rashifal-2026

मालदीव यात्रा के दौरान साहित्य-संस्कृति पर चर्चा...

Webdunia
दो सप्ताह का मालदीव प्रवास कई दृष्टियों से सार्थक, उपयोगी और आनंददायक रहा। यहां के समुद्री-सौन्दर्य, जिसके लिए मालदीव प्रसिद्ध है, को करीब से देखने का अवसर तो मिला ही, यहां के जनजीवन और जीवनशैली से भी परिचित होने का मौका मिला। 

विशेष प्रसन्नता की बात यह रही कि यहां के  भारतीय सांस्कृतिक केंद्र और धीविही भाषा अकादमी (Dhivehi Language Academy) जो राजधानी माले में स्थित हैं, को देखने और वहां के अधिकारियों से भाषा-साहित्य-संस्कृति से जुड़े अहम मुद्दों पर सार्थक चर्चा करने का सुअवसर भी मिला। 
 
साहित्य-संस्कृति के सरोकारों पर दोनों जगह मेरे व्याख्यान हुए जिन्हें सुनने के लिए यहां के स्थानीय लेखकों, संस्कृतिकर्मियों और प्रबुद्ध वर्ग ने खासी रूचि दिखाई। पहला व्याख्यान यहां की इंडियन एम्बेसी के सौजन्य से भारतीय सांस्कृतिक केंद्र (ICC) में 13 नवम्बर को सायं आठ बजे हुआ और दूसरा व्याख्यान 14 नवम्बर को यहां की राज्य भाषा अकादमी (Dhivehi Language Academy) में दिन में हुआ। पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता मालदीव में भारतीय राजदूत माननीय अखिलेश मिश्र जी, जो स्वयं हिंदी-संस्कृत के अच्छे ज्ञाता हैं, ने की और दूसरे कार्यक्रम में धीविही भाषा अकादमी (Dhivehi Language Academy) के चेयरमैन ने सभापति की भूमिका निभाई। 
 
पहले व्याख्यान में साहित्य और साहित्यकार की वर्तमान समय में भूमिका, कश्मीर की साहित्यिक पृष्ठभूमि और उसका सौन्दर्य तथा दूसरे व्याख्यान में अनुवादकला का वर्तमान युग में महत्व और उसकी उपयोगिता आदि विषयों पर मैं ने अपने विचार रखे। दोनों व्याख्यानों को खूब पसंद किया गया। 
 
- डॉ. शिबन कृष्ण रैणा
 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

अमीर लोगों की 8 आदतें जो बदल देंगी आपका जीवन | Money Mindset

ऐसा रखें घर का वास्तु, जानें 5 टिप्स, मिलेंगे बेहतरीन लाभ

लोकमाता अहिल्या: तीन युगों की महानता का संगम

परीक्षा, तनाव और विद्यार्थी : दबाव के बीच संतुलन की राह

क्या डायबिटीज रोगी कीवी खा सकते हैं?, जानें 4 फायदे

सभी देखें

नवीनतम

Clock Direction: घड़ी लगाने की सही दिशा बदल देगी आपका 'बुरा समय', आज ही चेक करें अपना घर

Valentine Day Essay: वेलेंटाइन डे पर बेहतरीन निबंध हिन्दी में

प्रेरक कविता: तुम कमजोर नहीं हो

इन 10 तरह के लोगों से कभी उम्मीद न रखें, वरना जीवन में मिलेगा सिर्फ दुख

हिन्दी कविता: फूल पलाश के...

अगला लेख