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महागठबंधन ने जाति के आधार पर बांटे टिकट

Webdunia
बुधवार, 23 सितम्बर 2015 (11:49 IST)
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के नेता नीतीश कुमार ने बुधवार को अगले महीने शुरू हो रहे राज्य विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के 242 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की।
 
पटना। बिहार के मुख्यमंत्री और जदयू के नेता नीतीश कुमार ने आज अगले महीने शुरू हो रहे राज्य विधानसभा चुनाव के लिए महागठबंधन के 242 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की। इस मौके पर उन्होंने भाजपा पर जम कर हमला बोला और आरोप लगाया कि वह आरक्षण विरोधी है और उसे आरएसएस के विचार का अनुसरण करना ही है, जो कि उसके लिए सुप्रीम कोर्ट के समान है।
 
कुमार ने महागठबंधन में शामिल जदयू, राजद और कांग्रेस के उम्मीदवारों की संयुक्त सूची जारी करते हुए कहा कियह समाज के सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व करती है जिसमें 16 फीसदी सामान्य श्रेणी के, 55 फीसदी पिछड़ा वर्ग से, 15 फीसदी अनुसूचित जाति-जनजाति से और 14 फीसदी अल्पसंख्यक समुदाय से हैं।
 
कुमार ने दावा किया कि उनका गठबंधन पूरी तरह से एकजुट है और राजग की तरह इसमें कोई मतभेद नहीं है।उन्होंने कहा कि बिहार की जनता भाजपा को मुहंतोड़ जवाब देगी क्योंकि जनता उसकी विभाजनकारी राजनीति को देख रही है।
 
भाजपा और संघ पर कड़ा निशाना साधते हुए जदयू नेता ने उनपर आरक्षण के खिलाफ होने का आरोप लगाया और कहा कि संघ आरक्षण की समीक्षा के लिए एक संविधानेतर इकाई गठित करने की मांग कर रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भाजपा का वैचारिक प्रेरणास्रोत है।
 
उन्होंने आरएसएस के मुखपत्र पांचजन्य और आर्गनाइजर में छपे संघ प्रमुख के साक्षात्कार के कुछ हिस्सों को पढते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि वह यह महसूस करते हैं कि आरक्षण की मौजूदा नीति सही नहीं है और वह कुछ अन्य व्यवस्था चाहते हैं।

नीतीश कुमार ने कहा, 'संविधान में कोई भी संशोधन संसद में ही हो सकता है। वे संविधान से अलग किसी को चाहते हैं, एक संविधानेतर आथरिटी, जो इस बात को देखे कि किसे आरक्षण मिलना चाहिए और कब तक।'
 
उन्होंने कहा, 'ये संविधान के या संसद के तहत नहीं बल्कि एक सभ्रांत समिति के हाथ में। यह बहुत ही खतरनाक विचार है। इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता।’’ आरक्षण पर भाजपा के रवैये पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल चाहें जो भी कहे ,वह संघ के विचारों के विपरीत नहीं जा सकता है।
 
जदयू नेता ने कहा, केन्द्र में भाजपा की सरकार है जिसने बार बार यह दावा किया है कि उन्हें स्वयंसेवक होने में गर्व है। आरएसएस के विचार अंतिम हैं। भाजपा जो कुछ भी बोले, उसका कोई मतलब नहीं है। जैसे कि उच्चतम न्यायालय की संवैधानिक पीठ कुछ भी तय करती है वह अंतिम होता है और उसके बाद कुछ भी नहीं है। इसी तरह आरएसएस का भी तरीका है, अगर आरएसएस प्रमुख कुछ कहते हैं तो भाजपा की उस संबंध में कुछ नहीं चलती।
 
नीतीश कुमार ने भाजपा पर आरक्षण विरोधी होने का आरोप लगाते हुए कहा कि भाजपा आरएसएस का ही एक राजनीतिक संगठन है और स्वयंसेवक एवं प्रचारक इस सरकार का हिस्सा हैं। भागवत ने जो कुछ कहा है वह अंतिम हैं और उसके बाद कोई अन्य विचार नहीं है।
 
बिहार के मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके गठबंधन का मुख्य मुद्दा विकास ही रहेगा। उन्होंने राजग गठजोड़ पर हमला किया जहां भागीदारों के बीच के मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं।
 
उन्होंने कहा, 'यह भाजपा का अंदरूनी मामला है और हमें इस पर कुछ नहीं कहना है। लोग भाजपा की राजनीति को देख रहे हैं और इसका जवाब देंगे।
 
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा के लिए 12 अक्तूबर से पांच नवम्बर के बीच पांच चरणों में चुनाव होने वाले हैं। 12 अक्तूबर को होने वाले पहले चरण के चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का आज अंतिम दिन है। (भाषा)
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