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बिहार में भाजपा लौटी विकास के मुद्दे पर

अनिल जैन
सोमवार, 19 अक्टूबर 2015 (19:05 IST)
पटना। बिहार विधानसभा चुनाव के लिए भाजपा ने अपनी बदली हुई रणनीति के तहत जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों में कटौती की है, वहीं चुनाव प्रचार के दौरान दादरी कांड या गोमांस विवाद और इसी तरह के अन्य मुद्दों से परहेज करते हुए सिर्फ विकास और केंद्र-राज्य में एक ही पार्टी की सरकार के मुद्दे को ही प्रमुखता से उठाने का फैसला किया है। 
पार्टी नेतृत्व ने इस सिलसिले में बिहार जाने वाले पार्टी के केंद्रीय नेताओं और भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों को भी कह दिया गया है कि वे बिहार में अपनी चुनावी सभाओं में अपना फोकस सिर्फ विकास के मुद्दे पर ही रखे। इसी तरह की हिदायत पार्टी के बिहारी नेताओं को भी दी गई है। 
 
यही वजह है कि तीसरे दौर के मतदान वाले क्षेत्रों में प्रचार के लिए शनिवार को बिहार आए केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह न सिर्फ अपनी सभाओं में दादरी या गोमांस विवाद पर बोलने से साफ बचे बल्कि वे इस बारे में सवालों को भी टाल गए। उन्होंने अपनी सभी चुनावी सभाओं में अपना भाषण विकास के मुद्दे पर ही केंद्रित रखा।
 
पहले चरण के मतदान तक पार्टी की ओर से इस तरह विवादास्पद मुद्दे जोरशोर से उठाए जा रहे थे, लेकिन पहले चरण के मतदान की मिली खबरों के बाद भाजपा ने अपना रुख बदला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 28 सितंबर की दादरी की घटना पर पूरे पंद्रह दिन बाद अपनी प्रतिक्रिया दी और इसे दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण बताया। हालांकि केंद्र सरकार या भाजपा की भूमिका से उन्होंने पूरी तरह से इनकार किया। लेकिन दो हफ्ते बाद आए उनके बयान के बाद इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठे हैं। उनसे एक दिन पहले ही भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने भी दादरी की घटना पर चुप्पी तोड़ी थी और घटना को निंदनीय करार दिया था।
 
बताया जा रहा है कि बिहार में पहले चरण के मतदान की मिली खबरों ने ही भाजपा को अपना रुख बदलने को मजबूर किया है। पार्टी नेतृत्व की ओर से उत्तर प्रदेश के नेताओं भी को दादरी की घटना पर चुप रहने को कहा गया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक भाजपा नेतृत्व को पहले चरण के मतदान के बारे में जो रिपोर्ट मिली है वह ज्यादा उत्साहवर्धक नहीं है। अनुमान है कि सांप्रदायिक एजेंडे को लोगों ने नकारा है।
 
पहले भाजपा नेतृत्व को लग रहा था कि सांप्रदायिक आधार पर ध्रुवीकरण हुआ तो महागठबंधन का मुस्लिम-यादव वाला समीकरण ध्वस्त हो जाएगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ है। उलटे दादरी, गोमांस विवाद और मुंबई में गुलाम अली का कार्यक्रम रोके जाने जैसी खबरों से भाजपा के नौजवान मतदाताओं में भी नाराजगी है। इसीलिए भाजपा ने नेतृत्व के वे तमाम मुद्दे छोड़कर विकास के मुद्दे पर लौटने का फैसला किया। 
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