Hanuman Chalisa

नियति की नाटकी प्रवृति !

Webdunia
गोपाल बघेल 'मधु'
टोरोंटो, ओंटारियो, कनाडा
(मधुगीति १७०६२४ ब)
 
नियति की नाटकी प्रवृति, निवृत्ति से ही तो आई है, 
प्रकृति वह ही बनाई है, प्रगति जग वही लाई है !
 
नियंता कहां कुछ करता, संतुलन मात्र वह करता,
ज्योति आत्मा किसी देता, कम किए लौ कोई चलता !
न्याय करना उसे पड़ता, उचित संयत न जब होता, 
समय बदलाव को देता, स्वल्प आघात तब करता !
 
स्वचालित संतुलित संस्थित, क्रियान्वित सजग शुभ प्रहरित, 
सृष्टि संयम नियम रहती, नृत्य हर ताल करवाती !
प्रवृति दे ज्ञान करवाती, क्रियति कर मर्म सुधवाती,  
भेद कर्त्ता का मिटवाती, प्रभु से 'मधु' को मिलवाती !
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

Hiccups Relief Tips: बार-बार हिचकी क्यों आती है? जानें कारण और आसान उपचार

इलाज आपकी थाली में, ध्यान नहीं दिया तो साइलेंट किलर साबित हो सकता है एनीमिया

घर संभालने वाली महिलाओं को 30 हजार; पर 'हाउस हसबैंड्स' का क्या?

भरपूर लाभ के लिए रोज करें मंडूकासन; जानिए इसे करने का सही तरीका

हिंदी साहित्य में पहेली के रूप में लिखी जाने वाली एक लयात्मक कविता: कह मुकरियां

सभी देखें

नवीनतम

त्रेता से लेकर कलयुग तक कहानी चरण पादुका की

नशे की लत से उबरने के लिए कौनसी थेरेपी और कदम होते हैं सबसे असरदार

कविता : हवा महल

Flat Vastu Tips: फ्लैट में रह रहे लोगों के लिए वास्तु के 5 टिप्स

World Drug Free Day 2026: विश्व नशा मुक्ति दिवस क्यों मनाना है जरूरी, जानें खास तथ्य

अगला लेख