फिल्म कयामत से कयामत तक की रिलीज को 36 साल हुए पूरे, बतौर लीड एक्टर आमिर खान ने की थी शुरुआत

WD Entertainment Desk
सोमवार, 29 अप्रैल 2024 (14:33 IST)
Film Qayamat Se Qayamat Tak: साल 1988 में रिलीज हुई फिल्म 'कयामत से कयामत तक' एक ऐसी टाइमलेस बॉलीवुड लव स्टोरी है, जिसने कई पीढ़ियों से दर्शकों के दिलों पर कब्ज़ा किया है। आज, यह सिनेमा के इतिहास की सबसे पसंदीदा रोमांटिक फिल्मों में से एक के रूप में अपनी 36वीं वर्षगांठ मना रही है।
 
बॉलीवुड के मिस्टर परफेक्शनिस्ट कहे जाने वाले आमिर खान ने बतौर लीड एक्टर फिल्म 'कयामत से कयामत तक' से अपनी शुरुआत की थी। राज के रूप में उन्हें दर्शकों और क्रिटिक्स दोनो द्वारा खूब पसंद किया गया था। इतना ही नहीं फिल्म में उनकी जूही चावला के साथ केमिस्ट्री ने सभी का ध्यान अपनी तरफ खींचा था। 
 
फिल्म में आमिर और जूही चावला दोनो के बीच के रोमांस ने सभी के दिलों को धड़काया था। इस फिल्म ने आमिर खान और जूही चावला को बॉलीवुड में एक मजबूत स्थान दिया था और इस तरह फिल्म ने उन्हें इंडियन फिल्म इंडिस्ट्री में एक आइकॉनिक फिगर्स में से एक बना दिया।
 
मंसूर खान की इस फिल्म की कहानी न सिर्फ आकर्षक थी, बल्कि इसके टाइमलेस गाने ने भी लोगों पर गहरी छाप छोड़ी। आनंद-मिलिंद द्वारा कंपोज्ड और मजरूह सुल्तानपुरी द्वारा लिखे गए, यह साउंडट्रैक अपनी इमोशनल गहराई की वजह से दर्शकों के बीच तुरंत हिट हो गया। 'पापा कहते हैं', 'अकेले हैं तो क्या गम है' और 'ऐ मेरे हमसफर' जैसे सॉन्ग्स में एक खास धुन थी, जो अलग अलग पीढ़ियों के लोगों को एक दूसरे से जोड़ती है और उनके इमोशन को बाहर लेकर आती है।

ALSO READ: 3 इडियट्स में काम नहीं करना चाहते थे आमिर खान, इस बात का लग रहा था डर
 
फिल्म 'कयामत से कयामत तक' हिंदी सिनेमा के इतिहास में वाकई एक माइलस्टोन है। यह एक म्यूजिकल रोमांस फिल्म है जिसने 1990 के दशक में हिंदी सिनेमा को परिभाषित किया था। खास बात यह भी है कि, इस फिल्म ने बेस्ट पॉपुलर फिल्म का नेशनल फिल्म अवॉर्ड भी अपने नाम किया था।
 
कयामत से कयामत तक एक ऐसा पल है, इंडियन सिनेमा के इतिहास में जो हमेशा याद किया जाएगा, क्यों कि इस फिल्म ने इंडस्ट्री के रुख को हमेशा के लिए बदल दिया गया और दर्शकों पर गहरा असर छोड़ा। यह कहना गलत नहीं होगा कि इस फिल्म ने इंडियन सिनेमा के जॉनर को दोबारा परिभाषित कर दिया। 
 
1988 में आई इस फिल्म में माता-पिता के विरोध, सामाजिक अपेक्षाएं और परंपरा और मॉडर्न युग के बीच के संघर्ष जैसे जरूरी सामाजिक मुद्दों को दिखाया गया था। इसने कहानी कहने के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत की, जिसमें नएपन, सच्चाई और इमोशंस से भरी गहराई थी।
 
अपनी जबरदस्त कहानी, यादगार एक्टिंग और टाइमलेस म्यूजिक के साथ, इस फिल्म ने न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि एक स्थायी विरासत भी छोड़ी जो आज भी प्रभावित करती है, जिससे यह इंडियन सिनेमा के इतिहास में आइकॉनिक रोमांटिक फिल्मों में से एक बन गई है।
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments

बॉलीवुड हलचल

ऐश्वर्या राय का फोन कॉल आते ही घबरा जाते हैं अभिषेक बच्चन! बताई वजह

उर्वशी रौटेला ने जीता था मिस यूनिवर्स इंडिया 2012 का ताज, लेकिन सुष्मिता सेन ने कर दिया बाहर!

जॉली एलएलबी 3 में दिखेगी अक्षय कुमार और अरशद वारसी की जोड़ी, इस दिन सिनेमाघरों में देगी दस्तक

बिहार दिवस पर जानें कैसे आमिर खान ने देशभर में लिट्टी चोखा को बनाया पॉपुलर!

सुपरबॉयज ऑफ मालेगांव और द बकिंघम मर्डर्स की असफलता पर एकता कपूर ने जताई निराशा

सभी देखें

जरूर पढ़ें

Loveyapa review: मोबाइल की अदला-बदली से मचा स्यापा

देवा मूवी रिव्यू: शाहिद कपूर और टेक्नीशियन्स की मेहनत पर स्क्रीनप्ले लिखने वालों ने पानी फेरा

Sky Force review: एयर फोर्स के जांबाज योद्धाओं की कहानी

आज़ाद मूवी रिव्यू: अमन-साशा की बिगड़ी शुरुआत, क्यों की अजय देवगन ने यह फिल्म

इमरजेंसी मूवी रिव्यू: कंगना रनौट की एक्टिंग ही फिल्म का एकमात्र मजबूत पक्ष

अगला लेख