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मौत के सेल्फी पॉइंट! इंदौर के वॉटरफॉल्स पर 5 साल में 66 मौतें, 'डेथ जोन' में नो एंट्री पर रोक नहीं लगा पा रही पुलिस

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Picnic water fall death
इंदौर। मानसून की दस्तक के साथ ही इंदौर और उसके आसपास के खूबसूरत वॉटरफॉल्स पर पर्यटकों की भारी भीड़ उमड़ने लगी है, लेकिन यह रोमांच जरा सी लापरवाही के चलते काल के गाल में समाने का सबब बन रहा है। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 5 वर्षों में इंदौर के आसपास के पिकनिक स्पॉट्स पर कुल 66 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें मरने वालों में सबसे ज्यादा तादाद नौजवानों की है। पुलिस और प्रशासन द्वारा की जा रही तमाम कोशिशों और सख्ती के बावजूद हादसों के इस सिलसिले पर लगाम नहीं लग पा रही है।

चोरल फॉल में टला बड़ा हादसा : हालिया मामला इसी रविवार का है, जहां चोरल फॉल के झरने में नहाने गए तीन युवक अचानक डूबने लगे। गनीमत रही कि मौके पर मौजूद स्थानीय ग्रामीणों ने तत्परता दिखाई और सूझबूझ से तीनों युवकों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जिससे एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया।

युवाओं में बढ़ता जानलेवा क्रेज : खतरनाक रास्तों और गहरे पानी के बावजूद युवा वर्ग इन वॉटरफॉल्स पर जोखिम उठाने से बाज नहीं आ रहा है। प्रशासन द्वारा बार-बार चेतावनी बोर्ड लगाने और पुलिस बल तैनात करने के बाद भी लोग सुरक्षा घेरा तोड़कर प्रतिबंधित और गहरे पानी वाले क्षेत्रों में उतर रहे हैं, जो सीधे तौर पर हादसों को आमंत्रण दे रहा है।

ये आंकड़े डरावने हैं : इंदौर ग्रामीण पुलिस द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक साल 2022 से लेकर 23 जून 2026 के बीच ग्रामीण इलाकों में स्थित पिकनिक स्पॉट्स पर हादसों के चलते कुल 66 लोगों की मौत हो चुकी है। इन डराने वाले आंकड़ों के सामने आने के कुछ ही दिन पहले जिला प्रशासन ने मानसून के दौरान होने वाले हादसों को रोकने के लिए कई अत्यधिक जोखिम वाले और सुनसान पर्यटन स्थलों पर आम जनता के प्रवेश पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है।
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पिकनिक स्‍पॉट पर 5 साल में 66 मौतें
  • 2022 में 9 लोगों की मौत
  • 2023 में 17 लोगों ने गंवाई जान
  • 2024 में 14 नौजवनों की मौत
  • 2025 में भी 14 लोग हादसे का शिकार
  • 2026 में अब तक 12 लोगों की मौत
ऐसे साल दर साल हो रही मौतें : आंकड़ों का विश्लेषण करें तो इन पिकनिक स्थलों पर होने वाली मौतों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। साल 2022 में जहां हादसों में 9 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2023 में यह आंकड़ा लगभग दोगुना होकर 17 पर पहुंच गया। इसके बाद साल 2024 और 2025 में भी स्थिति गंभीर बनी रही और दोनों सालों में 14-14 लोगों ने अपनी जान गंवाई। चालू वर्ष 2026 में भी केवल 23 जून तक ही 12 लोगों की मौत पानी में डूबने या अन्य हादसों के कारण हो चुकी है।

कौन कौन से इलाके हैं खतरनाक : पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, ग्रामीण इंदौर के बड़गोंदा और सिमरोल थाना क्षेत्र सबसे ज्यादा खतरनाक है, यहां कुल मौतों के आधे से अधिक मामले दर्ज किए गए। वहीं, बड़गोंदा का बामनिया कुंड सबसे खतरनाक माना जा रहा है, जहां सबसे ज्‍यादा मौतें हुईं। इसके बाद सिमरोल पुलिस स्टेशन के तहत आने वाले प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जैसे टिंचा फॉल्स, जूनापानी, लोधिया कुंड, चोरल और रोशियाबाबा दरगाह कुंड में सबसे ज्यादा हादसे दर्ज किए गए हैं।

