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ईसाई धर्म के पवित्र तीर्थस्‍थल (वीडियो)

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ईसाई धर्म के संस्थापक ईसा मसीह हैं जिनका जन्म बेथलेहम में हुआ था। भारत में ईसाइयों की संख्या लगभग डेढ़ करोड़ से अधिक है। हालांकि दुनियाभर में ईसाई धर्म से संबंधित और भी प्रमुख स्थल है, लेकिन यहां प्रस्तुत है दिव्य दर्शन के इस भाग में कुछ खास स्थलों की जानकारी।
1. चर्च ऑफ नेटिविटी, बेथलेहम (फिलिस्तीन, इसराइल) : ईसा मसीह का जन्म 6 ई.पू. नाजारेथ के एक यहूदी बढ़ई के यहां हुआ। जहां उनका जन्म हुआ वहां आज एक चर्च है जिसे आज चर्च ऑफ नेटिविटी कहा जाता है। यह स्थान इसराइल की राजधानी यरुशलम से लगभग 10 किलोमीटर दूर दक्षिण में फिलिस्तीन इलाके में है।
 
2. गोल गोथा (यरुशलम, इसराइल) : होली स्कल्प्चर से चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन तक के मार्ग को दुख या पीड़ा का मार्ग माना जाता है। यात्रा के दौरान 9 ऐतिहासिक और पवि‍त्र स्थल हैं। चर्च ऑफ फ्लेजिलेशन को वह स्थान माना जाता है, जहां सार्वजनिक रूप से यीशु की निंदा हुई और उन्हें गोल गोथा की पहाड़ी पर क्रॉस पर चढ़ा दिया गया। यह स्थान इसराइल के यरुशलम में स्थित है।
 
3. चर्च ऑफ द होली स्कल्प्चर (यरुशलम, इसराइल) : यरुशलम के पुराने क्षेत्र की दीवारों से सटा एक प्राचीन पवित्र चर्च है जिसके बारे में मान्यता है कि यहीं पर प्रभु यीशु पुन: जी उठे थे। माना यह भी जाता है कि यही ईसा के अंतिम भोज का स्थल है।

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4. वेटिकन सिटी (रोम, इटली) : रोमन कैथोलिक ईसाइयों के लिए वेटिकन सिटी सबसे महत्वपूर्ण है। यह इटली के अंदर रोम की टाइबर नदी के पश्चिमी किनारे पर 108 एकड़ में फैला हुआ एक स्वतंत्र राष्ट्र है।
 
यहा पर ईसा मसीह के 12 शिष्यों में से एक सेंट पीटर की कब्र है। वेटिकन सिटी रोमन कैथोलिक ईसाइयों के लिए एक पवित्र स्थान है। यहीं से कैथोलिकों के प्रमुख 'पोप' का चयन होता है।
 
5. सेंट थॉमस चर्च (भारत) : भारत में सबसे पहले ईसाई धर्म का प्रचार-प्रसार ईसा मसीह के 12 शिष्यों में से एक संत थॉमस ने दक्षिण भारत के चेन्नई से शुरू किया था। सन् 72 ईस्वी को उनके देहावसान के बाद चेन्नई के पास माइलापुर से लगभग 5 किलोमीटर दूर एक पहाड़ी पर उनके भारतीय अनुयायियों ने उन्हें दफनाया और एक भव्य गिरजाघर बना दिया। इस जगह को आजकल थॉमस माउंट कहा जाता है।
 
6. बेसिलिका ऑफ बॉम जीसस (गोवा, भारत) : भारतीय राज्य गोवा की राजधानी पणजी से 10 किलोमीटर दूर ओल्ड गोवा में स्थित यह चर्च विश्वभर में संत फ्रांसिस जेवियर की समाधि और उनके पवित्र पार्थिव शरीर के अवशेषों की उपस्थिति के कारण प्रसिद्ध है। ‘बॉम जीसस’ का अर्थ होता है ‘नेक या बालक येसु’। इस चर्च का निर्माण सन् 1594 में शुरू हुआ और 1605 में इसका अभिषेक हुआ था।
 
2 दिसंबर 1552 को एक समुद्री यात्रा के दौरान चीन में संत जेवियर की मृत्यु हो गई थी, लेकिन उनकी इच्छानुसार उनके पार्थिव शरीर को सन् 1554 में गोवा लाया गया।

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