होलाष्टक क्या है एवं क्यों मनाएं...

होली 2014 : होलाष्टक का महत्व

Webdunia
होलाष्टक के दिन होलिका दहन के लिए 2 डंडे स्थापित किए जाते हैं। जिनमें एक को होलिका तथा दूसरे को प्रह्लाद माना जाता है।

पौराणिक एवं शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार जिस क्षेत्र में होलिका दहन के लिए डंडा स्थापित हो जाता है, उस क्षेत्र में होलिका दहन तक कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता।

इस वर्ष होलाष्टक 8 मार्च से शुरू होकर 16 मार्च तक रहेगा। इस आठ दिनों के दौरान सभी शुभ कार्य वर्जित माने गए हैं। इसके अंतर्गत 16 को होलिका दहन और 17 मार्च को धुलेंडी खेली जाएगी।

आगे पढ़ें कैसे मनाएं होलाष्ट क




FILE


कैसे मनाएं होलाष्टक :

होलिका पूजन करने हेतु होलिका दहन वाले स्थान को गंगा जल से शुद्ध किया जाता है। फिर मोहल्ले के चौराहे पर होलिका पूजन के लिए डंडा स्थापित किया जाता है।

उसमें उपले, लकड़ी एवं घास डालकर ढेर लगाया जाता है। होलिका दहन के लिए पेड़ों से टूट कर गिरी हुई लकड़‍ियां उपयोग में ली जाती है तथा हर दिन इस ढेर में कुछ-कुछ लकड़‍ियां डाली जाती हैं।

इन दिनों शुभ कार्य करने पर अपशकुन होता है।

FILE


प्रचलित मान्यता के अनुसार शिवजी ने अपनी तपस्या भंग करने का प्रयास करने पर कामदेव को फाल्गुन शुक्ल अष्टमी तिथि को भस्म कर दिया था। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते हैं, इनके भस्म होने के कारण संसार में शोक की लहर फैल गई थी।

जब कामदेव की पत्नी रति द्वारा भगवान शिव से क्षमायाचना की गई तब शिवजी ने कामदेव को पुनर्जीवन प्रदान करने का आश्वासन दिया। इसके बाद लोगों ने खुशी मनाई। होलाष्टक का अंत धुलेंडी के साथ होने के पीछे एक कारण यह माना जाता है।


वेबदुनिया पर पढ़ें

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

Budh uday: बुध का मीन राशि में उदय, जानिए 12 राशियों का राशिफल

क्या नवरात्रि में घर बंद करके कहीं बाहर जाना है सही? जानिए क्या हैं नियम

साल का चौथा महीना अप्रैल, जानें किन राशियों के लिए रहेगा भाग्यशाली (पढ़ें मासिक भविष्‍यफल)

हर युग में प्रासंगिक है भगवान श्रीराम का जीवन चरित्र, मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम पर निबंध 600 शब्दों में

1000 बार हनुमान चालीसा पढ़ने से क्या होगा?

सभी देखें

धर्म संसार

रामनवमी पर पढ़ें भगवान श्रीराम को समर्पित ये स्वरचित कविता: मेरे अपने सबके केवल एक ही राम, एक ही राम

भगवान महावीर चालीसा : जय महावीर दया के सागर

हनुमानजी त्रेता में हुए फिर क्यों कहा जाता है- चारों जुग परताप तुम्हारा

चैत्र नवरात्रि व्रत के पारण का समय और व्रत खोलने का तरीका

राम नवमी के दिन क्या करें और क्या नहीं, जान लीजिए नियम