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बुद्ध पूर्णिमा का पर्व कब मनाया जाएगा, क्या है इसका महत्व?

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Buddha Purnima 2026: बुद्ध पूर्णिमा, जिसे बुद्ध जयंती और वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू और बौद्ध कैलेंडर के सबसे पवित्र दिनों में से एक है। वर्ष 2026 में, बुद्ध पूर्णिमा का पर्व 1 मई, शुक्रवार को मनाया जाएगा। हिंदू और बौद्ध दोनों ही धर्मों में इस पूर्णिमा को लेकर बहुत उत्सव और महत्व बताया गया है।
 

बुद्ध पूर्णिमा का महत्व

  • महापुरुष: यह पर्व केवल एक महापुरुष के जन्म का उत्सव नहीं है, बल्कि यह तीन महान घटनाओं का संगम है:
  • जन्म: इसी दिन लुम्बिनी (नेपाल) में सिद्धार्थ गौतम का जन्म हुआ था।
  • बोधिसत्व (ज्ञान): वर्षों की कठिन तपस्या के बाद, वैशाख पूर्णिमा के दिन ही बोधगया में बोधि वृक्ष के नीचे उन्हें "निर्वाण" या परम ज्ञान की प्राप्ति हुई।
  • महापरिनिर्वाण: 80 वर्ष की आयु में, इसी तिथि को कुशीनगर में भगवान बुद्ध ने देह त्याग कर मोक्ष प्राप्त किया था।

यह पर्व क्यों खास है?

  • अहिंसा और शांति का संदेश: भगवान बुद्ध ने दुनिया को पंचशील सिद्धांतों और 'अहिंसा परमो धर्म:' का मार्ग दिखाया।
  • मानवता का कल्याण: यह दिन हमें करुणा, दया और प्रेम के साथ जीवन जीने की याद दिलाता है।
  • आध्यात्मिक जागृति: इस दिन लोग ध्यान (Meditation), दान और धर्मग्रंथों के पाठ के माध्यम से अपनी आत्मा की शुद्धि का प्रयास करते हैं।

कैसे मनाया जाता है?

  • दीपदान और प्रार्थना: मठों और मंदिरों (विशेषकर बोधगया और सारनाथ) में विशेष प्रार्थनाएँ आयोजित की जाती हैं।
  • सफेद वस्त्र: भक्त अक्सर पवित्रता के प्रतीक के रूप में सफेद कपड़े पहनते हैं।
  • पक्षी और जीव रक्षा: कई स्थानों पर पिंजरे में बंद पक्षियों को आजाद किया जाता है और जीवों को दाना खिलाया जाता है।
  • बोधिवृक्ष की पूजा: गया में बोधि वृक्ष की जड़ों को दूध और सुगंधित जल से सींचा जाता है।
  • "मन का शांत होना ही सबसे बड़ी जीत है।"- महात्मा बुद्ध
  • दर्शन: क्या आप बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर किसी विशेष स्थल के दर्शन की योजना बना रहे हैं या इस दिन किए जाने वाले विशेष अनुष्ठानों के बारे में जानना चाहते हैं?

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