रॉकस्टार : फिल्म समीक्षा

समय ताम्रकर
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बैनर : श्री अष्टविनायक सिनेविजन लिमिटेड, इरोज इंटरनेशनल
निर्माता : ढिलीन मेहता
निर्देशक : इम्तियाज अली
संगीतकार : ए.आर.रहमान
कलाकार : रणबीर कपूर, नरगिस फखरी, पियूश्र मिश्रा, अदिति राव हैदरी, श्रेया नारायणन शम्मी कपूर
सेंसर सर्टिफिकेट : यू/ए * 2 घंटे 39 मिनट * 18 रील
रेटिंग : 3/5

जनार्दन जाखड़ (रणबीर) थोड़ा ठस दिमाग है। उसके भेजे को यह बात समझ में नहीं आती कि वह जिम मॉरिसन जैसा स्टार क्यों नहीं बन पा रहा है। खटारा अंकल उसे बातों-बातों में बताते हैं कि जितने भी सफल संगीतकार हैं, गायक हैं, कलाकार हैं, उनकी जिंदगी में कोई ना कोई दर्द है, इसलिए उनके अंदर से इतनी बेहतरीन कला बाहर आती है।

जनार्दन परेशान हो जाता है कि उसके जीवन में तो कोई दु:ख नहीं है। मां-बाप अभी तक जिंदा है। वह गोद लिया हुआ बच्चा भी नहीं है। वह स्वस्थ है और उसे कोई गंभीर बीमारी नहीं है। गरीब इतना भी नहीं है कि रोटी खाने के लाले पड़े।

मोहब्बत में उसका दिल टूट जाए इसलिए कॉलेज की सबसे खूबसूरत लड़की हीर (नरगिस फखरी) को वह आई लव यू कह देता है। बदले में उसे हीर की कई बातें सुनना पड़ती है। उसे लगता है कि उसका दिल टूट गया है। अब वह रॉक स्टार बन जाएगा।

इस प्रसंग के बाद हीर और जनार्दन, जिसे अब हीर, जॉर्डन कहने लगी है अच्छे दोस्त बन जाते हैं। फिर शुरू होता है जॉर्डन के रॉक स्टार बनने का सफर जिसमें कई उतार-चढ़ाव आते हैं और जिस दर्द की उसे तलाश थी वो भी उसके जीवन में आता है।

दरअसल रॉकस्टार की कहानी उस लोकप्रिय बात को आधार बनाकर लिखी गई है जिसके मुताबिक यदि कलाकार के दिल को ठेस पहुंची हो। उसके जीवन में कोई दर्द हो तो उसकी कला निखर कर सामने आती है।

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इ स कहान ी प र बन ी फिल् म क ो देखत े सम य कुछ सवाल पैदा होते हैं? हीर की शादी कही और तय हो चुकी है। शादी के पहले वह मौज-मस्ती करना चाहती है (यह प्रसंग ‘मेरे ब्रदर की दुल्हन’ की याद दिलाता है)।

घूमने-फिरने के दौरान उसे जॉर्डन से प्यार हो जाता है। इसके बावजूद वह दूसरे इंसान से शादी करने के लिए तैयार क्यों हो जाती है। उस पर घरवालों का कोई दबाव नहीं है। वह बोल्ड है क्योंकि ‘जंगली जवानी’ जैसी फिल्म थिएटर में जाकर देखती है। देशी शराब पीती है। फिर वह जॉर्डन से शादी करने में क्यों हिचकती है?

शादी के बाद वह प्रॉग रहने चली जाती है। उसके पीछे-पीछे जॉर्डन भी जा पहुंचता है। वहां दोनों के बीच रोमांस शुरू हो जाता है। आखिर हीर यह कदम क्यों उठाती है? क्या वह अपनी शादी से खुश नहीं है? हालांकि फिल्म देखते समय ये प्रश्न ज्यादा परेशान नहीं करते हैं, लेकिन इम्तियाज ये बातें स्पष्ट करते तो फिल्म की अपील बढ़ जाती।

निर्देशक के रूप में इम्तियाज अली प्रभावित करते हैं। रंगों का संयोजन, ओवरलेपिंग दृश्यों के जरिये कहानी को कहना और जॉर्डन के दर्द को जिस पॉवरफुल तरीके से परदे पर उन्होंने उभारा है वह प्रशंसनीय है। इम्तियाज ने कई दृश्यों को पेंटिंग की तरह प्रस्तुत किया है। इंटरवल के पहले फिल्म में हल्के-फुल्के प्रसंग है, लेकिन बाद में फिल्म थोड़ी लंबी और खींची हुई लगती है क्योंकि इम्तियाज कुछ दृश्यों को रखने का मोह नहीं छोड़ पाए।

रणबीर कपूर का अभिनय फिल्म की जान है। उनके किरदार के बारे में फिल्म में शम्मी कपूर एक संवाद बोलते हैं ‘यह बड़ा जानवर है। पिंजरे में इसे कैद करना मुश्किल है। यह अपनी दुनिया खुद बनाएगा।‘ और इस जानवर को रणबीर ने बड़ी खूबी से बाहर निकाला है। ठस जनार्दन से कुंठित, आक्रामक और दर्द से छटपटाते जॉर्डन को उन्होंने बेहतरीन तरीके से अभिनीत किया है। कहा जा सकता है कि अपनी पीढ़ी के कलाकारों में रणबीर सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली हैं।

नरगिस फखरी में आत्मविश्वास तो नजर आता है लेकिन उनका अभिनय एक जैसा नहीं है। कुछ दृश्यों में उनकी एक्टिंग अच्छी है तो कई ऐसे दृश्य भी हैं जहां उनकी अभिनय करने की कोशिश साफ नजर आती है। शम्मी कपूर, अदिति राव हैदरी, श्रेया नारायणन, पियूष मिश्रा मंजे हुए कलाकार हैं और बड़ी सरलता से उन्होंने अपना काम किया है।

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ए.आर. रहमान भी इस फिल्म के स्टार हैं। अरसे बाद रहमान ने इतना सुरीला संगीत दिया है। साडा हक, कतिया करूं, हवा-हवा जैसे कई बेहतरीन गाने सुनने को मिलते हैं। इरशाद कामिल ने रहमान की धुनों के साथ न्याय करने वाले शब्द लिखे हैं। फिल्म की एडिटर आरती बजाज का उल्लेख भी जरूरी है जिन्होंने इस तरह से दृश्यों को जोड़ा है कि दर्शक को अलर्ट रहना पड़ता है।

कहानी के मामले में ‘रॉकस्टार’ थोड़ी कमजोर है, लेकिन रणबीर के अभिनय, रहमान के संगीत और इम्तियाज के निर्देशन की वजह से फिल्म देखी जा सकती है।

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