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राष्ट्रीय लुप्तप्राय प्रजाति दिवस: यह जानकर हैरान रह जाएंगे आप!

डॉ. छाया मंगल मिश्र
कोरोना के चलते इस तथ्य से मुंह नहीं फेर सकते कि मनुष्यों ने चर, जल, थल पर जिन प्राणियों का अधिकार था उस पर अतिक्रमण कर नाजायज कब्ज़ा किया।

उनको और उनकी प्रजाति को नुकसान पहुंचाया। उनके महत्ता को नजरंदाज किया। उसी प्रकृति से छेड़छाड़ का नतीजा हम मनुष्य भुगत रहें हैं।

दुनिया में पाई जाने वाली जीव-जन्तुओं की लाखो प्रजातियों में भिन्न-भिन्न विशेषताएं पाई जाती हैं, यूं तो विश्व में पाई जाने वाली सभी प्रजातियों में कोई न कोई खूबी  जरूर छिपी होती है। मनुष्य को छोड़ सारे प्राणी बिना कारण किसी को भी नुकसान नहीं पहुंचाते।

आज धरती पर सभी प्राणियों की प्रजाति को खतरा है। सभी विलुप्त होने की कगार पर हैं आज इस दिवस पर इन्हें इनके हक से जीने देने का प्रण लें, बचने के भरसक हर संभव प्रयास करें, इनकी रक्षा करे, वर्ना वो दिन दूर नहीं जब हम भी लुप्तप्राय प्रजाति में गिने जाएंगे।
  1. इंसान का DNA घोंघे से 70% और चिम्पांजी से 98.4% मिलता है।
  1. कंठफोड़वा पक्षी एक सेकंड में 20 बार चोंच मर सकता है।
  1. अगर बतख के बच्चे ने पैदा होने के 10 मिनट बाद आपको देख लिया तो वो आपको ही मां समझने लगेगा।
  1. फ्लेमिंगो नाम का पक्षी केवल तभी खाना खा सकता है जब उसका सर उल्टा हो।
  1. गोरिल्ला इंसानी जुकाम सहित बहुत सी बीमारी कैच कर सकता है।
  1. गिल्लोरानी (गिलहरी) लाल रंग नहीं देख सकतीं।
  1. हेमिंग बर्ड अकेला ऐसा पक्षी है जो उल्टा उड़ सकता है।
  1. सूअर वीड‍ियो गेम भी खेल सकता है।
  1. पतंगे (Moths) का पेट नहीं होता।
  1. बिच्छू 6 दिन तक सांस रोक सकता है।
  1. नर समुद्री घोड़ा गर्भवती हो सकता है, बच्चे को जन्म भी दे सकता है।
  1. भालू के 42 दांत होते हैं।
  1. जिराफ की जीभ इतनी लम्बी होती है कि इससे वह अपना कान भी साफ कर सकता है।
  1. एक तितली की 12,000 आंखें होती हैं।
  1. चूहे बिना पानी के ऊंट से भी ज्यादा समय तक रह सकते हैं।
  1. भारत में किसी और जानवर की बजाय सबसे ज्यादा संख्या में भैंस पाई जातीं है।
  1. गायों को तभी सपने आते हैं जब ये लेट कर सोतीं हैं।
  1. मेंढक बिना पलक झपके कुछ नहीं निगल सकता।
  1. सांड कलर ब्लाइंड होते हैं इन्हें लाल रंग भी नहीं दिखता जो खेल के दौरान दिखाया जाता है।
  1. बकरी की आंखें 360 डिग्री एंगल तक देख सकती हैं।
  1. हाथी जरुरत पड़ने पर अपने निजांग का इस्तेमाल पैर के रूप में भी कर सकता है, जिसका वजन 60 किलो तक हो सकता है।

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