पिकनिक स्‍पॉट पर सुरक्षा के क्‍या साधन होना चाहिए /
वॉटरफॉल्स और नदी-झरनों जैसे पिकनिक स्पॉट्स पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होना बेहद जरूरी है, ताकि लोग एडवेंचर का आनंद भी ले सकें और किसी की जान भी जोखिम में न पड़े। ऐसे स्थानों पर मुख्य रूप से निम्नलिखित सुरक्षा साधन और व्यवस्थाएं होनी चाहिए:

1. प्राथमिक और तात्कालिक सुरक्षा उपकरण (Immediate Rescue Gear)
लाइफ बॉय रिंग्स (Lifebuoy Rings) और ट्यूब्स: पानी के किनारे निश्चित दूरी पर हवा भरे हुए लाइफ बॉय तैरते होने चाहिए, जिन्हें डूबते हुए व्यक्ति की तरफ तुरंत फेंका जा सके।

लाइफ जैकेट्स (Life Jackets): गहरे पानी या बोटिंग वाले क्षेत्रों में पर्यटकों के लिए लाइफ जैकेट अनिवार्य होनी चाहिए।

लंबी और मजबूत रस्सियाँ (Rescue Ropes): तेज बहाव में किसी को खींचने के लिए घाटों और किनारों पर भारी-भरकम रस्सियों की उपलब्धता जरूरी है।

2. मानव संसाधन और निगरानी (Human Resource & Surveillance)
सर्टिफाइड लाइफगार्ड्स (Lifeguards): पानी के संवेदनशील और गहरे पॉइंट्स पर कुशल गोताखोरों और लाइफगार्ड्स की तैनाती 24 घंटे (विशेषकर मानसून में) होनी चाहिए।

सुरक्षा गार्ड और पुलिस चौकी: हुड़दंग मचाने वाले, शराब पीकर पानी में उतरने वाले या प्रतिबंधित क्षेत्रों में जाने वाले लोगों को रोकने के लिए पुलिस या निजी गार्ड्स की गश्त जरूरी है।

CCTV कैमरे: पूरे पिकनिक स्पॉट और मुख्य झरनों की निगरानी के लिए हाई-डेफिनिशन कैमरे होने चाहिए ताकि कंट्रोल रूम से नजर रखी जा सके।

3. चेतावनी और सूचना तंत्र (Warning & Communication System)
डेंजर साइन बोर्ड (Danger/Caution Boards): गहरे पानी, फिसलन भरी चट्टानों और प्रतिबंधित क्षेत्रों (No Go Zones) के पास स्पष्ट अक्षरों और स्थानीय भाषा में 'खतरा' दर्शाने वाले बोर्ड होने चाहिए।

लाउडस्पीकर/पब्लिक एड्रेस सिस्टम: अचानक पानी बढ़ने (फ्लैश फ्लड) या मौसम खराब होने पर पर्यटकों को तुरंत सतर्क करने के लिए अनाउंसमेंट सिस्टम होना चाहिए।

रेड फ्लैग्स (लाल झंडे): जो हिस्से सबसे ज्यादा खतरनाक या गहरे हैं, उन्हें लाल झंडे या फ्लोटिंग बैरिकेड्स (रस्सी और ड्रम की मदद से) लगाकर अलग किया जाना चाहिए।

4. मेडिकल और आपातकालीन सुविधाएं (Medical & Emergency Support)
फर्स्ट-एड किट (First-Aid Station): डूबने से बचे व्यक्ति को तुरंत सीपीआर (CPR) देने, ऑक्सीजन सपोर्ट और प्राथमिक उपचार के लिए एक मेडिकल बूथ होना चाहिए।

इमरजेंसी एम्बुलेंस: किसी भी गंभीर स्थिति में मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुंचाने के लिए मौके पर या बहुत पास में एक एम्बुलेंस तैनात होनी चाहिए।

5. बुनियादी ढांचागत सुरक्षा (Infrastructure Safety)
रेलिंग और बैरिकेडिंग: झरनों के व्यू-पॉइंट्स और ऊंचे पहाड़ी रास्तों पर मजबूत लोहे की रेलिंग होनी चाहिए ताकि कोई पैर फिसलने से सीधे नीचे न गिरे।

एंटी-स्लिप वॉकवे: पानी के पास जाने वाले रास्तों पर ऐसी टाइल्स या खुरदरी सतह होनी चाहिए जिससे काई (Algae) जमने पर भी पैर न फिसले।
रिपोर्ट : नवीन रांगियाल

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