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ओवरनाइट ऑडिशन से ओवरनाइट स्टारडम तक, कैसे बदली पुलकित सम्राट की जिंदगी

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WD Entertainment Desk

, गुरुवार, 5 फ़रवरी 2026 (15:09 IST)
भारतीय टेलीविजन में ओवरनाइट सक्सेस बहुत कम लोगों को मिलती है और उन्हीं बेहद कम लोगों में एक नाम पुलकित सम्राट का भी शामिल है। एक साधारण से टीवी ऑडिशन, जिसे उन्होंने थोड़ी हिचकिचाहट के साथ स्वीकार किया था, वही आगे चलकर ना सिर्फ उनकी ज़िंदगी का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ, बल्कि उसी ने उन्हें हर घर का चहेता चेहरा भी बना दिया।
 
गौरतलब है कि खुद को वर्सेटाइल एक्टर के तौर पर देखनेवाले पुलकित सम्राट अपने करियर की शुरुआत टीवी से नहीं करना चाहते थे, क्योंकि उन्हें लगता था कि डेली सोप्स ज़्यादातर मेलोड्रामा तक ही सीमित रहते हैं। लेकिन शायद किस्मत को कुछ और मंजूर था और उसी ने उन्हें लोकप्रियता के शिखर पर पहुंचा दिया।  
 
इस सिलसिले में पुलकित सम्राट कहते हैं, मुझे याद है मैंने साफ कहा था कि मैं टीवी सीरियल टाइप का काम नहीं करना चाहता, बल्कि मैं कुछ अलग और वर्सेटाइल करना चाहता था। लेकिन फिर कास्टिंग टीम ने मुझे समझाया कि यह किरदार बाकी टीवी रोल्स से अलग है। 
 
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उन्होंने कहा, इसमें गहराई के साथ कुछ नया करने का मौका था और सबसे अहम बात यह थी कि मुझे एकता कपूर से मिलने का अवसर मिलने वाला था। इसी बात ने मुझे मुंबई आने के लिए राज़ी कर लिया और मैं रातों-रात दिल्ली से मुंबई आ गया।
 
गौरतलब है कि एकता कपूर पहले ही पुलकित की तस्वीरें देख चुकी थीं और उनसे मुलाकात के बाद वे निश्चिंत हो चुकी थी कि उनके सीरियल 'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' के लक्ष्य वीरानी वही होंगे। ऐसे में मुंबई आते ही उनकी ग्रूमिंग शुरू हुई। उन्हें नया हेयरकट दिया गया और स्क्रीन टेस्ट कराया गया और फुटेज देखते ही उनके नाम पर मोहर लगाते हुए एकता कपूर ने कहा, “ओके, डन। रेडी।”
 
हालांकि इस बड़ी सफलता के बीच भी पुलकित को रह-रहकर अपना परिवार याद आ रहा था, जिन्हें वे बिना बताए दिल्ली छोड़कर मुंबई चले आए थे। उनसे मिलने की तड़प और अपनी कामयाबी की खबर देने के लिए उन्होंने पीठ दर्द का बहाना बनाते हुए एक रात के लिए दिल्ली लौटने की इजाज़त मांगी और पहुंच गए अपने पैरेंट्स से मिलने। 
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दिल्ली एयरपोर्ट पर अपने पैरेंट्स को देखते ही वे भावुक हो उठे। उस घटना को याद करते हुए पुलकित बताते हैं, आंखों में आंसू लिए मैं उनके गले लगा। शब्द बहुत काम थे, बस थी तो भावनाएं। हालांकि कुछ ही घंटों बाद मैं फिर से मुंबई लौट आया लेकिन इस बार एक नए आत्मविश्वास और बदली हुई ज़िंदगी के साथ लौटा था।
 
'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' में पुलकित की एंट्री बेहद खास रही थी। शो की जेनरेशन लीप के साथ उन्हें लॉन्च किया गया था और वे 'वो कृष्णा है' गीत के साथ सीधे दर्शकों के दिलों में उतर गए। गौर करनेवाली बात ये भी है कि यह किसी टीवी किरदार के लिए बनाए गए शुरुआती फुल-लेंथ लॉन्च सॉन्ग्स में से एक था। 
 
इस तरह मौनी रॉय के साथ मिलकर वह नई पीढ़ी का चेहरा बने। इस सिलसिले में पुलकित कहते हैं, “रातों-रात मैं एक जाना-पहचाना नाम बन चुका था और फिर उसके बाद मैंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा।" 
 
'फुकरे' की लोकप्रियता के बाद 'तैश', 'सनम रे' और 'राहु केतु' में अलग-अलग तरह के किरदार निभाते हुए फिलहाल वे 'ग्लोरी' से न सिर्फ ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कदम रखने जा रहे हैं, बल्कि पहली बार बॉक्सर का किरदार निभाते हुए अपने करियर को लगातार आगे बढ़ा रहे हैं। फिलहाल पुलकित सम्राट की यह कहानी बताती है कि कभी-कभी एक सही मौका पूरी ज़िंदगी बदल देता है, लेकिन उस मौके को आगे ले जाने के लिए मेहनत, धैर्य और सही फैसले सबसे ज़रूरी होते हैं।

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