Dharma Sangrah

ईसाई धर्म की पुस्तक बाइबल के बारे में जानिए

अनिरुद्ध जोशी
ईसाई धर्म का धर्मग्रंथ बाइबिल है जिसे 'बाइबल' भी कहा जाता है। बाइबल को कब लिखा गया इस संबंध में मतभेद हैं। फिर भी ईसाई धर्म को स्थापित करने में सेंट पॉल का नाम सबसे पहले लिया जाता है। यह भी कहा जाता है कि क्रिश्चियन कल्ट ज्यूस डायसपोरा में प्रारंभ हुआ था। यह क्रिश्चियन डायसपोरा रोम, एथेंस और अलेक्जेंड्रिया में था। यहां ग्रीक बोली जाती थी और सारे गॉस्पेल ग्रीक में ही मिलते हैं। हिब्रू में गॉस्पेल थे या नहीं यह एक शोध का विषय है। गॉस्पेल ऑफ जॉन की चर्चा ज्यादा होती है। यहां जो जानकारी दी जा रही है वह विभिन्न सोर्स के माध्यम से और मान्यता पर आधारित हैं।
 
 
बाइबल : बाइबल या बाइबिल ईसाइयों का पवित्र धर्मग्रंथ है। इसके 2 भाग हैं- पूर्वविधान (ओल्ड टेस्टामेंट) और नवविधान (न्यू टेस्टामेंट)। बाइबिल में यहूदियों के धर्मग्रंथ तनख को ही पूर्वविधान के तौर पर शामिल किया गया। पूर्वविधान को तालमुद और तोरा भी कहते हैं। इसका मतलब 'पुराना अहदनामा'। हलांकि यह भी कहा जाता है कि यह पूर्वविधान वैसा नहीं है जैसा की यहूदियों के पास है। ग्रीक में अलग, लेटिन में अलग और हिब्रू में अलग है।
 
नवविधान (न्यू टेस्टामेंट) ईसा मसीह के बाद की रचना है जिसे ईसा मसीह के शिष्यों ने लिखा था। इसमें ईसा मसीह का जीवन परिचय और उनके उपदेशों का वर्णन है। इसके अलावा शिष्यों के कार्य लिखे गए हैं। माना जाता है कि इसकी मूलभाषा अरामी और ग्रीक थी। नवविधान में ईसा के संदेश और जीवनी का उनके 4 शिष्यों द्वारा वर्णन किया गया है। ये 4 शिष्य हैं- मत्ती, लूका, युहन्ना और मरकुस। हालांकि उनके कुल 12 शिष्य थे। इसमें खासतौर पर 4 शुभ संदेश हैं, जो ईसा के 4 अनुयायियों- मत्ती, लूका, युहन्ना और मरकुस द्वारा वर्णित हैं। बाइबिल कुल मिलाकर 72 ग्रंथों का संकलन है- पूर्वविधान में 45 तथा नवविधान में 27 ग्रंथ हैं। नए नियम को इंजील कहा जाता है।
 
बाइबिल के पूर्वविधान का रचनाकाल क्रमश: 1400 ईसापूर्व से 100 ईपू के बीच रचा गया माना गया है। हालांकि तनख का रचनाकाल ईपू 444 से लेकर ईपू 100 के बीच का माना जाता है। माना जाता है कि ह. मूसा ने लगभग 1400 ईपू में पूर्वविधान का कुछ अंश लिखा था। परंतु विद्वानों में इसको लेकर भी मतभेद हैं। पूर्वविधान की अधिकांश रचनाएं 900 ईपू और 100 ईपू के बीच की मानी जाती हैं।
 
बाइबिल के नवविधान से ही ईसाई धर्म की शुरुआत मानी जाती है जिसका रचनाकाल सन् 50 ईस्वी से सन् 100 ईस्वी तक अर्थात 50 वर्ष की अवधि में यह ग्रंथ लिखा गया। माना जाता है कि सन् 66 में इसको मुकम्मल तौर पर एक किताब का रूप दिया गया था। लगभग सन् 400 ई. में संत जेरोम ने समस्त बाइबिल की लैटिन अनुवाद प्रस्तुत किया था, जो वुलगाता (प्रचलित पाठ) कहलाता है और शताब्दियों तक बाइबिल का सर्वाधिक प्रचलित रूप रहा है। यह भी कहा जाता है कि बाइबल को ईसा के 200 साल बाद लिखा गया था। हालांकि विद्वानों में इसको लेकर भी मतभेद हैं।

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