Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

पीएम मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी बारिश के पानी से बेहाल

webdunia
शुक्रवार, 4 अक्टूबर 2019 (10:03 IST)
रिज़वाना तबस्सुम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संसदीय क्षेत्र वाराणसी बरसात से कम लेकिन बारिश के पानी से ज़्यादा परेशान है। चार दिन की बारिश ने बनारस की व्यवस्थाओं की पूरी पोल खोलकर रख दी है। शहर का कोई भी ऐसा कोना नहीं बचा है जहां पानी नहीं जमा हुआ हो।

webdunia
बारिश आई और गई लेकिन बारिश जाने के चार दिन के बाद भी सभी जगह पानी जमा हुआ है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय, पुलिस लाइन, पुलिस आवास, पुलिस ग्राउंड, पुलिस क्लब आवास, ज़िला प्रतिसार कार्यालय, जिला बेसिक अधिकारी कार्यालय सहित अन्य कार्यालयों में बरसात का पानी लबालब भर गया जिसके कारण सभी काम रुके हुए हैं।
 
जल निकासी की सही व्‍यवस्‍था नहीं होने से लोगों के घरों और दुकानों में पानी घुस गया, कोनिया, सामने घाट, सरैया, डोमरी, नगवा, रमना, बनपुरवा, शूलटंकेश्वर के कुछ गांव, फुलवरिया, सुअरबड़वा, नक्खीघाट, सरैया समेत कई इलाकों में पानी कहर मचा रहा है जिससे हालत बेहद ख़राब हो गए हैं।
 
webdunia
ये सभी बुनकर क्षेत्र हैं जहां पर पानी घुस जाने की वजह से काम ठप हो गए हैं, जिससे करीब 50 हज़ार लोगों का आजीविका प्रभावित हुई है। 
 
ज़िले के दोनों रेल मंडलों की एक दर्जन से ज्यादा कॉलोनियों में रेलकर्मी और उनके परिजन घरों में कै़द होकर रह गए हैं। उत्तर रेलवे की एईएन कॉलोनी की स्थिति सबसे ज्यादा ख़राब है। जल निकासी के ठोस इंतजाम न होने से टुल्लू से पानी निकालने की रात-दिन क़वायद चल रही है। रेलवे कॉलोनियों से जनरेटर लगाकर पानी निकाला जा रहा है।
 
ज़िले के बाकराबाद के बुनकर मोहम्मद अहमद अंसारी बताते हैं, "हर साल हल्की सी बरसात में भी पीलीकोठी, मजूरूलूम, आजाद पार्क, जियाउल उलूम, ये इलाका पानी में डूबा हुआ होता है। ऐसा नहीं है कि बहुत बारिश हो तभी ऐसा होता है। केवल घंटे भर की बारिश सभी जगह पानी-पानी हो जाता है। पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने की वजह से सीवर जाम हो जाता है। सीवर जाम होने की वजह से पानी इकट्ठा हो जाता है।"
 
webdunia
चौकाघाट से राजघाट तक बुनकरों की बस्ती है। लगभग तीन किलोमीटर तक के इस इलाके में 50 हज़ार लोग रहते हैं। बरसात के मौसम में यहां पानी भर जाता है। यहाँ का मुख्य काम दस्तकारी है। मशीन हो, पवारलूम हो या हैंडलूम हो, सब ज़मीन पर ही चलता है।
 
बुनकर जियाउद्दीन अंसारी ने बीबीसी से कहा, "यहाँ का ड्रेनेज सिस्टम बहुत ही ज्यादा खराब है। थोड़ा सा भी पानी बरसता है तो ओवरफ़्लो हो जाता है। यहाँ के लोग बुनाई के काम से जुड़े हुए हैं। जब बारिश होती है तो पानी घर में आ जाता है। जिसकी वजह से काम बंद हो जाता है। बारिश के बाद कई महीने तक लोगों को अपना काम से सेट करने में कई महीने लग जाते हैं।"
 
webdunia
शहर के सबसे व्यस्त जगह में से एक गोदौलिया के संजय सिंह कहते ते हैं, "चुनावी रैली के दौरान पीएम मोदी लंका से यहाँ तक (लंका से गोदौलिया) आए थे, हमारी इच्छा है कि एक बार फिर हमारे माननीय सांसद नरेंद्र मोदी लंका से यहाँ तक आएं, जब वो एक बार इस पानी में सफर करेंगे तब उनको समझ आएगा वाकई में असल समस्या क्या है। उन्हें सड़क की भी समस्या समझ आएगी, उन्हें पानी की भी समस्या समझ आएगी और पानी निकासी की भी समस्या समझ आ जाएगी।"
 
