Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

कोरोना से कुछ लोग पूरी तरह ठीक क्यों नहीं हो रहे हैं?

webdunia
शनिवार, 10 अक्टूबर 2020 (14:49 IST)
ज़्यादातर लोगों के लिए कोविड-19 एक ख़तरनाक बीमारी नहीं हैं, लेकिन कुछ लोगों को इससे पूरी तरह से ठीक होने में काफ़ी दिक्कतें हो रही है औऱ वो कई महीनों से थकान, दर्द और सांस लेने में तकलीफ़ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
 
इस स्थिति को लॉन्ग कोविड कहते हैं, लोगों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे लोग थोड़ी दूर चलने भर से थक जाते हैं।
 
महामारी के दौरान अभी तक पूरा ध्यान लोगों की जान बचाने पर था, लेकिन अब कोविड के लंबे समय तक होने वाले असर के बारे में भी बात शुरू हो गई है।
 
लेकिन कई बुनियादी सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिले हैं, जैसे कि लॉन्ग कोविड क्यों होता है और इसके इसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
 
क्या है लॉन्ग कोविड?
लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है ना ही सभी लोगों में एक जैसे लक्षण होते हैं। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे दो लोगों के लक्षण बिल्कुल अलग हो सकते हैं। लेकिन अत्याधिक थकान होना एक आम लक्षण ज़रूर है।
 
सांस लेने में तकलीफ़, लगातार रहने वाला कफ़, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सरदर्द, सुनने और देखने में तकलीफ, सूंघने की शक्ति ख़त्म होना और और स्वाद का चला जाना जैसे लक्षण लॉन्ग कोविड में पाए जा सकते हैं।
 
इसके अलावा दिल, फेफड़ों और किडनी को भी नुकसान हो सकता है। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे कई लोगों ने डिप्रेशन और एंग्ज़ाइटी की शिकायतें भी की हैं। ये लोगों की रोज़मर्रा की ज़िदगी में बुरा असर डाल सकता है।
बीमारी का सामना कर चुकीं जेड ग्रे क्रिस्टी बताती हैं, "मुझे इस तरह की थकान पहले कभी महसूस नहीं हुई थी।"
 
ऐसा नहीं है कि लॉन्ग कोविड से निपटने में सिर्फ़ उन लोगों को समय लगता है जो इन्टेंसिव केयर में हैं। मामूली लक्षण वाले लोगों को भी ऐसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है।
 
एक्सटर विश्विद्यालय के प्रोफ़ेसर डेविड स्टर्न कहते हैं, "इस बात में कोई शक नहीं हैं कि लॉन्ग कोविड मौजूद है"
 
कैसे होता लॉन्ग कोविड?
 
रोम के एक बड़े अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए 143 लोगों पर की गई एक स्टडी अमरीकन मेडिकल असोसिएशन के एक जर्नल में छपी है।
 
इसके मुताबिक 87 फीसद लोगों में दो महीने बाद भी कम से कम एक लक्षण पाया गया। इनमें से आधे लोगों ने थकान की शिकायत की। हालांकि ऐसी स्टडी उन ही लोगों पर केंद्रित होती है जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता है।
 
ब्रिटेन के कोविड सिप्टम ट्रैकर, जिसे 40 लाख लोग इस्तेमाल करते हैं, उसके आंकड़ों के मुताबिक 30 दिनों के बाद भी 12 फ़ीसद लोगों में लक्षण पाए गए। इसके अभी पब्लिश नहीं हुए डेटा के मुताबिक 2 फ़ीसद लोगों में 90 दिनों के बाद भी लॉन्ग कोविड के लक्षण दिखे।
 
क्या गंभीर कोविड होने पर ही लॉन्ग कोविड होता है?
ऐसा ज़रूरी नहीं है। डबलिन में 50 फ़ीसद लोगों में 10 हफ़्तों के बाद भी कोविड के लक्षण देखे गए। एक-तिहाई लोग अपने काम पर वापस लौट पाने में सक्षम नहीं थे। हालांकि बहुत अधिक थकान लॉन्ग कोविड का सिर्फ एक लक्षण है।
 
लीसेस्टर विश्वविद्यालय के क्रिस ब्राइटलिंग्स कोविड से पीड़ित लोगों को ट्रैक करने से जुड़े एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं।उनका मामना है कि जिन लोगों को निमोनिया हो चुका है, उन्हें आगे कई तकलीफों का सामना कर पड़ सकता है क्योंकि उनके फेफड़ों पर बुरा असर पड़ा है।
 
लॉन्ग कोविड क्यों हो रहा है?
इसे लेकर कई धारणाएं हैं, लेकिन कोई सटीक उत्तर अभी तक नहीं मिला है। हो सकता है कि वायरस शरीर के ज्यादातर हिस्सों से बाहर निकल चुका हो, लेकिन कुछ छोटे जगहों पर मौजूद हो सकता है।
 
किग्स क़ॉलेज लंदन के प्रोफ़ेसर टिम स्पेक्टर के मुताबिक, "अगर लंबे समय तक दस्त हो तो आपको आंते में वायरस मिल जाए, अगर सूंघने की शक्ति बहुत दिनों के लिए चली जाए, तो हो सकता है, ये नसों में हैं, इसलिए दिक्कत हो रही है।"
 
कोरोनावायरस शरीर में कई प्रकार की कोशिकाओं को सीधे संक्रमित कर एक अति सक्रिय इम्यून प्रतिक्रिया को ट्रिगर कर सकता है जिससे नुकसान हो सकता है।
 
एक तर्क यह भी है कि कोविड के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य नहीं होती है जिसका स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है।
 
संक्रमण अंगों के काम करने के तरीके को भी बदल सकता है। ऐसा फेफड़ों के साथ सार्स या मेर्स बीमारियो के बाद देखा गया है। दोनों ही बीमारियां एक तरीक के कोरोनावायरस के कारण ही होती हैं।
 
कोविड लोगों के मेटाबॉलिस्म में भी बदलाव ला सकता है। ऐसे केस सामने आए हैं जहां मधुमेय के रोगियों को कोविड के बाद शुगर कंट्रोल करने में मुश्किलें बढ़ गईं। सार्स ने कई मामलों में शरीर में वसा को प्रोसेस करने के तरीके क़रीब 12 सालों के लिए बदल दिए। दिमाग में भी बदलाव के कुछ शुरुआती संकेत मिले हैं। कोविड खून में भी बदलाव ला सकता है।
 
क्या ये असामान्य है?
वायरल ज़ुकाम या खांसी के कारण भी थकान जैसी समस्याओं का होना आम है, कई तरह के इंफ़ेक्शन के असर से उभरने में काफ़ी समय लग जाता है। कुछ तरह के बुखार का असर भी शरीर पर महीनों तक रहता है।
 
 
प्रोफ़ेसर ब्राइटलिंग के मुताबिक, "ऐस लग रहा है कोविड के लंबे समय के कई लक्षण दिख रहे हैं, और ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है।"
 
हालांकि यह सब अभी अनुमान हैं और जब तक पूरी तस्वीर साफ़ न हो जाए, निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता।

Share this Story:

वेबदुनिया पर पढ़ें

समाचार बॉलीवुड लाइफ स्‍टाइल ज्योतिष महाभारत के किस्से रामायण की कहानियां धर्म-संसार रोचक और रोमांचक

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

ताइवान को लेकर भारतीय मीडिया पर गुस्सा क्यों निकाल रहा है चीन