हिन्दी कविता : संघर्ष ही विजय

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- निरंजन कुमार बंसल



जीवन उसी का नाम है, जो संघर्षों से गुजरे,
उसका जीवन क्या जीवन है, जो बच-बच के निकले।
 
माना संघर्षों में हमको, दुख उठाना पड़ता है,
लेकिन दुख के बाद हमें, सुख अनुभव का होता है।
 
देखो सुबह के सूरज को, जो बादलों को चीर के निकले,
अपनी इस ताकत से वो, रात के अंधेरे को निगले।
 
इसी अपनी ताकत से वो, दुनिया में पूजा जाए,
कोई उसको 'रब' कहता, कोई अपना 'इश्क' बतलाए।
 
 
 
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