चल उठ स्त्री बांध कफन अब कोई रक्षक नहीं आएगा हत्या-शोषण-बलात्कार से अब कोई तुझे नहीं बचाएगा। ये कलयुग है निर्ममता यहां स्नेह की आस किससे लगाओगी? स्तन पर नजरें टिकाए बैठे दु:शासन से ना बच पाओगी। कैसी आस लगा रखी है तुमने जिस्म के ठेकेदारों से? खुद...