Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

कॉमेडी कोई मजाक नहीं, एक विज्ञान है: भूतबंगला में नजर आने वाले राजपाल यादव ने बताया अपना पसंदीदा कॉमेडियन

Advertiesment
Rajpal Yadav Exclusive Interview
भारतीय सिनेमा के पर्दे पर जब भी एक छोटा कद का इंसान अपनी आंखों की पुतलियों और चेहरे के उतार-चढ़ाव से पूरी महफिल लूट लेता है, तो समझ जाइए वह राजपाल यादव हैं। इन दिनों राजपाल अपनी आगामी फिल्म 'भूत बंगला' को लेकर चर्चा में हैं, जहां वह वर्षों बाद निर्देशक प्रियदर्शन और अक्षय कुमार की तिकड़ी के साथ वापसी कर रहे हैं। पेश है राजपाल यादव से हुई बातचीत के प्रमुख अंश, जहां उन्होंने कॉमेडी, कला और अपने गुरुओं पर खुलकर बात की।
 
आपने अपने करियर में बेहद विविधतापूर्ण रोल किए हैं। किन निर्देशकों के साथ आपका तालमेल सबसे सटीक बैठता है?
देखिए, किसी एक का नाम लेना नाइंसाफी होगी। मेरी यात्रा में तीन स्तंभ रहे हैं, प्रियदर्शन, डेविड धवन और रामगोपाल वर्मा। इन तीनों ने मुझ पर अनगिनत प्रयोग किए और सुखद बात यह है कि 99% प्रयोग सफल रहे। प्रियन जी की 'भागमभाग' या 'चुप चुपके' हो, वे आम इंसान की व्यथा और हास्य को बखूबी समझते हैं। वहीं रामू जी ने 'मैं माधुरी दीक्षित बनना चाहती हूं' और 'मैं, मेरी पत्नी और वो' जैसी फिल्मों में मुझसे बहुत अलग काम लिया। इन निर्देशकों की वजह से ही मेरे काम में ताजगी बनी रही। अभी हाल ही में हम सब 'भूत बंगला' के लिए साथ बैठे थे। मुझे याद आया जब हमने 'हंगामा' की थी, तब हम 'अननोन बिगनर्स' (अनजान नौसिखिए) थे, और आज इतने सालों बाद हम 'वेल-नोन बिगनर्स' हैं। रिश्ता वही है, बस अनुभव का नया रंग जुड़ गया है।
 
आपके अभिनय में एक खास किस्म की वैरायटी दिखती है। यह विविधता आप लाते कैसे हैं?
मैं कॉमेडी करता जरूर हूं, लेकिन मैं कॉमेडी के 'विज्ञान' को समझने की कोशिश करता हूं। जब तक आप हास्य को हल्के में लेंगे, वह आपको गहराई नहीं देगा। जिस दिन आप इसे विज्ञान मान लेते हैं, तब समझ आता है कि मनोरंजन दरअसल ज्ञानेंद्रियों और कर्मेंद्रियों के मिलन से पैदा होने वाली ऊर्जा है। मैं खुद को हमेशा एक छात्र मानता हूं। जिस दिन कलाकार ने यह सोच लिया कि 'मैं इस शैली में माहिर हूं', समझो उसका विकास रुक गया। मैं बस इस विज्ञान के मजे ले रहा हूं।
 
लोग आपकी कॉमेडी के दीवाने हैं, लेकिन आप इसे अलग नजरिए से देखते हैं। क्या 'कॉमेडी' करना और 'कॉमेडी को जीना' अलग है?
बिल्कुल। आप 'चुप चुपके' से लेकर अब तक की मेरी फ़िल्में देखें, मैंने कहीं कॉमेडी 'की' नहीं है, बल्कि उसके विज्ञान को 'जिया' है। 'हंगामा' के किरदार की रुलाई और 'मालामाल वीकली' के किरदार की रुलाई में जमीन-आसमान का फर्क है। चेहरा वही है, लेकिन भाव अलग हैं। यह समझना पड़ता है कि सामने वाला व्यक्ति किस परिस्थिति में रो या हंस रहा है। असल जिंदगी में 'राजा' के रोने और 'बाजा' (साधारण व्यक्ति) के रोने में जो अंतर है, वही बारीकी पर्दे पर लानी पड़ती है।
 
आप खुद किसे अपना आदर्श मानते हैं? आपके पसंदीदा कॉमेडियन कौन हैं?
दुनिया में कई महान कलाकार हुए हैं, लेकिन मेरे लिए चार्ली चैपलिन और गोविंदा भैया 'मैकेनिकल इंजीनियर' की तरह हैं। वे जहां खड़े हो जाएं, वहीं से कुछ नया गढ़ देते हैं। वे मेरे लिए बेहतरीन शिक्षक भी हैं। मैं रजनीकांत सर और जैकी चैन का भी मुरीद हूं। और अगर इन सब से भी बात न बने, तो '36 चैन' यानी मैं खुद तो हूं ही! (हंसते हुए)
 
प्रियदर्शन के साथ 'मालामाल वीकली' से 'भूत बंगला' तक के सफर में उनमें क्या बदलाव देखते हैं?
ऊर्जा का! पहले वे जिस ऊर्जा से काम करते थे, आज उससे 10 गुना ज्यादा एनर्जी के साथ सेट पर होते हैं। उनकी फिल्मों की सबसे बड़ी खूबी सादगी है। उनकी एक लाइन पर बच्चा, जवान, बूढ़ा, महिला सब एक साथ हंस सकते हैं। हास्य को इसीलिए 'रसों का राजा' कहा जाता है। जैसे बिरजू महाराज जी वृद्धावस्था में भी अपनी भाव-भंगिमाओं से महफिल बांध लेते थे, वैसे ही शुद्ध हास्य में कोई मिलावट नहीं होनी चाहिए। जब हंसी निस्वार्थ और शुद्ध हो, वही सफल कॉमेडी है।
 
आजकल कॉमेडी और फूहड़पन (Vulgarity) के बीच की रेखा धुंधली होती जा रही है। आप इसे कैसे देखते हैं?
मैं इसमें अंतर करने वाला कोई नहीं होता। भारत में कला के पांच रूप हैं, नुक्कड़, स्वांग, ऑर्केस्ट्रा, थिएटर और सिनेमा। हर कला की अपनी एक 'क्लास' और मांग होती है। जैसे रसोई में कुछ भी बने, बस खाने वाले का मुंह चलता रहना चाहिए, वैसे ही मनोरंजन में सामने वाले को हंसी आनी चाहिए। 'स्वांग' में आप बहुत संभलकर एक्टिंग करेंगे तो लोग बोर हो जाएंगे। मेरे हिसाब से जिसमें दर्शक निस्वार्थ होकर ठहाके लगा ले, वही सही कला है।
 
आपकी फिल्मों के क्लिप्स पर अब बहुत 'मीम्स' (Memes) बनते हैं, कैसा लगता है?
वैसा ही जैसा आपको उन्हें देखकर लगता है! मुझे खुद को देखकर मजा आता है, मैं भी उन पर खूब हंसता हूं।

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

Dhurandhar 2 Success: बॉक्स ऑफिस पर रणवीर सिंह का 'धुरंधर' अवतार, वो 4 बातें जिन्होंने फिल्म को बनाया ब्लॉकबस्टर




Hanuman Chalisa In Hindi
Hanuman Chalisa In Hindi