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अपरा एकादशी को क्यों कहते हैं अचला एकादशी, जानिए दोनों का अर्थ और फायदा

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चित्र में शेषनाग पर विराजित हाथ में शंख, कमल लिए हुए भगवान श्रीविष्णु की आराधना में व्यस्त माता लक्ष्मी
Spiritual benefits of Ekadashi: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत का अत्यंत महत्व है। यह व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है और इसे करने से पाप नष्ट होते हैं, जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। विशेष रूप से, अपरा एकादशी और अचला एकादशी अपने अलग-अलग आध्यात्मिक महत्व और फायदों के लिए प्रसिद्ध हैं।ALSO READ: Achala Ekadashi 2026: अचला एकादशी व्रत का समय, पूजा और पारण विधि
 
अपरा एकादशी का अर्थ है 'अपराजित' या 'अविनाशी', और इसे करने से आत्मा को पवित्रता मिलती है और जीवन में स्थायी खुशहाली आती है। वहीं, अचला एकादशी का अर्थ है 'अचल' यानी अडिग या स्थिर, और यह व्रत जीवन में स्थिरता, आत्म-नियंत्रण और सफलता प्रदान करता है।

यह व्रत धार्मिक शुद्धि, मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभके लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि आप अपने जीवन में धन, स्वास्थ्य, मन की शांति और भगवान विष्णु की कृपा पाना चाहते हैं, तो इन दोनों एकादशी व्रतों का पालन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
 

क्यों कहते हैं इसे 'अपरा' और 'अचला'?

इन दोनों नामों के पीछे गहरा अर्थ छिपा है:
 

1. अपरा एकादशी (Apra Ekadashi)

अर्थ: 'अपरा' का अर्थ होता है अपार या असीमित।
 
कारण: माना जाता है कि इस व्रत को करने से व्यक्ति को अपार पुण्य और असीमित धन-धान्य की प्राप्ति होती है। यह व्रत व्यक्ति के उन पापों को भी नष्ट कर देता है, जैसे ब्रह्म-हत्या या परनिंदा आदि, जो सामान्यतः अक्षम्य माने जाते हैं।ALSO READ: Apara Ekadashi Remedy: मिलेगी अपार दौलत और खोया हुआ सम्मान! बस अपरा एकादशी के दिन कर लें ये 4 अचूक उपाय
 

2. अचला एकादशी (Achala Ekadashi)

अर्थ: 'अचला' का अर्थ होता है स्थिर या जिसे हिलाया न जा सके।
 
कारण: इस दिन व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से मिलने वाला पुण्य 'अचल' हो जाता है, यानी वह कभी नष्ट नहीं होता। साथ ही, यह व्रत व्यक्ति के जीवन में स्थिरता (Stability) लाता है- चाहे वह आर्थिक हो, मानसिक हो या पारिवारिक।
 

अपरा/अचला एकादशी व्रत के फायदे

इस व्रत का महत्व पद्म पुराण में विस्तार से बताया गया है। इसके मुख्य लाभ निम्नलिखित हैं:
 
पापों से मुक्ति: अनजाने में किए गए बड़े से बड़े पापों- जैसे झूठी गवाही देना, शास्त्र की निंदा करना, या गलत तरीके से धन कमाना के प्रभाव से मुक्ति मिलती है।
 
प्रेत योनि से छुटकारा: मान्यताओं के अनुसार, जो व्यक्ति इस व्रत को श्रद्धापूर्वक करता है, उसे मृत्यु के पश्चात प्रेत योनि में नहीं जाना पड़ता।
 
यश और सौभाग्य: इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को समाज में मान-सम्मान, पद-प्रतिष्ठा और सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
 
अश्वमेध यज्ञ के समान फल: शास्त्रों के अनुसार, अपरा एकादशी का व्रत रखने से वही फल मिलता है जो कार्तिक स्नान या गंगा तट पर पितृ तर्पण करने से प्राप्त होता है।
 
आर्थिक स्थिरता: 'अचला' नाम होने के कारण यह माता लक्ष्मी को भी प्रिय है, जिससे घर में धन की स्थिरता बनी रहती है।
 

पूजा के विशेष नियम

 
देवता- भगवान विष्णु के 'त्रिविक्रम' स्वरूप की पूजा की जाती है।
भोग- भगवान को तुलसी दल, फल और पीले रंग की मिठाई का भोग लगाएं।
दान- इस दिन जल, छाता या खरबूजे का दान करना अत्यंत शुभ है।
वर्जित- एकादशी के दिन चावल खाना और तामसिक भोजन का सेवन पूरी तरह वर्जित है।
 
रोचक तथ्य: अपरा एकादशी का फल वही है जो कुरुक्षेत्र में सूर्य ग्रहण के समय दान करने से मिलता है, यानी यह कम मेहनत में अधिक फल देने वाली एकादशी है।
 
नोट: दोनों नाम से प्रचलित यह एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित हैं और दोनों के लाभ धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
 
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।ALSO READ: अपरा एकादशी 2026: कब है तिथि और क्या है इसका धार्मिक महत्व? जानिए सब कुछ

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