Hanuman Chalisa

कविता : ओ मेघ अब तो बरस जा

संजय वर्मा 'दृष्ट‍ि'
सूखी धरा तरसे हरियाली 
जाती आबिया लाएगी संदेशा 
माटी की गंध का होगा कब अहसास हमें 
गर्म पत्थरों के दिल कब होंगे ठंडे 
घनघोर घटाओं को देख 
नाचते मोर के पग भी अब थक चुके 
मेंढक को हो रहा टर्राने का भ्रम  
ओ मेघ अब तो बरस जा 
 
 
छतरियां, बरसाती 
भूली गांव-शहर का रास्ता 
उन्होंने घरों में जैसे रख लिया हो व्रत 
नदियां, झरनों के हो गए कंठ सूखे 
कल-कल के वे गीत भूले 
नेह में भर गया अब तो पानी 
ओ मेघ अब तो बरस जा 
 
हले खेत हो जैसे अनशन पर 
बादलों की गड़गड़ाहट 
बिजलियों की चमक से 
डर जाता था कभी प्रेयसी का दिल 
ठंडी हवाओं से उठ जाता था घुंघट 
मुस्कुराते चेहरे होने लगे अब मायूस 
ओ मेघ अब तो बरस जा 
Show comments
सभी देखें

जरुर पढ़ें

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

Summer diet plan: गर्मी से बचने के लिए जानें आयुर्वेदिक पेय और डाइट प्लान

Nautapa and health: नौतपा में ऐसे रखें सेहत का ध्यान, जानें 10 सावधानियां

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

cold water: ज्यादा ठंडा पानी पीना सही है या गलत? जानें सच

सभी देखें

नवीनतम

भारतीय नौसेना के लिए जर्मन पनडुब्बियां, जो मुंबई में बनेंगी

भोजशाला: सत्य अतीत, सनातन की न्यायिक जीत

World Telecommunication Day 2026: विश्व दूरसंचार दिवस क्यों मनाया जाता है?

International Family Day: अंतरराष्ट्रीय परिवार दिवस, जानें डिजिटल युग में परिवार के साथ जुड़ाव बनाए रखने के तरीके

किडनी की सफाई के लिए 3 घरेलू उपाय, डॉक्टर की सलाह से आजमाएं

अगला लेख