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फरहान अख्तर को ऑफर हुई फिल्म रंग दे बसंती, इस वजह से एक्टर ने ठुकराया था ऑफर

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Farhan Akhtar
भारतीय सिनेमा में कुछ ही ऐसे कलाकार हैं जिन्हें 'ऑल-राउंडर' कहा जा सकता है, और फरहान अख्तर इस लिस्ट में सबसे ऊपर आते हैं। एक लेखक, निर्देशक, अभिनेता, गायक और निर्माता के रूप में उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई है। फरहान ने कितनी ही फिल्में लिखी है और उनमें काम भी किया है। 
 
फरहान अख्तर ने अपने किरदार को अच्छा बनाने के लिए हमेशा सही कदम आगे बढ़ाया है। अपने काम को लेकर फरहान की डेडीकेशन की कोई सीमा नहीं है, क्योंकि वह हमेशा अपना बेस्ट देने में विश्वास रखते हैं। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब फरहान एक्टर बनना ही नहीं चाहते थे। उन्होंने 'रंग दे बसंती' जैसी बड़ी फिल्म का ऑफर भी ठुकरा दिया था। 
 
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फिल्ममेकर राकेश ओमप्रकाश मेहरा वह पहले शख्स थे, जिन्होंने फरहान को अपनी फिल्म 'रंग दे बसंती' के लिए उनका पहला रोल ऑफर किया था। लेकिन फरहान ने इसे ठुकरा दिया। फिल्ममेकर राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने एक इंटरव्यू में इसका खुलासा किया था। 
 
राकेश ने बताया था कि फरहान अख्तर वह पहले व्यक्ति थे जिन्हें उन्होंने 'रंग दे बसंती' के लिए 'करण सिंघानिया' का रोल ऑफर किया था। यह वह समय था जब फरहान बॉलीवुड में एक सफल निर्देशक के रूप में अपनी धाक जमा चुके थे। उनकी पहली फिल्म 'दिल चाहता है' ने युवाओं के बीच एक नई क्रांति ला दी थी।
 
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राकेश मेहरा के अनुसार, जब उन्होंने फरहान को एक्टिंग का प्रस्ताव दिया, तो फरहान की आंखों में एक चमक थी, लेकिन उन्होंने विनम्रता से इसे मना कर दिया। उस समय फरहान का पूरा ध्यान निर्देशन और पटकथा लेखन पर था। वह 'लक्ष्य' जैसी बड़ी फिल्म के निर्माण में व्यस्त थे और उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि वह कैमरे के पीछे से निकलकर कैमरे के सामने आएंगे। अंततः, वह रोल साउथ के स्टार सिद्धार्थ को मिला और उन्होंने उसे बखूबी निभाया।
 
फरहान अख्तर के शुरुआती करियर को देखें तो वह अभिनय को लेकर बहुत उत्साहित नहीं थे। उनके लिए सिनेमा का मतलब कहानी कहना था। 'दिल चाहता है' के जरिए उन्होंने दोस्ती की परिभाषा बदली, तो 'लक्ष्य' के माध्यम से युवाओं को जीवन के उद्देश्य के प्रति प्रेरित किया। यही कारण था कि जब उन्हें 'रंग दे बसंती' जैसी बड़ी फिल्म का हिस्सा बनने का मौका मिला, तो उन्होंने अपने निर्देशन के विजन को प्राथमिकता दी।
 
जिस अभिनेता को मेहरा ने 2004 में पहचाना था, उसने आखिरकार 2008 में 'रॉक ऑन!!' के साथ परदे पर कदम रखा। इसके बाद फरहान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। राकेश ओमप्रकाश मेहरा और फरहान की जोड़ी बाद में साल 2013 में 'भाग मिल्खा भाग' के लिए साथ आई।
 

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