Hanuman Chalisa

ऐसे अर्पित करेंगे देवताओं को नैवेद्य तो वे होंगे अति प्रसन्न, जानें 12 नियम...

Webdunia
* भगवान को नैवेद्य अर्पित करते समय ध्यान में रखें ये 12 बातें... 
 
देवी-देवताओं के निवेदन के लिए जिस भोज्य द्रव्य का प्रयोग किया जाता है, उसे नैवेद्य कहते है। उसे अन्य नाम जैसे भोग, प्रसाद, प्रसादी आदि भी कहा जाता है। किसी भी देवता/मूर्ति को चढ़ाई हुई या भेंट की गई खाद्य वस्तु को भोग या नैवेद्य कहते है।

यहां पाठकों के लिए प्रस्तुत है देवताओं को नैवेद्य अर्पित करने के कुछ नियम, जिन्हें अपना कर आप भगवान की कृपा प्राप्त कर सकते है। 
 
नैवेद्य चढ़ाने के 12 नियम जानिए... 
 
* नमक, मिर्च और तेल का प्रयोग नैवेद्य में नहीं किया जाता है।
 
* नैवेद्य में नमक की जगह मिष्ठान्न रखे जाते हैं।
 
* प्रत्येक पकवान पर तुलसी का एक पत्ता रखा जाता है।
 
* नैवेद्य की थाली तुरंत भगवान के आगे से हटाना नहीं चाहिए।
 
* शिवजी के नैवेद्य में तुलसी की जगह बेल और गणेशजी के नैवेद्य में दूर्वा रखते हैं। 
 
* नैवेद्य देवता के दक्षिण भाग में रखना चाहिए।
 
* कुछ ग्रंथों का मत है कि पक्व नैवेद्य देवता के बाईं तरफ तथा कच्चा दाहिनी तरफ रखना चाहिए। 
 
* भोग लगाने के लिए भोजन एवं जल पहले अग्नि के समक्ष रखें। फिर देवों का आह्वान करने के लिए जल छिड़कें।
 
* तैयार सभी व्यंजनों से थोड़ा-थोड़ा हिस्सा अग्निदेव को मंत्रोच्चार के साथ स्मरण कर समर्पित करें। अंत में देव आचमन के लिए मंत्रोच्चार से पुन: जल छिड़कें और हाथ जोड़कर नमन करें।
 
* भोजन के अंत में भोग का यह अंश गाय, कुत्ते और कौए को दिया जाना चाहिए।
 
* पीतल की थाली या केले के पत्ते पर ही नैवेद्य परोसा जाए।
 
* देवता को निवेदित करना ही नैवेद्य है। सभी प्रकार के प्रसाद में निम्न पदार्थ प्रमुख रूप से रखे जाते हैं- दूध-शकर, मिश्री, शकर-नारियल, गुड़-नारियल, फल, खीर, भोजन इत्यादि पदार्थ।
Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

जनवरी माह 2026 में कैसा रहेगा 12 राशियों का राशिफल

नए साल 2026 के संकल्प: क्यों 90% लोग फेल हो जाते हैं और आप कैसे सफल हो सकते हैं?

न्यू ईयर राशिफल 2026: किस राशि के लिए शुभ और किसके लिए है अशुभ?

जनवरी 2026 में 4 राशियों को होगा बड़ा फायदा

2026 में ऑनलाइन ज्योतिष (Astrology) परामर्श के लिए 10 भरोसेमंद ज्योतिष वेबसाइट्‍स

सभी देखें

धर्म संसार

31 December Birthday: आपको 31 दिसंबर, 2025 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 31 दिसंबर, 2025: बुधवार का पंचांग और शुभ समय

Makar Sankranti 2026: 14 जनवरी को मनाया जाएगा 'मकर संक्रांति' पर्व, वर्षों बाद बना दुर्लभ संयोग

Putrada Ekadashi Katha: पुत्रदा एकादशी व्रत की कथा

पौस मास पुत्रदा एकादशी का व्रत क्यों रखते हैं, क्या है इसका नियम, पारण और पूजा विधि

अगला लेख