Publish Date: Wed, 17 Jun 2026 (16:42 IST)
Updated Date: Wed, 17 Jun 2026 (17:01 IST)
योग पर कविता
योग है जीवन का आधार,
रखे तन-मन को सदा साकार।
हर दिन जो योग अपनाता है,
स्वस्थ और सुखी जीवन पाता है।
सूरज संग जब योग करें,
नई ऊर्जा का संचार करें।
तन की थकान दूर हो जाती,
मन में खुशियों की ज्योत जगाती।
प्राणायाम का अद्भुत ज्ञान,
देता है जीवन को नई उड़ान।
तनाव, चिंता दूर भगाए,
मन को शांति का मार्ग दिखाए।
योग बढ़ाए आत्मबल अपना,
सजाए स्वास्थ्य का सुंदर सपना।
रोगों से लड़ने की शक्ति दे,
जीवन में नई भक्ति दे।
योग से शरीर बने निरोग,
दूर रहें अनेक प्रकार के रोग।
लचीलापन और स्फूर्ति लाए,
हर दिन जीवन को महकाए।
आओ मिलकर योग करें,
स्वस्थ जीवन का संकल्प धरें।
योग का दीप जलाएं हम,
खुशहाल और निरोग बनाएं हम।
समापन पंक्तियां:
'योग अपनाओ, रोग भगाओ,
स्वस्थ जीवन का दीप जलाओ।
तन स्वस्थ, मन प्रसन्न रहेगा,
हर दिन जीवन सुंदर लगेगा।'
अस्वीकरण (Disclaimer) : चिकित्सा, स्वास्थ्य संबंधी नुस्खे, योग, धर्म, ज्योतिष, इतिहास, पुराण आदि विषयों पर वेबदुनिया में प्रकाशित/प्रसारित वीडियो, आलेख एवं समाचार सिर्फ आपकी जानकारी के लिए हैं, जो विभिन्न सोर्स से लिए जाते हैं। इनसे संबंधित सत्यता की पुष्टि वेबदुनिया नहीं करता है। सेहत या ज्योतिष संबंधी किसी भी प्रयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें। इस कंटेंट को जनरुचि को ध्यान में रखकर यहां प्रस्तुत किया गया है जिसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है।
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