूलियत' होती है।
 
सोशल जेट लैग जितना ज़्यादा होगा, सेहत की दिक्क़तें उतनी ज़्यादा होंगी। इससे दिल की बीमारी और मेटाबॉलिक परेशानियां हो सकती हैं। म्यूनिख की लुडविग-मैक्समिलन यूनिवर्सिटी में क्रोनोबायोलॉजी के प्रोफ़ेसर टिल रोएनबर्ग के मुताबिक, "यही वो चीज़ है जिसके आधार पर ऐसे अध्ययन सुबह देर से उठने वालों के लिए सेहत से जुड़े ख़तरे ज़्यादा बताते हैं।"
 
स्लीप एंड सर्कैडियन न्यूरोसाइंस इंस्टीट्यूट और नफ़ील्ड लेबोरेट्री ऑफ़ आप्थलमोलॉजी के प्रमुख रसेल फ़ोस्टर कहते हैं कि अगर आप सुबह जल्दी उठने वालों से देर रात तक काम करवाएं तो उन्हें भी स्वास्थ्य की दिक़्कतें होंगी।
 
'यह इंसान का जीव विज्ञान है'
तो देर रात जागने वाले क्या करें?
क्या वीकएंड पर मिलने वाली अपनी बेशक़ीमती लंबी नींद का त्याग कर दें?
प्रोफेसर रोएनबर्ग कहते हैं, "यह सबसे ख़राब बात होगी।"
 
वह मानते हैं कि देर रात तक जागना अपने आप में बीमारियां पैदा नहीं करता। वह कहते हैं, "अगर आप पांच दिनों तक कम सोए हैं तो आप अपनी नींद की भरपाई करेंगे ही और ऐसा आप तभी कर पाएंगे जब आपके पास वक़्त होगा।"
 
ऐसा इसलिए भी है कि हमारे सोने-जागने का समय सिर्फ़ आदत या अनुशासन का मसला नहीं है। यह हमारी बॉडी क्लॉक पर निर्भर करता है जिसका 50 फ़ीसदी हिस्सा हमारे जीन तय करते हैं।
 
बाकी 50 फ़ीसदी हिस्सा हमारा पर्यावरण और उम्र तय करती है। इंसान बीस की उम्र में देर से सोने के चरम पर होता है और उम्र बढ़ने के साथ हमारा बॉडी क्लॉक पहले की ओर खिसकता जाता है।
 
यूनिवर्सिटी ऑफ़ सरे में क्रोनोबायोलॉजी के प्रोफेसर मैल्कम वॉन शांत्ज़ कहते हैं, "हमने ये मान लिया है कि देर तक जागने वाले लोग किसी काम के नहीं होते और आलसी होते हैं, लेकिन असल में यह इंसानी जीवविज्ञान है।" यही विज्ञान है जो उल्लुओं और सुबह चहचहाने वाले पक्षियों को भी प्रभावित करता है।
 
इस तरह दें बॉडी क्लॉक को गच्चा
जानकार मानते हैं कि वीकएंड पर जल्दी उठ जाने से आप अपनी जेनेटिक प्रवृत्तियों से नहीं उबर पाएंगे बल्कि इससे आप अपनी नींद से और वंचित ही होते रहेंगे। इसके बजाय अपने बॉडी क्लॉक को भ्रमित करने का बेहतर तरीक़ा रोशनी से जुड़ा है। हमारा बॉडी क्लॉक सूरज के उगने और छिपने से प्रभावित होता है, लेकिन हम में से बहुतों को दिन में कम सूरज की रोशनी नसीब होती है और रात में कृत्रिम प्रकाश ज़्यादा मिलता है।
 
इससे हमें नींद जल्दी नहीं आती। यह देर रात तक जागने वालों की आम समस्या है, जो पहले से ही अपने जीव विज्ञान के चलते 'देरी' के शिकार होते हैं। सुबह सूरज की रोशनी लेकर और रात में कृत्रिम रोशनी - ख़ास तौर पर हमारे फोन और लैपटॉप से आने वाली नीली रौशनी- से ख़ुद को बचाकर हम अपने बॉडी क्लॉक को जल्दी नींद बुलाने की ट्रेनिंग दे सकते हैं।
 
समाज की ज़िम्मेदारी
नींद पर वैज्ञानिक अध्ययन करने वाले कहते हैं कि इसमें दफ़्तरों, स्कूलों और समाज की भी ज़िम्मेदारी बनती है कि वे रात में जागने वालों को स्वीकार करें। इसकी शुरुआत इस तरह हो सकती है कि ज़्यादा कर्मचारियों को शाम से देर रात तक काम करने की इजाज़त दी जाए। इसके अलावा प्रोफेसर फॉस्टर के मुताबिक, लोग अपने बॉडी क्लॉक के हिसाब से दफ़्तरों में काम करेंगे तो यह ज़्यादा तर्कपूर्ण होगा।
 
इससे कर्मचारियों का प्रदर्शन भी बेहतर होगा और चौबीस घंटे चलने वाले कारोबार को इससे फ़ायदा ही होगा। प्रोफेसर रोएनबर्ग एक क़दम आगे बढ़कर कहते हैं, "यह समाज का काम है कि वह इसका ख़्याल रखे। यह समाज का काम है कि वह इमारतों में और रोशनी बढ़ाए, साथ ही नीली रोशनी को कम करे ताकि लोग अपने बॉडी क्लॉक को बदले बिना टीवी देख सकें।"

सम्बंधित जानकारी

Show comments

जरूर पढ़ें

Reliance Industries का रिकॉर्ड प्रदर्शन, FY26 में मुनाफा ₹95,754 करोड़, जियो और रिटेल ने दिखाई दमदार ग्रोथ

Raghav Chadha : राघव चड्ढा समेत 6 AAP सांसदों का BJP में जाने पर आया अरविंद केजरीवाला का रिएक्शन, अन्ना हजारे ने क्या कहा

AAP सांसदों की बगावत पर बरसे भगवंत मान, बोले- ये पंजाबियों के गद्दार हैं, उन्हें BJP में कुछ नहीं मिलेगा...

क्‍या केजरीवाल का ‘मैं’ पड़ा ‘आप’ पर भारी, क्‍यों बिछड़े सभी बारी बारी?

राघव चड्ढा सहित 7 सांसदों के भाजपा में जाने से मोदी सरकार को कितना फायदा होगा?

सभी देखें

मोबाइल मेनिया

Vivo Y05 : सबसे सस्ता स्मार्टफोन भारत में लॉन्च, 6500mAh बैटरी, 120Hz डिस्प्ले और Extended RAM के साथ

अगर आप भी देर तक मोबाइल देखते हैं तो जान लें ये नुकसान

iPad mini को टक्कर देगा Oppo Pad Mini, 144Hz OLED डिस्प्ले, Snapdragon 8 Gen 5 और दमदार बैटरी जैसे फीचर्स

Google Pixel 10a: फ्लैट डिजाइन और दमदार परफॉर्मेंस के दम पर क्या मिड-रेंज बाजार में बना पाएगा खास जगह?

Poco X8 Pro सीरीज भारत में लॉन्च: 9000mAh बैटरी और 'आयरन मैन' अवतार में मचाएगा धूम, जानें कीमत और फीचर्स

अगला लेख