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जब साड़ी पहन क्रिकेट के मैदान पर सवाल पूछती थीं मंदिरा बेदी, क्रिकेटर्स करते थे ऐसा व्यवहार

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Mandira Bedi Birthday
भारतीय मनोरंजन जगत में मंदिरा बेदी एक ऐसा नाम हैं जिन्होंने रूढ़ियों को तोड़कर अपनी पहचान बनाई। 15 अप्रैल को अपना जन्मदिन मना रहीं मंदिरा आज फिटनेस और स्टाइल का प्रतीक मानी जाती हैं, लेकिन उनके करियर का एक दौर ऐसा भी था जब उन्हें हर कदम पर नीचा दिखाने की कोशिश की गई। 
 
दूरदर्शन के ऐतिहासिक शो 'शांति' से घर-घर में पहचान बनाने वाली मंदिरा ने जब क्रिकेट की पिच पर कदम रखा, तो उनके लिए चुनौतियां दोगुनी हो गईं। मंदिरा बेदी के नाम देश की पहली महिला स्पोर्ट्स एंकर होने का गौरव दर्ज है। उन्होंने 2003 और 2007 के आईसीसी क्रिकेट विश्व कप के साथ-साथ 2004 और 2006 की चैंपियंस ट्रॉफी की भी मेजबानी की। 
 
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उस दौर में क्रिकेट पूरी तरह से पुरुषों का खेल माना जाता था और महिला एंकर्स की मौजूदगी केवल ग्लैमर तक सीमित समझी जाती थी। एक इंटरव्यू के दौरान मंदिरा ने उस कड़वे सच से पर्दा उठाया था जिसने क्रिकेट प्रेमियों को हैरान कर दिया था। मंदिरा ने बताया था कि जब वह पैनल में बैठती थीं, तो वहां मौजूद पूर्व क्रिकेटर्स और विशेषज्ञ उन्हें पसंद नहीं करते थे।
 
मंदिरा के अनुसार, जब मैं होस्ट की भूमिका में आई, तो मुझे बहुत कम लोगों ने सपोर्ट किया। न तो पैनल में बैठे विशेषज्ञों ने और न ही उन क्रिकेटर्स ने जिनके साथ मैं काम कर रही थी। कई बार जब मैं सवाल पूछती थी, तो क्रिकेटर्स मुझे अजीब नजरों से घूरते थे, जैसे कि मैं वहां होने के लायक ही नहीं हूं।
 
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साड़ी और क्रिकेट का अनूठा मेल
मंदिरा बेदी ने उस दौर में साड़ी पहनकर एंकरिंग करने की शुरुआत की थी। आज यह एक फैशन स्टेटमेंट है, लेकिन उस समय लोगों को यह हजम नहीं हो रहा था। मंदिरा ने साझा किया था कि साड़ी पहनकर क्रिकेट के बारे में तकनीकी बातें करना उस दौर में लोगों के लिए स्वीकार करना मुश्किल था। लोगों को लगता था कि मैं जो सवाल पूछ रही हूं, मुझे खुद उनका मतलब पता नहीं है।
 
खिलाड़ियों के व्यवहार पर बात करते हुए उन्होंने बताया था कि कई बार उनके सवालों का जवाब सवाल से संबंधित होता ही नहीं था। उन्हें ऐसा महसूस कराया जाता था कि उनका ज्ञान शून्य है। लगातार मिल रहे तिरस्कार और असहयोग ने मंदिरा के आत्मविश्वास को पूरी तरह से हिला दिया था। वह बताती हैं कि वह दौर उनके लिए मानसिक रूप से काफी डरावना था। उन्हें हर दिन खुद को साबित करने की जंग लड़नी पड़ती थी।
 
हालांकि, इस मुश्किल समय में ब्रॉडकास्टर्स उनके पीछे मजबूती से खड़े रहे। मंदिरा ने बताया था कि चैनल के लोगों ने उनसे कहा, आपको 150-200 महिलाओं के ऑडिशन में से चुना गया है। आप सर्वश्रेष्ठ हैं, इसलिए खुद पर भरोसा रखें। इसी प्रोत्साहन ने मंदिरा को मैदान में टिके रहने की ताकत दी।

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