तन की मीठी झील में

Webdunia
हरीश निग म
NDND
अंग-अंग के सुर नए, बदली-बदली ताल,
आग लगाता-सा लगे, फागुन अब के साल।

रंगों की बौछार में, ताजमहल-सी देह,
मोरपंख से मन उगे, सुआपंखियाँ-नेह।

खट्टी-मीठी चिट्ठियाँ, फगुनाहट की बाँच,
सपनों के वन में भरे, मन का हिरन कुलाँच।

खिली-खिली-सी चाँदनी, धूली-धूली-सी धूप,
बौराई इस गंध में, बहके-बहके रूप।

साधों की नदिया चढ़ी, कोई ना ठहराव,
पाल खुले तूफान में, डगमग होती नाव।

अंग छरहरी नीम के, उठती मीठी पीर,
अभी-अभी तो हँस रही, अभी-अभी गंभीर।

गूँजे सारे गाँव में, ढोलक ताशे फाग,
पिया बसे परदेश में, सारे विरहा-राग।

तन की मीठी झील में, खिले कमल के फूल,
हल्दी बोरी चिट्ठियाँ, अब तो करो कबूल।

Show comments

हर मौसम में काम आएंगे पानी के संकट से बचने के ये 10 तरीके

कैंसर के इलाज में क्रांति है CAR टी-सेल थेरेपी, जानिए कैसे करती है काम

गर्मियों में इम्युनिटी बढ़ाने वाले इस डेली डाइट रूटीन को करें फॉलो, दिनभर रहेंगे एनर्जेटिक

घर पर कैसे बनाएं गर्मी में ठंडक पहुंचाने वाले रसीले शरबत, नोट करें 3 रेसिपी

रात को शहद में भिगोकर रख दें यह एक चीज, सुबह खाने से मिलेंगे सेहत को अनगिनत फायदे

जानिए सेहत के लिए कैसे फायदेमंद है व्रत में खाया जाने वाला कुट्टू का आटा

सुनिता विलियम्स की वापसी अटकी थी राजनीति के कारण

चैत्र नवरात्रि 2025: नवरात्रि व्रत कर कम करना चाहते हैं वजन, तो भूलकर भी ना खाएं ये 6 चीजें

बाप बड़ा न भैया, सबसे बड़ा रुपैया

Chaitra navratri diet: नवरात्रि में कैसे रखें अपनी सेहत का ख्याल? जानें सही डाइट टिप्स