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गुजरात भाजपा में बगावत! कई नेताओं ने दी निर्दलीय चुनाव लड़ने की चेतावनी

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सोमवार, 14 नवंबर 2022 (13:48 IST)
गुजरात में नए चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने का दांव भाजपा के लिए उलटा पड़ता दिख रहा है। जिन विधायकों और पूर्व विधायकों के टिकट भाजपा ने काटे हैं, उनमें से कुछ ने बागी तेवर अपना लिए हैं। इन नाराज नेताओं पार्टी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनावी मैदान में उतरने की धमकी दी है। भाजपा 182 में से 166 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर चुकी है। अभी भी 16 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा शेष है। 
 
भाजपा के फैसले से असंतुष्ट कुछ नेताओं ने कहा है कि अपने समर्थकों के साथ चर्चा के बाद अगला कदम उठाएंगे, वहीं कुछ खुले तौर पर मैदान में आ गए हैं। इन्हीं में से एक भाजपा के पूर्व विधायक हर्षद वसावा ने नंदोद (एसटी आरक्षित) सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन भी दाखिल कर दिया है। 
 
वसावा वर्तमान में भाजपा की गुजरात इकाई के अनुसूचित जनजाति मोर्चा के अध्यक्ष हैं साथ 2002 और 2007 में राजपीपला सीट से विधायक रह चुके हैं। नर्मदा जिले की नंदोद सीट पर फिलहाल कांग्रेस का कब्जा है। भाजपा ने यहां से डॉ. दर्शन देशमुख को उम्मीदवार बनाया है। नामांकन दाखिल करने के बाद हर्षद वसावा ने कहा कि यह असली भाजपा और नकली भाजपा के बीच लड़ाई है। 
 
वसावा ने कहा कि मैंने अपना इस्तीफा पार्टी को भेज दिया है। हम उन लोगों को बेनकाब करेंगे जिन्होंने निष्ठावान कार्यकर्ताओं की अनदेखी की है। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के लोग जानते हैं कि मैंने 2002 से 2012 के बीच विधायक के रूप में काफी काम किया है। यदि वसावा अपना नाम वापस नहीं लेते हैं तो भाजपा के लिए यह सीट जीतना काफी मुश्किल होगा क्योंकि यह सीट वर्तमान में कांग्रेस के पास है और वसावा के मैदान में होने से भाजपा की स्थिति और खराब हो सकती है। 
 
इसी तरह वडोदरा जिले की वाघोडिया सीट से 6 बार विधायक रहे मधु श्रीवास्तव ने भी पार्टी के फैसले पर नाराजगी जाहिर की है। उन्होंने सीधे चुनाव लड़ने की बात तो नहीं कही, लेकिन उन्होंने संकेत जरूर दिए कि यदि उनके समर्थक चाहेंगे तो वे निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में उतरेंगे। भाजपा ने यहां से अश्विन पटेल को टिकट दिया है। 
 
वड़ोदरा जिले की ही पादरा सीट से भाजपा के एक अन्य पूर्व विधायक दिनेश पटेल उर्फ ​​दीनू मामा ने भी बागी रुख अख्तियार कर लिया है। उन्होंने कहा है कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे। भाजपा ने इस सीट से चैतन्य सिंह झाला को टिकट दिया है। वर्तमान में यह सीट कांग्रेस के पास है।
 
दूसरी ओर करजन में मौजूदा विधायक अक्षय पटेल को टिकट दिए जाने से भाजपा के पूर्व विधायक सतीश पटेल भी नाराज हैं। स्थिति को संभालने के लिए भाजपा की राज्य इकाई के महासचिव भार्गव भट्ट और गृह राज्यमंत्री हर्ष सांघवी ने शनिवार को वडोदरा का दौरा किया और स्थानीय पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। हालांकि वे असंतुष्ट नेताओं को मना पाए, इसका खुलासा नहीं हो पाया, लेकिन भट्ट ने विश्वास जताया कि भाजपा वडोदरा की सभी सीटों पर जीत हासिल करेगी।
 
जूनागढ़ की केशोद सीट से भाजपा के पूर्व विधायक अरविंद लाडानी ने भी घोषणा की कि वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ेंगे क्योंकि पार्टी ने मौजूदा विधायक देवभाई मालम को टिकट दिया है। इस बीच, खबर यह भी है असंतुष्ट नेताओं को साधने का काम अब स्वयं केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने संभाल लिया है।
 
उल्लेखनीय है कि भाजपा ने 40 के लगभग विधायकों और पूर्व मंत्रियों के टिकट काट दिए हैं। पूर्व विधायकों को मिलाकर यह आंकड़ा 80 के आसपास पहुंच रहा है। यदि यह असंतोष नहीं थमता है तो भाजपा की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

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