अंततः मुबारक महाराष्ट्र को एक तिमुही सरकार।
एक राजनीतिक मंडप जिसके हैं तीन मुख्य द्वार ||
एक वाहन जिसके हैं तीन पहिए, अलग-अलग मेक व साइज़ के,
एक त्रिकोण जिसकी भुजा/कोण के अलग-अलग आकार || 1 ||
एक माह के हाई-टेंशन ड्रामें में देखी सबने सब दलों की तासीर।
महंगे होटलों में अलग-अलग हंडियों में पकती खीर ||
कितने हुए ज्वार भाटे, अपनों-अपनों के अंतरद्वंद्व।
शतरंजी चालें, बेशर्मी के अखाड़ी दाव-पेंच,
कभी जुड़ने, कभी टूटने (कभी रूठने, कभी मनाने) के अनिश्चय/आनंद || 2 ||
प्रजातंत्र की दुहाई, शिवाजी के नाम की गुहार।
अपनों की गुस्ताखी, परायों की मीठी मनुहार ||
क्रिकेट के टेस्ट-मैच सी, चढ़ती-उतरती स्कोर,
किसी का 'रन-आउट' होना और किसी का शतकीय प्रहार || 3||
ओ मतदाता! अब राजनीति के खेल की यही भावी शैली होगी।
राजनीति की गंगा दिन-दिन और अधिक मैली होगी।
अब यही सीरियल देखने हैं तुमको, हर चैनल पर हंसते-रोते ,
मत उदास होना (क्योंकि) आगे की राजनीति अब एक अबूझ पहेली होगी || 4 ||
About Writer
डॉ. रामकृष्ण सिंगी
डॉ. रामकृष्ण सिंगी ने मध्यप्रदेश के शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालयों में 40 वर्षों तक अध्यापन कार्य किया तथा 25 वर्षों तक वे स्नातकोत्तर वाणिज्य विभागाध्यक्ष व उप प्राचार्य रहे। महू में डॉ. सिंगी का निवास 1194 भगतसिंह मार्ग पर है। डॉ. सिंगी देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर (मप्र) के वाणिज्य संकाय....
और पढ़ें