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बृज भूषण शरण सिंह कौन हैं जिन पर कुश्ती के कई दिग्गज खिलाड़ियों ने शोषण का आरोप लगाया है

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BBC Hindi

गुरुवार, 19 जनवरी 2023 (07:37 IST)
दिल्ली में जंतर-मंतर पर भारतीय कुश्ती के कई दिग्गज पहलवान बुधवार से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इन खिलाड़ियों का आरोप है कि कुश्ती संघ उनका शोषण कर रहा है। इन पहलवानों ने भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह पर कुश्ती संघ को मनमाने तरीक़े से चलाने का आरोप लगाया है।
 
एशियन गेम्स और राष्ट्रमंडल खेलों में भारत को कई पदक दिलाने वाली महिला कुश्ती खिलाड़ी विनेश फोगाट ने कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बृज भूषण सिंह पर कई लड़कियों के यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। विनेश ने कहा, "भारतीय कुश्ती महासंघ के प्रेसीडेंट ने कई लड़कियों का यौन उत्पीड़न किया है।"
 
उन्होंने कहा, "वे हमारी निजी ज़िंदगी में दखल देते हैं और परेशान करते हैं। वे हमारा शोषण कर रहे हैं। जब हम ओलंपिक खेलने जाते हैं तो न तो हमारे पास फ़िज़ियो होता है न कोई कोच। जब हमने अपनी आवाज़ उठाई तो उहोंने हमें धमकाना शुरू कर दिया।"
 
कुश्ती के दिग्गज़ खिलाड़ियों के आरोपों पर बृज भूषण सिंह ने कहा, "कोई भी आदमी ऐसा है जो कह सके कि कुश्ती संघ में एथलीटों का उत्पीड़न किया गया है। कोई तो होना चाहिए? क्या पिछले 10 सालों से फ़ेडरेशन से उन्हें कोई दिक़्क़त नहीं थी।"
 
उन्होंने यह दावा करते हुए कि किसी भी एथलीट का यौन शोषण नहीं हुआ है, ये भी कहा कि "अगर ये आरोप सच साबित होता है तो मैं फांसी पर लटकने के लिए तैयार हूं।"
 
इस मामले में खेल मंत्रालय ने भारतीय कुश्ती महासंघ से स्पष्टीकरण मांगा है। मंत्रालय ने कुश्ती महासंघ को 72 घंटों के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है।
 
कौन हैं बृज भूषण सिंह?
बृज भूषण सिंह की गिनती दबंग नेताओं में होती है। वे उत्तर प्रदेश के गोंडा के रहने वाले हैं और कैसरगंज लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के सांसद हैं।
 
छात्र जीवन से ही राजनीतिक तौर पर बेहद सक्रिय रहे बृज भूषण शरण सिंह का युवा जीवन अयोध्या के अखाड़ों में गुज़रा। पहलवान के तौर पर वे ख़ुद को 'शक्तिशाली' कहते हैं। कॉलेज के दौर में ही वे छात्र संघ के अध्यक्ष चुने गए और यहां से शुरू हुआ उनका सक्रिय राजनीतिक जीवन।
 
1991 में पहली बार लोकसभा के लिए चुने जाने वाले बृज भूषण सिंह, 1999, 2004, 2009, 2014 और 2019 में भी लोकसभा के लिए चुने गए। कुल मिलाकर वे छह बार लोकसभा के लिए चुने गए हैं।
 
बृज भूषण सिंह 2011 से ही कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष भी हैं। 2019 में वे कुश्ती महासंघ के तीसरी बार अध्यक्ष चुने गए थे। 1988 में वे बीजेपी से जुड़े और फिर पहली बार 1991 में रिकॉर्ड मतों से सांसद बने।
 
हालांकि भारतीय जनता पार्टी के साथ मतभेद के चलते उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी और 2009 के लोकसभा चुनाव में वे सपा के टिकट पर कैसरगंज से जीते। इसके बाद वे एक बार फिर 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले बीजेपी में शामिल हो गए। बाद के वर्षों में बृज भूषण शरण सिंह का प्रभुत्व गोंडा के साथ-साथ बलरामपुर, अयोध्या और आसपास के ज़िलों में बढ़ता गया और वे 1999 के बाद से अब तक एक भी चुनाव नहीं हारे हैं।
 
बृज भूषण शरण सिंह के बेटे प्रतीक भूषण भी राजनीति में हैं। प्रतीक गोंडा से बीजेपी विधायक हैं। 
 
