#मीटू के तूफान ने पकड़ा जोर : कई बड़ी हस्तियां आईं लपेटे में

सोमवार, 8 अक्टूबर 2018 (22:52 IST)
मुंबई/नई दिल्ली। यौन शोषण के खिलाफ शुरू हुए #मीटू अभियान के तूफान ने सोमवार को और जोर पकड़ लिया। कई महिलाओं ने मनोरंजन और मीडिया जगत में यौन शोषण से जुड़े अपने अनुभव साझा किए, जिनके बाद अभिनेता रजत कपूर ने अपने कथित दुराचार के लिए माफी मांगी, जबकि कॉमेडी ग्रुप एआईबी के दो सदस्यों के समूह से खुद को दूर करने के साथ उसका अस्तित्व अनिश्चितता के घेरे में आ गया।


पिछले कुछ सालों में कथित यौन शोषण का शिकार बनीं महिलाओं ने अपने कथित गुनाहगारों के नाम सार्वजनिक किए, जिसके साथ सोशल मीडिया पर नए नामों की बाढ़ सी आ गई। इसी बीच महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि यौन उत्पीड़न और शोषण को लेकर मन में बना हुआ गुस्सा कभी नहीं जाता। उन्होंने राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि वे बहुत खुश हैं कि #मी टू अभियान भारत में भी शुरू हो गया है और इससे महिलाओं को सामने आकर शिकायत करने का हौसला मिला है।

जहां नाना पाटेकर के खिलाफ तनुश्री दत्ता के आरोपों के साथ कथित गुनाहगारों के खिलाफ यौन शोषण आरोपों के सामने आने का सिलसिला शुरू हुआ है, वहीं मीडिया जगत में इसके घेरे में आने के बाद अब अंग्रेजी के एक प्रमुख अखबार के दिल्ली ब्यूरो के प्रमुख ने कथित रूप से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यौन शोषण के आरोपों का सामना कर रहे फिल्मकार विकास बहल की नई फिल्म ‘सुपर 30’ में काम कर रहे अभिनेता रितिक रोशन ने मामले को लेकर अपनी चुप्पी तोड़ी।

उन्होंने कहा, मेरे लिए ऐसे किसी इंसान के साथ काम करना असंभव है अगर वह इस तरह के गंभीर दुराचार का दोषी है। मैं अभी बाहर हूं और मुझे छिटपुट जानकारी ही मिल रही है। मैंने ‘सुपर 30’ के निर्माताओं से जाहिर तथ्यों का जायजा लेने और जरूरत पड़ने पर कड़ा रुख अपनाने का अनुरोध किया है। रितिक ने ट्विटर पर लिखा, इसे दबाया या छिपाया नहीं जाना चाहिए। सभी अपराधियों को सजा मिलनी चाहिए और शोषित हुए सभी लोगों को सशक्त किया जाना चाहिए और अपनी बात खुलकर रखने की ताकत देनी चाहिए।

विकास बहल पर पिछले साल पहली बार आरोप सामने आए थे और हाल में एक लेख में पीड़िता के हवाले से पूरी घटना की जानकारी दी गई। इससे पहले ‘फैंटम फिल्म्स’ प्रोडक्शन हाउस भंग कर दिया गया जिसकी अनुराग कश्यप, विक्रमादित्य मोटवानी, मधु मंतेना और विकास बहल ने मिलकर स्थापना की थी। व्यंग्य एवं स्टैंड अप कॉमेडी कार्यक्रमों से लोकप्रिय हुए ‘एआईबी’ के मानव संसाधन विभाग की प्रमुख विधि जोतवानी ने कहा कि एआईबी का भविष्य भी फैंटम फिल्म्स की तरह हो सकता है।

एआईबी ने यौन उत्पीड़न के आरोपों में घिरे गुरसिमरन खंबा को अस्थाई छुट्टी पर भेजने का फैसला लिया है, वहीं संस्थापक तन्मय भट्ट मामले के स्पष्ट होने तक एआईबी की दैनिक गतिविधियों से हर तरह से अलग रहेंगे। कंपनी ने सोमवार को यह घोषणा की। लेखक-कॉमेडियन उत्सव चक्रवर्ती, खंबा पर सीधे तौर पर यौन दुव्यर्वहार के आरोप हैं, जबकि तन्मय उनके (आरोपियों के) खिलाफ कदम ना उठाने को लेकर निशाने पर हैं। विधि ने कहा, ईमानदारी से, हमें नहीं पता कि एआईबी के भविष्य के संबंध में इसके क्या मायने हैं या वह (भविष्य) बचा भी है या नहीं।

आशीष शाक्य, रोहन जोशी और टीम के अन्य वरिष्ठ सदस्य अगले कई महीनों में इस प्रश्न का उत्तर देने में सक्षम होने की दिशा में काम करेंगे। बयान में कहा गया कि भट्ट कंपनी के नियमित कामकाज में हिस्सा नहीं लेंगे। कंपनी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर जारी किए गए बयान में कहा गया, सोशल मीडिया पर एआईबी और हमारे सह-संस्थानक और सीईओ तन्मय भट्ट के खिलाफ लगाए जा रहे आरोपों की हम गहराई से निगरानी कर रहे हैं। हम तन्मय की भूमिका की अनदेखी नहीं कर सकते इसलिए आगे कोई नोटिस मिलने तक वे एआईबी से हट रहे हैं।

