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गम पालने के लाभ...

- मुरली मनोहर श्रीवास्तव

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भला गम भी कोई पालने की चीज है। लोग-बाग तो गम से दूर ही रहना चाहते हैं ऐसे में कोई सिरफिरा ही गम पालने के लाभ ढ़ूंढ सकता है। यही तो बात है कि जो सिगरेट और मदिरा का भरपूर लुत्फ लेते हैं वही दूसरों को उस से दूर रहने का उपदेश देते हैं। विश्वास मानिए गम पालने वाले भी इसी तरह के होते हैं, भीतर-भीतर गम का लुत्फ उठाते हैं और शो करते हैं कि गम के मारे मरे जा रहे हैं।

ज्यादातर ऐसे लोग गीत, गजल और शायरी की दुनिया में पाए जाते हैं। हर मुहल्ले में दस-बीस शायर होते हैं और बड़ी तबीयत से अपनी जिंदगी जीते हैं, भले ही उनके चलते अड़ोसी-पड़ोसी परेशान हों पर सबसे ज्यादा परेशान वे ही नजर आते हैं। कारण कुछ भी नहीं होगा पर लगेगा कि उन पर मुसीबतों का पहाड़ टूटा पड़ा है। इधर उन पर मुसीबत बढ़ती है और उधर कागज, कलम और श्रोता मुसीबत में पड़ जाते हैं।

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होता यह है कि जैसे-जैसे उनके दिल में गम की मात्रा बढ़ती है वैसे-वैसे उनके भीतर का शायर जागता है। जैसे जैसे शायर जागता है वैसे-वैसे वह श्रोता ढूंढ़ना शुरू करता है। कहते हैं वह गम ही क्या जिसका प्रदर्शन न किया जाए। सो महफिल में सुनाकर वह सोचता है कि सभी हमारे गम में शरीक हैं।

हां, चाय-पानी का बंदोबस्त हो तो महफिल में श्रोताओं की संख्या बढ़ने में देर नहीं लगती। कई बार तो गम के अशयार को सुनाने के लिए खुद माहौल बनाया जाता है। यहां तक कि चाय-पानी का जुगाड़ भी दो चार गमजदा मिलकर कर लेते हैं और महफिल को गोष्ठी का नाम दे देते हैं। जरा सोचिए, चाय-पानी के बाद सुनने वाला लिखने वाले की तारीफ क्यों नहीं करेगा।

इस तारीफ के बाद उसके चेहरे पर लौटी मुस्कान बताती है कि उसे कितना रुहानी सुकून मिला है। ऐसे ही माहौल के लिए लिखा गया है जमाने भर के गम या एक तेरा गम, ये गम होगा तो कितने गम न होंगे। अर्थात एक गम पालते ही जमाने भर के गमों से मुक्ति मिल जाती है। बच्चे की फीस जमा करनी है, घर में आटा-दाल नहीं है, नौकरी छूटने की टेंशन है। इस सब से मुक्ति का उपाय है एक तेरा गम जो इन सब पर भारी है।

जरा सोचिए, आप किसी केमिस्ट के पास जमाने भर की टेंशन से मुक्ति की टैबलेट लेने जाएं तो वह हाथ जोड़ देगा, कहेगा सिरदर्द, बदन दर्द, सर्दी-जुकाम है तो बताइए, जमाने भर के गम की कोई टैबलेट अभी नहीं बनी है। बहुत हुआ तो कहेगा कि सिरदर्द की कोई टैबलेट ले लीजिए, सब सही हो जाएगा।

देखा आपने, कहां वे एक गम पाल कर तमाम उलझनों से मुक्त हैं और कहां आपके लिए मुसीबतों से छुटकारे की एक टैबलेट तक नहीं है। अब आप ही बताइए ऐसे में गम पालना लाभ का सौदा है कि नहीं...।

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