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हिंदुवादी नेता और विवादों से नाता
बीजेपी से जुड़ने के बाद बृज भूषण शरण सिंह ने अपनी छवि एक हिंदुवादी नेता के तौर पर बनाई और अयोध्या के बाबरी मस्जिद ढांचे को गिराने के अभियुक्त भी रहे।
 
हिंदुत्व राजनीति के मुखर समर्थक रहे बृज भूषण सिंह का नाम बीजेपी के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी के साथ उन 40 अभियुक्तों में शामिल था जिन्हें 1992 में अयोध्या में बाबरी मस्जिद के ढांचे को गिराने का ज़िम्मेदार माना गया था। हालांकि सितंबर 2020 में कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया था।
 
गोंडा के स्थानीय लोग बताते हैं कि बृज भूषण सिंह सक्रिय राजनीति में उतरने के पहले कुश्ती प्रतियोगिताएं आयोजित कराया करते थे।
 
इन्हें महंगी एसयूवी गाड़ियों का बेहद शौक़ है और सूबे की राजधानी लखनऊ के लक्ष्मणपुरी इलाक़े में इनका एक आलीशान बंगला है जिसमें इनकी चमचमाती गाड़ियों को खड़ी करने के लिए जगह कम पड़ जाया करती है।
 
हालांकि अतीत में उन पर हत्या, आगज़नी और तोड़-फोड़ करने के भी आरोप लग चुके हैं। पिछले दिनों झारखंड में अंडर-19 नेशनल कुश्ती चैंपियनशिप के दौरान एक रेसलर को उन्होंने मंच पर ही थप्पड़ मार दिया था। वो चैंपियनशिप 15 साल से कम उम्र वालों के लिए थी और जिस खिलाड़ी को उन्होंने थप्पड़ मारा था उनकी उम्र कुछ अधिक थी। इसलिए आयोजकों ने उन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने की अनुमति नहीं दी।
 
इसके बाद वे इसकी शिकायत लेकर मंच पर चले गए। तब उनकी भारतीय कुश्ती संघ के अध्यक्ष बृज भूषण शरण सिंह से कुछ बहस हुई और इसके बाद सांसद ने उन्हें मंच पर ही थप्पड़ मार दिया।
 
बिगड़े बोल की वजह से हमेशा सुर्ख़ियों में रहे
2022 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान बृज भूषण शरण सिंह ने कहा था कि समाजवादी पार्टी को वोट दोगे तो पाकिस्तान ख़ुश होगा। उन्होंने ये भी कहा कि "पाकिस्तान पर क्यों न बोलें, क्या मोदी और योगी को हराने की चिंता पाकिस्तान में नहीं हो रही है।"
 
तब उन्होंने कहा था कि "ये हमारी ही पार्टी में संभव है कि हम कलाम को राष्ट्रपति बनाते हैं। कलाम बन कर रहो तो राष्ट्रपति बनाएंगे... कसाब बन कर आओगे तो काटेंगे।"
 
बीते साल नवंबर में गोंडा में आयोजित एक कुश्ती प्रतियोगिता के दौरान उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी को लेकर विवादित बयान दिया था। उन्होंने कहा था, "मैं गारंटी लेता हूं कि ओवैसी के पूर्वज हिंदू थे और उनके बाबा के पिताजी का नाम तुलसीराम दास था।"
 
सपा नेता आज़म ख़ान पर उन्होंने कहा था कि "आज़म ख़ान के बारे में मुझे जानकारी नहीं है, तो मैं उनके बारे में नहीं बोल सकता।"
 
तब ओवैसी की पार्टी के प्रवक्ता मोहम्मद फ़रहान ने कहा था, "बृज भूषण शरण सिंह अपना मानसिक संतुलन खो चुके हैं। दिमाग़ी संतुलन खोने की वजह से ही वह ओवैसी के पूर्वजों को हिंदू बताने पर तुले हुए हैं।
 
बीजेपी को उनका किसी अच्छे अस्पताल में इलाज करवाना चाहिए। अगर बीजेपी इलाज नहीं कराएगी तो हैदराबाद में ओवैसी के अस्पताल में बृजभूषण शरण सिंह का मुफ़्त इलाज कराया जाएगा।"
 
कुछ दिनों पहले बृज भूषण शरण सिंह ने राहुल गांधी और बिलावल भुट्टो को 'एक ही नस्ल' का बताया था। तब उन्होंने कहा था कि "पता नहीं ये कैसे इधर-उधर हो गए।"
 