संजय सिंह यही नहीं रुकते, वो कहते हैं, "नरेंद्र मोदी प्रधानमंत्री बाद में हैं, पहले हमारे यहाँ के सांसद हैं। एक सांसद होने के नाते उन्हें हमारी समस्याएँ समझनी चाहिए। उन्हें समझना चाहिए कि भले ही बारिश दो दिन होती हो लेकिन हमारा नुक़सान तो कई दिन का होता है।"
 
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई उत्तर प्रदेश जलनिगम वाराणसी के महाप्रबंधक एसके राय कहते हैं, "वाराणसी में जल निकासी के लिए 2009 में एक योजना (स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम) बनी थी। 253 करोड़ रुपये की इस योजना में पूरे ज़िले भर में लगभग 76 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई गई थी।"
 
webdunia
एसके राय बताते हैं कि ये योजना 2014 में ही पूरी हो गई थी बस एक सड़क का काम बाक़ी था जो 2015 में पूरा कर लिया गया।
 
जलनिगम वाराणसी के महाप्रबंधक एसके राय कहते हैं, "2015 के बाद से वाराणसी ज़िले में जल निकासी को लेकर कोई योजना नहीं बनी है। जल निकासी की योजना 2015 से ही पूरी हो गई है। इस समय वही शहर में कारगर है।"
 
गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई उत्तर प्रदेश जलनिगम वाराणसी के महाप्रबंधक एसके राय कहते हैं, "वाराणसी में जल निकासी के लिए 2009 में एक योजना (स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज सिस्टम) बनी थी। 253 करोड़ रुपये की इस योजना में पूरे ज़िले भर में लगभग 76 किलोमीटर पाइप लाइन बिछाई गई थी।"
 
webdunia
एसके राय बताते हैं कि ये योजना 2014 में ही पूरी हो गई थी बस एक सड़क का काम बाक़ी था जो 2015 में पूरा कर लिया गया।
 
जलनिगम वाराणसी के महाप्रबंधक एसके राय कहते हैं, "2015 के बाद से वाराणसी ज़िले में जल निकासी को लेकर कोई योजना नहीं बनी है। जल निकासी की योजना 2015 से ही पूरी हो गई है। इस समय वही शहर में कारगर है।"
 
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद सदस्य शतरूद्र प्रकाश बताते हैं, "साल 2006 में बनाए गए वाराणसी सिटी डेवलपमेंट प्लान में जल निकासी के लिए 30515 लाख खर्च कर दिए गए, कई सालों तक खुदाई हुई, लोगों को परेशानी हुई लेकिन कोई हल नहीं हुआ। जल निकासी पाइन लाइन, सीवर पाइप लाइन, पेयजल पाइप लाइन के लिए सड़कें तो खोद दी गईं लेकिन इसके लिए कोई नक्शा नहीं बनाया गया।"
 
पिछले लोकसभा चुनाव में वाराणसी से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ चुनाव लड़ने वाले और पाँच बार विधायक रहे अजय राय बताते हैं, "भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने बनारस को एक प्रयोगशाला बना दिया है। हमेशा से बनारस के साथ एक्सपेरिमेंट करते रहते हैं। कभी क्योटो बना देते हैं, कभी स्मार्ट सिटी बना देते हैं लेकिन धरातल पर ऐसा कुछ नहीं हुआ है जिससे स्मार्टनेस दिखाई दे और बनारस में कुछ परिवर्तन दिखाई दे।"
 
सामाजिक कार्यकर्ता संजीव कुमार सिंह कहते हैं, "पिछले करीब तीस साल से बनारस (नगर निगम) में अधिकतर बीजेपी की ही सरकार रही है। इसलिए शहरी व्यवस्था के लिए चाहे वो पानी निकासी की व्यवस्था हो, पीने की पानी हो या, स्ट्रेट लाइट का हो ये सब इन्हीं की ज़िम्मेदारी थी। स्मार्ट सिटी में दीवारों पर पेंट के अलावा और कोई काम नहीं हुआ है। अगर काम हुआ होता तो आज बरसात की पानी इकट्ठा नहीं होता। लोगों को साफ पानी मिलता।"

Share this Story:

वेबदुनिया पर पढ़ें

समाचार बॉलीवुड लाइफ स्‍टाइल ज्योतिष महाभारत के किस्से रामायण की कहानियां धर्म-संसार रोचक और रोमांचक

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

बांग्लादेश के लिए कितनी अहमियत रखता है भारत?