चक्रवर्ती के खिलाफ पिछले हफ्ते आरोप सामने आए जब कई महिलाओं ने उन पर बेवजह नग्न तस्वीरें भेजने के आरोप लगाए। मशहूर अभिनेता और ‘आंखों देखी’ जैसी फिल्मों के निर्देशक रजत कपूर पर एक महिला पत्रकार ने अशिष्ट और गैर-पेशेवर व्यवहार का आरोप लगाया। इसके बाद कपूर ने कहा है कि उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी में एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश की और वह दिल से माफी मांगते हैं। कपूर ने रविवार को ट्वीट कर महिला पत्रकार से माफी मांगी।

महिला पत्रकार ने आरोप लगाया था कि वर्ष 2007 में जब वह उनका साक्षात्कार लेने गईं थी तब कपूर के व्यवहार से वह असहज हो गई थीं। कपूर ने माफी मांगते हुए कहा कि पूरी जिंदगी उन्होंने एक अच्छा इंसान बनने की कोशिश की है। अगर मेरे शब्दों या किसी हरकत से किसी को भी दुख पहुंचा हो..। उन्होंने लिखा, मैं दिल से माफी मांगता हूं और दुखी हूं कि मैं किसी भी इंसान के दुख का कारण बना। अगर काम से अधिक मेरे लिए कुछ भी महत्वपूर्ण है तो वह है एक अच्छा इंसान बनना। और मैंने हमेशा वह इंसान बनने की कोशिश की है। अब मैं और अधिक प्रयास करूंगा।

महिला पत्रकार ने अपने साथी पत्रकार से घटना के बारे में बात की थी, जिसने (मित्र ने) ट्विटर पर उनकी बातचीत के स्क्रीनशॉट साझा कर दिए थे, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा। नाना पाटेकर ने एक बार फिर इससे इनकार किया कि उन्होंने वर्ष 2008 में फिल्म की सेट पर तनुश्री दत्ता के साथ कोई बदसलूकी की थी और तनुश्री के आरोपों को झूठ करार दिया। तनुश्री ने हाल ही में एक साक्षात्कार में नाना पाटेकर पर वर्ष 2008 में ‘हॉर्न ओके प्लीज’ एक विशेष गीत की शूटिंग के दौरान अपने साथ बदसलूकी करने का आरोप लगाया था।

पाटेकर ने सोमवार को कहा, मैंने 10 वर्ष पहले भी कहा था। जो तब सच था, आज भी सच रहेगा। मेरे कानूनी सलाहकार दल ने मुझे कोई टिप्पणी ना करने को कहा है अन्यथा में आप लोगों से बात क्यों नहीं करूंगा। अभिनेता ने सोमवार को अपने घर पर यह बयान दिया। उन्होंने कहा कि वह मामले के बारे में विस्तार से बात नहीं कर सकते। उन्होंने कहा, मेरे वकील ने जो कहा है मैं उसका पालन करूंगा। इसलिए कृपया मुझे क्षमा करें। पाटेकर (67) के वकील ने तनुश्री पर गलत आरोप लगाने का इल्जाम लगाते हुए उन्हें कानूनी नोटिस भी भेजा है।

तनुश्री दत्ता ने भी नाना पाटेकर, कोरियोग्राफर गणेश आचार्य और फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ के निर्देशक तथा निर्माता के खिलाफ मुंबई में मामला दर्ज कराया है। फिल्म के निर्माता ने मुंबई पुलिस के सामने आवेदन देकर कहा है कि उत्पीड़न की कोई घटना नहीं है जिसके दत्ता के आरोप लगाए हैं। सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन (सिनटा) ने कहा कि नाना पाटेकर के खिलाफ तनुश्री के यौन उत्पीड़न आरोपों का वह निष्पक्ष एवं त्वरित जांच के माध्यम से समाधान करने के लिए तैयार हैं। निकाय ने पहले कहा था कि दत्ता ने 2008 में संपर्क किया था तो उसने आरोपों का समाधान नहीं किया था।

दत्ता ने सिनटा में एक दशक पहले शिकायत दर्ज कराई थी जब फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ में पाटेकर के साथ एक गाने की शूटिंग के दौरान उन्होंने खुद को असहज महसूस किया था। वहीं राष्ट्रीय राजधानी में इंडियन वीमेंस प्रेस कोर (आईडब्ल्यूपीसी) ने मीडिया घरानों से यौन शोषण की शिकायतों पर ध्यान देने के लिए संस्थागत तंत्र का गठन करने की मांग की। ईडब्ल्यूपीसी की अध्यक्ष टीके राजलक्ष्मी ने एक बयान में कहा, यह बात परेशान करने वाली है और गंभीर चिंता का विषय है कि उचित प्राधिकरणों के संज्ञान में लाए जाने के बावजूद कई शिकायतों पर सुनवाई नहीं हुई।

उन्होंने कहा, आईडब्ल्यूपीसी सभी महिला पत्रकारों और मीडिया में काम कर रहीं महिला कर्मचारियों का समर्थन करता है जो अपने सहकर्मियां एवं वरिष्ठों के हाथों यौन शोषण का शिकार हुईं और जिन्होंने अपनी आपबीती बयां करने की हिम्मत दिखाई। (भाषा)

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