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इंदौर में बजट पर बहस पर हंगामा, कांग्रेस पार्षद फौजिया ने वंदे मातरम गाने से इनकार किया, महापौर ने बताया गुलाम मानसिकता

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इंदौर में मंगलवार को नगर निगम ने 8 हजार 455 करोड़ रुपए के बजट पेश किया गया। इसके बाद बुधवार को इस पर बहस और चर्चा हुई। इस दौरान हंगामा हो गया। कांग्रेस पार्षद फौजिया शेख अलीम ने वंदे मातरम गाने से इनकार कर दिया। इससे भाजपा पार्षद उखड़ गए। वे सभापति के नजदीक पहुंच गए। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी कुछ लोग गुलामी की मानसिकता के कारण इसका विरोध कर रहे हैं।

कुछ देर में सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया शेख अलीम को सदन से बाहर जाने को कह दिया। लेकिन फौजिया ने जवाब में कहा कि मुझे एक्ट दिखाइए कि किस एक्ट में लिखा है कि वंदे मातरम गाना जरूरी है। कुछ देर बाद वे उठकर सदन से बाहर चली गईं। मीडिया से चर्चा में उन्होंने कहा कि इस्लाम हमें ऐसा करने की अनुमति नहीं देता।

निगम में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस पार्षद चिंटू चौकसे ने कहा कि वंदे मातरम न गाना किसी की व्यक्तिगत इच्छा हो सकती है। लेकिन पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के लिए संकल्पित है। मैंने इस घटनाक्रम के बारे में प्रदेश अध्यक्ष को अवगत करा दिया है।

बता दें कि मंगलवार को नगर निगम का 8 हजार करोड़ का बजट पेश किया गया। इसके बाद बुधवार को परिषद में इस पर चर्चा शुरू हुई। इस बीच सदन में पार्षद फौजिया के वंदे मातरम नहीं गाने पर हंगामा हुआ तो महापौर ने उनकी मानसिकता पर सवाल उठा दिया।

क्‍या कहा महापौर ने : महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मीडिया से बातचीत में कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी कुछ लोग गुलामी की मानसिकता के कारण इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने पार्षद फौजिया शेख अलीम पर आरोप लगाया कि वे वंदे मातरम गाने से बचने के लिए जानबूझकर देर से सदन में पहुंचीं। महापौर ने आगे कहा कि इस पूरे मामले को लेकर उनकी पार्षदी से जुड़े कानूनी पहलुओं पर विचार किया जाएगा और आवश्यक कदम उठाने पर चर्चा की जाएगी।

कांग्रेस ने अपना रुख किया स्पष्ट : नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे ने इस मामले पर कांग्रेस का पक्ष रखते हुए कहा कि पार्टी राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के प्रति पूरी निष्ठा और ईमानदारी से प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह किसी सदस्य की व्यक्तिगत राय हो सकती है, लेकिन कांग्रेस के लिए वंदे मातरम और जन गण मन सर्वोच्च हैं। इस विषय में प्रदेश अध्यक्ष को भी अवगत करा दिया गया है और आगे का निर्णय पार्टी स्तर पर लिया जाएगा।

वंदे मातरम पर पार्षद फौजिया का पक्ष : पार्षद फौजिया शेख ने बाद में कहा कि सदन में जो हुआ, वह उचित नहीं था। उन्होंने कहा कि संविधान उन्हें इस तरह की छूट देता है। उनके अनुसार, इस्लाम में वे इस प्रकार से वंदे मातरम नहीं कह सकतीं और किसी को भी उन्हें इसे गाने के लिए मजबूर करने का अधिकार नहीं है।

उठकर सदन से बाहर चली गई : विरोध के माहौल के बीच सभापति मुन्नालाल यादव ने फौजिया शेख को सदन से बाहर जाने के लिए कह दिया, फौजिया ने बाहर जाने से इनकार कर दिया। फौजिया ने कहा कि उन्हें वह एक्ट दिखाया जाए, जिसमें इस तरह बाहर जाने का प्रावधान हो। हालांकि कुछ समय बाद वे स्वयं उठकर सदन से बाहर चली गईं।
Edited By: Naveen R Rangiyal

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