Publish Date: Mon, 22 Dec 2025 (15:45 IST)
Updated Date: Mon, 22 Dec 2025 (15:51 IST)
टीवी एक्ट्रेस और राम कपूर की पत्नी गौतमी कपूर हाल ही में उस वक्त चर्चा में आ गईं, जब उनके एक पुराने पॉडकास्ट इंटरव्यू का एक हिस्सा सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। इस बातचीत में उन्होंने अपनी बेटी सिया के साथ अपने खुले और सहज रिश्ते का जिक्र किया था। गौतमी ने कहा था कि वह अपनी बेटी को सेक्स टॉय गिफ्ट करना चाहती है। हालांकि, यह बयान अचानक कई महीनों बाद वायरल हुआ और देखते ही देखते सोशल मीडिया पर इसे लेकर तीखी बहस शुरू हो गई।
गौतमी कपूर ने न्यूज 18 को दिए इंटरव्यू में बताया कि जब उन्होंने यह पॉडकास्ट किया था, तब उन्हें अंदाजा भी नहीं था कि महीनों बाद इसे लेकर इतना बड़ा विवाद खड़ा हो जाएगा। उनके मुताबिक, यह कोई सामान्य सलाह या समाज को दिया गया संदेश नहीं था, बल्कि एक निजी बातचीत थी, जो उन्होंने अपने और अपनी बेटी के रिश्ते के संदर्भ में कही थी।
“मैंने किसी को यह करने को नहीं कहा”
गौतमी कपूर ने साफ कहा कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि हर मां को ऐसा ही करना चाहिए। उनका कहना था कि यह उनके और उनकी बेटी के बीच की समझ और रिश्ता है, जिसे वह किसी के सामने जस्टिफाई करने के लिए बाध्य नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अगर समाज के किसी वर्ग को उनकी सोच से असहमति है, तो वह उसका सम्मान करती हैं।
एक्ट्रेस के मुताबिक, वह और राम कपूर अपने बच्चों के साथ काफी ओपन रिलेशनशिप में विश्वास रखते हैं। कुछ लोग इस सोच से सहमत हो सकते हैं और कुछ नहीं, लेकिन यह हर परिवार का निजी फैसला होता है। उन्होंने सवाल उठाया कि इस पूरी बहस में उनके बच्चों को क्यों घसीटा गया।
ट्रोलिंग का मानसिक असर, डिप्रेशन और नींद न आना
गौतमी कपूर ने स्वीकार किया कि सोशल मीडिया ट्रोलिंग ने उनकी मानसिक सेहत पर गहरा असर डाला। उन्होंने बताया कि इंस्टाग्राम पर जिस तरह के कमेंट्स आ रहे थे, उन्हें पढ़कर वह अंदर से टूट गई थीं। कई रातें ऐसी रहीं जब उन्हें नींद नहीं आई और वह लगातार तनाव में रहीं।
उन्होंने कहा कि उन्हें यह देखकर हैरानी हुई कि लोग एक महिला और एक इंसान के लिए इतनी कड़वी और अपमानजनक बातें कैसे लिख सकते हैं। इसी वजह से उन्होंने लगभग एक महीने तक इंस्टाग्राम से पूरी तरह दूरी बना ली।
निजी सोच और सामाजिक बहस के बीच संतुलन
गौतमी कपूर का कहना है कि हर इंसान को अपनी राय रखने का हक है, ठीक उसी तरह जैसे दूसरों को असहमत होने का अधिकार है। लेकिन असहमति को नफरत और व्यक्तिगत हमलों में बदल देना गलत है। उन्होंने उम्मीद जताई कि समाज में ऐसे मुद्दों पर बातचीत अधिक समझदारी और संवेदनशीलता के साथ होनी चाहिए।