Biodata Maker

इस अनोखे मंदिर में होलिका नहीं, हिरण्यकश्यप का होता है दहन, जानिए कहां है ये मंदिर

WD Feature Desk
बुधवार, 5 मार्च 2025 (18:13 IST)
Hiranyakashyap Dahan: होली का त्योहार बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है। आमतौर पर, इस दिन होलिका का दहन किया जाता है, लेकिन राजस्थान के कोटा जिले के कैथून में एक अनोखी परंपरा निभाई जाती है। यहां होलिका की जगह हिरण्यकश्यप का दहन किया जाता है। यह परंपरा विभीषण मंदिर में निभाई जाती है, जो अपने आप में एक अनूठा मंदिर है।
 
विभीषण मंदिर का महत्व
विभीषण मंदिर कैथून का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर रावण के भाई विभीषण को समर्पित है। मंदिर की वास्तुकला बहुत ही सुंदर है और यह पर्यटकों को आकर्षित करती है।
कैथून के विभीषण मंदिर में होली के अवसर पर हिरण्यकश्यप का पुतला जलाया जाता है। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। स्थानीय लोगों का मानना है कि हिरण्यकश्यप का दहन बुराई का नाश करने का प्रतीक है।
 
हिरण्यकश्यप दहन का इतिहास
हिरण्यकश्यप दहन की परंपरा का इतिहास पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। हिरण्यकश्यप एक राक्षस राजा था जो भगवान विष्णु से घृणा करता था। उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। हिरण्यकश्यप ने प्रह्लाद को कई बार मारने की कोशिश की, लेकिन भगवान विष्णु ने हर बार उसकी रक्षा की। अंत में, भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर हिरण्यकश्यप का वध किया।

ALSO READ: तमिलनाडु में होली पर क्यों मनाया जाता है काम-दहनम त्योहार, क्या भगवान शिव और कामदेव से जुड़ा है इतिहास
क्या है पौराणिक कथा
कोटा के कैथून कस्बे में मौजूद देश के एकमात्र विभीषण का मंदिर में हर साल बड़ी संख्या श्रद्धालु आते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर लगभग 5000 हजार साल पुराना है। एक मान्यता के अनुसार भगवान राम के राज्याभिषेक के समय जब शिवजी ने मृत्युलोक की सैर करने की इच्छा प्रकट की तो रावण के भाई विभीषण ने भगवान शंकर और हनुमान को कांवड़ पर बिठाकर सैर कराने का संकल्प लिया। तब शिवजी ने विभीषण के सामने शर्त रखी कि जहां भी उनका कांवड़ जमीन को छुएगा, यात्रा वहीं खत्म हो जाएगी। 
 
जब विभीषण शिवजी और हनुमान को लेकर यात्रा पर निकले तो कुछ स्थानों के भ्रमण के बाद विभीषण का पैर कैथून आकर धरती पर पड़ गया और यात्रा खत्म हो गई। कांवड़ का एक सिरा कैथून से करीब 12 किलोमीटर आगे चौरचौमा में और दूसरा हिस्सा कोटा के रंगबाड़ी इलाके में पड़ा। तभी रंगबाड़ी में भगवान हनुमान और चौरचौमा में शिव शंकर का मंदिर स्थापित किया गया। जहां विभीषण का पैर पड़ा, वहां विभीषण मंदिर का निर्माण करवाया गया।

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

जानिए 3 रहस्यमयी बातें: कब से हो रही है शुरू गुप्त नवरात्रि और इसका महत्व

खरमास समाप्त, मांगलिक कार्य प्रारंभ, जानिए विवाह और वाहन खरीदी के शुभ मुहूर्त

मनचाहा फल पाने के लिए गुप्त नवरात्रि में करें ये 5 अचूक उपाय, हर बाधा होगी दूर

हिंदू नववर्ष पर प्रारंभ हो रहा है रौद्र संवत्सर, 5 बातों को लेकर रहे सावधान

सावधान! सच होने वाली है भविष्यवाणी, शनि के कारण कई देशों का बदलने वाला है भूगोल, भयानक होगा युद्ध?

सभी देखें

धर्म संसार

Vasant Pancham: बसंत पंचमी के 5 रहस्य, जिन्हें जानकर सच में हैरान रह जाएंगे आप

वसंत पंचमी पर क्यों जागता है प्रेम? जानिए प्रेम दिवस बनने के पीछे के 2 बड़े रहस्य

Aaj Ka Rashifal: आज का दैनिक राशिफल: मेष से मीन तक 12 राशियों का राशिफल (20 जनवरी, 2026)

20 January Birthday: आपको 20 जनवरी, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

गुप्त नवरात्रि की खास साधना और पूजा विधि, जानें जरूरी नियम और सावधानियां

अगला लेख