रामदेव के पतंजलि घी पर लगाया आरोप
बृज भूषण सिंह योगगुरु रामदेव पर अपने बयान को लेकर भी सुर्ख़ियों में रहे हैं। उन्होंने पतंजलि पर नकली घी बेचने का आरोप लगाया था। तब पतंजलि ने उन्हें लीगल नोटिस भेज कर माफ़ी मांगने को कहा था, लेकिन सांसद ने माफ़ी नहीं मांगी थी। इसके बाद पतंजलि की ओर से उन्हें दोबारा नोटिस भेजा गया तो वो बिफर पड़े।
 
उन्होंने कहा, "जिन महर्षि पतंजलि के नाम का उपयोग किया जा रहा है उनकी जन्मभूमि उपेक्षा की शिकार है। महर्षि पतंजलि के नाम का उपयोग बंद होना चाहिए।" वे बोले कि अगर महर्षि पतंजलि के नाम का दुरुपयोग बंद नहीं हुआ तो वे इसे लेकर देशव्यापी आंदोलन करेंगे।
 
अपनी पार्टी को भी लपेटे में लिया
बृज भूषण सिंह अपनी बेबाक बयानबाज़ी के लिए भी जाने जाते हैं। अपनी बेबाकी के लिए हमेशा सुर्ख़ियों में बने रहने वाले बृज भूषण शरण सिंह ख़ुद अपनी पार्टी को भी निशाने पर ले चुके हैं।
 
बीते वर्ष जब उत्तर प्रदेश बारिश और बाढ़ की चपेट में था तब वो अपने चुनाव क्षेत्र पहुंचे और वहां चल रहे राहत कार्यों को देख कर उन्होंने अपनी ही पार्टी को लपेटे में लिया।
 
उन्होंने तब कहा था, "पहले कोई भी सरकार होती थी, बाढ़ के पहले एक बैठक होती थी। हमको नहीं लगता कि कोई तैयारी की बैठक हुई है और लोग भगवान के भरोसे हैं।"
 
सांसद ने ये भी कहा, "बाढ़ से राहत के लिए ऐसी ख़राब व्यवस्था मैंने अपनी जीवन में पहले कभी नहीं देखी। अफ़सोस ये है कि हमलोग रो भी नहीं सकते। अपने भाव को व्यक्त भी नहीं कर सकते।"
 
कुश्ती में कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम
चाहे राष्ट्रीय स्तर के टूर्नामेंट हों या अंतरराष्ट्रीय, चाहे सीनियर टूर्नामेंट हो या जूनियर, भारतीय कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष बनाए जाने के बाद बृज भूषण शरण सिंह हर मंच पर एक प्रशासक के रूप में हमेशा दिखते रहे। अपने हाथ में माइक्रोफ़ोन लेकर वे अक्सर रेफ़री को सलाह देते दिखते तो कभी जजों को रूल बुक समझाते भी नज़र आ जाते।
 
ये बृज भूषण सिंह ही हैं जिन्होंने कुश्ती में अनुबंध व्यवस्था यानी कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम की शुरुआत की। 2018 में लागू की गई इस व्यवस्था के तहत खिलाड़ियों को अलग-अलग ग्रेड में रखते हुए एक साल का अनुबंध दिया जाता है।
 
इस व्यवस्था के तहत ग्रेड ए के खिलाड़ियों को 30 लाख रुपये, ग्रेड बी के खिलाड़ियों को 20 लाख रुपये, ग्रेड सी के पहलवानों को 10 लाख रुपये और ग्रेड डी में 5 लाख रुपये देने का प्रावधान किया गया है।
 
पहली बार जब ये व्यवस्था लागू की गई तब ग्रेड ए में बजरंग पुनिया, विनेश फोगाट और पूजा ढांडा को रखा गया था। वहीं ग्रेड बी में सुशील कुमार और साक्षी मलिक जबकि ग्रेड सी में रितु फोगाट और दिव्या काकरान जैसी खिलाड़ियों को रखा गया था।
 
बृज भूषण शरण सिंह बहराइच, गोंडा, बलरामपुर, अयोध्या और श्रावस्ती के 50 से अधिक शिक्षा संस्थानों से भी जुड़े हुए हैं।
 
बृज भूषण सिंह को राजनीतिक करियर के दौरान मंत्री न बनने की भी कसक है। बीते साल एक कार्यक्रम के दौरान उनका ये दर्द छलक गया था। तब उन्होंने कहा था कि 'हमको मंत्री बनना लिखा ही नहीं है, मेरे हाथ में यह रेखा ही नहीं है, वो तो केवल शास्त्री जी के लिए है।'
 
दरअसल सांसद बृज भूषण के गांव से ही रमापति शास्त्री बीजेपी के वरिष्ठ नेता हैं और दो बार कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं।
(कॉपी - अभिजीत श्रीवास्तव)

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