Publish Date: Mon, 11 May 2026 (16:37 IST)
Updated Date: Mon, 11 May 2026 (16:39 IST)
प्रथम ज्योतिर्लिंग Somnath Temple के पवित्र सानिध्य में आज भक्ति, शक्ति और राष्ट्रीय गौरव का अद्भुत संगम देखने को मिला। सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित सोमनाथ अमृतपर्व-2026 में शामिल होने के लिए Narendra Modi सोमनाथ पहुंचे थे। उनके आगमन से पूरा प्रभास पाटन भक्तिमय वातावरण से गूंज उठा।
सोमनाथ के शिखर पर कुंभाभिषेक और विशेष पूजा
प्रधानमंत्री मोदी ने मंदिर के 90 मीटर ऊंचे शिखर पर 11 पवित्र तीर्थों के जल से कुंभाभिषेक कर ऐतिहासिक विधि संपन्न की। इस अभिषेक के लिए विशेष क्रेन की सहायता ली गई थी। इसके बाद उन्होंने सोमनाथ महादेव के गर्भगृह में शास्त्रोक्त विधि से जलाभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना की। इस दौरान भारतीय वायुसेना के चेतक हेलिकॉप्टर द्वारा मंदिर परिसर में पुष्पवर्षा की गई, जिससे पूरा वातावरण दिव्यता से भर गया।
भारत की शक्ति और आध्यात्मिक चेतना का संदेश
जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, “जिसका नाम सोम है, उसे कोई नष्ट नहीं कर सकता।” उन्होंने कहा कि भारत अपनी आध्यात्मिक चेतना और अडिग संकल्पशक्ति के बल पर आज विश्व मंच पर और अधिक मजबूत तथा अजेय बन रहा है। उनके इस संदेश से उपस्थित जनसमूह में गर्व और उत्साह का माहौल दिखाई दिया।
पोखरण परीक्षण और शिव-शक्ति का उल्लेख
प्रधानमंत्री मोदी ने 11 मई के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए Pokhran-II परमाणु परीक्षण को याद किया। उन्होंने कहा कि आज ही के दिन भारत ने पोखरण में सफल परमाणु परीक्षण कर दुनिया को अपनी ताकत दिखाई थी। उन्होंने आगे कहा कि शिव और शक्ति की उपासना भारत की परंपरा है, इसलिए चंद्रयान के लैंडिंग पॉइंट का नाम भी शिव-शक्ति रखा गया है।
सरदार पटेल के संकल्प को प्रधानमंत्री की श्रद्धांजलि
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने Sardar Vallabhbhai Patel को याद करते हुए कहा कि आजादी के बाद सोमनाथ मंदिर का पुनर्निर्माण भारत के स्वाभिमान का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने अनेक विरोधों के बावजूद दृढ़ संकल्प के साथ मंदिर के पुनर्निर्माण का कार्य पूरा कराया था। साथ ही उन्होंने Ram Mandir Ayodhya, Kashi Vishwanath Corridor और Mahakal Lok जैसे प्रोजेक्ट्स का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत एक बार फिर अपनी सांस्कृतिक विरासत को भव्य रूप से स्थापित कर रहा है। अंत में “हर हर महादेव” के जयघोष के साथ उन्होंने अपना संबोधन समाप्त किया। Edited by : Sudhir Sharma
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