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यीशु के पुनरुत्थान की कहानी: ईस्टर का अर्थ और महत्व

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Story of Jesus resurrection
Christian beliefs about Easter: ईस्टर ईसाई धर्म का सबसे महत्वपूर्ण त्योहार है, जो यीशु मसीह के मृत्यु के तीन दिन बाद पुनरुत्थान का जश्न मनाता है। यह घटना ईसाई धर्म की नींव है, जो पाप और मृत्यु पर जीवन की विजय का प्रतीक है। यहां जानें यीशु के पुनरुत्थान के बारे में...ALSO READ: ईस्टर संडे का क्या है महत्व, क्यों मनाते हैं इसे?
 
यीशु के पुनरुत्थान की कहानी: ईसा मसीह को गुड फ्रायडे के दिन क्रूस पर चढ़ाया गया और उन्हें एक कब्र में दफनाया गया। बाइबिल के अनुसार, रविवार की सुबह, मैरी मैग्डलीन और अन्य महिलाएं कब्र पर गईं, तो उन्होंने पाया कि कब्र खाली है और एक स्वर्गदूत वहां बैठा हुआ है। स्वर्गदूत ने उन्हें बताया कि यीशु मृतकों में से जी उठे हैं, जैसा कि उन्होंने भविष्यवाणी की थी। 
 
इसके बाद, यीशु कई बार अपने शिष्यों और अन्य अनुयायियों को दिखाई दिए, जिससे उन्हें विश्वास हो गया कि वह वास्तव में जीवित हैं। चालीस दिनों तक यीशु ने उन्हें शिक्षा दी और फिर स्वर्ग में चढ़ गए।
 
ईस्टर का अर्थ: ईस्टर का गहरा धार्मिक अर्थ है, पाप और मृत्यु पर विजय। यीशु का पुनरुत्थान यह दर्शाता है कि मृत्यु अंतिम नहीं है और पाप पर विजय प्राप्त की जा सकती है। ईस्टर ईसाई समुदाय के लिए नई आशा और अनंत जीवन का प्रतीक है। यह दर्शाता है कि यीशु में विश्वास करने वालों को मृत्यु के बाद भी जीवन मिलेगा। यह ईश्वर की शक्ति के पुनरुत्थान तथा ईश्वर की असीम शक्ति का प्रमाण है, जो मृत्यु को भी हरा सकता है। लेंट का चालीस दिनों का उपवास, जो ईस्टर से पहले आता है, पश्चाताप और पापों की क्षमा का समय है, जो पुनरुत्थान की खुशी के लिए तैयार करता है। 
 
ईस्टर का महत्व: ईस्टर ईसाई धर्म में क्रिसमस के समान ही महत्वपूर्ण है और कुछ मायनों में उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि यह ईसाई विश्वास की आधारशिला है। यीशु का पुनरुत्थान ईसाई धर्म की नींव हैं, जो केंद्रीय सिद्धांतों में से एक है। यदि यीशु नहीं जी उठे होते, तो ईसाई धर्म का कोई आधार नहीं होता।ALSO READ: ईसाई समुदाय में बनते हैं ईस्टर के ये पारंपरिक व्यंजन
 
उद्धार का वादा: ईस्टर मानव जाति के लिए उद्धार के वादे को पूरा करता है। यीशु के बलिदान और पुनरुत्थान के माध्यम से, विश्वासियों को पापों से मुक्ति और अनन्त जीवन की आशा मिलती है।
 
सामुदायिक उत्सव: ईस्टर परिवारों और समुदायों को एक साथ लाता है, जो यीशु के पुनरुत्थान की खुशी को साझा करते हैं।
 
त्योहारी और सांस्कृतिक परंपराएं: ईस्टर धार्मिक महत्व के साथ-साथ कई खुशी भरी परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है, जैसे कि ईस्टर अंडे, ईस्टर बनी और विशेष चर्च सेवाएं। ये परंपराएं वसंत के आगमन और नए जीवन के प्रतीक के रूप में भी देखी जाती हैं।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: प्रभु यीशु ने 12 शिष्‍यों के पैर धोकर दिया सेवाभाव का संदेश

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