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सोना गायब करने से लेकर रिश्‍वत लेने और जुए के आरोप तक, जनता की रक्षक या भक्षक बन रही है इंदौर पुलिस?

इंदौर पुलिस पर लगातार उठ रहे लापरवाही के आरोप

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Indore Police
पुलिसकर्मी लगातार लगा रहे इंदौर पुलिस की छवि पर दाग
इंदौर पुलिस लगातार सवालों के घेरे में है। न शहर की कानून व्‍यवस्‍था संभल रही है और न ही अपराधों का ग्राफ नीचा हो पा रहा है। आए दिन चाकूबाजी और हत्‍याएं हो रही हैं। उस पर पुलिस अब लुटेरों की भूमिका में आ गई है। हाल ही में इंदौर में पुलिस ने जो हरकत की है, उससे पूरे प्रदेश की कानून- व्‍यवस्‍था पर सवाल उठ रहे हैं।
दरअसल, शहर के एक कारोबारी ने पुलिस पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। कारोबारी के मुताबिक इंदौर पुलिस ने उनके घर में से करीब 22 तोला सोना गायब कर दिया। यह मामला सामने आने के बाद विभाग ने 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है।

क्‍या है पुलिस का पूरा कांड : इस मामले में पीड़ित व्यवसायी गौरव जैन ने इंदौर के पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गौरव जैन के मुताबिक पुलिसकर्मियों ने घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए और मास्टर चाबी की मदद से मुख्य दरवाजा खोलकर अंदर प्रवेश किया। इसके बाद घर में रखे 22 तोला सोना गायब कर दिया गया।

आरोप है कि इन्होंने एक रिटायर्ड एसीपी के प्रॉपर्टी विवाद को सुलझाने के नाम पर एक व्यवसायी के घर में अवैध तरीके से घुसकर न केवल मारपीट की, बल्कि घर में रखा करीब 22 तोला सोना भी गायब कर दिया।


दरअसल, घटना एक अप्रैल की बताई जा रही है। आरोप है कि लसूड़िया थाने में पदस्थ एसआई संजय विश्नोई के साथ रणवीर कुशवाह, प्रणीत भदौरिया, दिनेश गुर्जर और दीपेंद्र मिश्रा ने मिलकर इस पूरी कार्रवाई को अंजाम दिया। गौरव जैन का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने उनके साथ मारपीट भी की और उन्हें अवैध रूप से हिरासत में लेकर ग्वालियर तक ले गए। वहां एक निजी गेस्ट हाउस में उन्हें रिटायर्ड एसीपी से जुड़े लोगों के हवाले कर दिया गया, जहां उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया।

इतना ही नहीं पीड़ित गौरव जैन ने यह भी आरोप लगाया कि एक पुलिसकर्मी ने उनसे जबरन पैसे भी वसूले। गौरव के अनुसार कुल 27 हजार रुपए उनसे लिए गए, जिसमें 10 हजार रुपए होटल में क्यूआर कोड के माध्यम से जमा करवाए गए जबकि 17 हजार रुपए उनके बेटे के खाते में ट्रांसफर करवाए गए। इस विवादित कार्रवाई के बाद 5 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है।

अनाज कालाबाजारी में पुलिस का झूठा हलफनामा : पिछले दिनों गरीबों के गेहूं-चावल की कालाबाजारी के मामले में जेल में बंद आरोपी की जमानत रोकने के लिए चंदननगर पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में झूठा हलफनामा पेश कर दिया था। पुलिस ने शपथ-पत्र पर कहा था कि आरोपी अनवर हुसैन पर इसके अलावा 8 और केस दर्ज हैं। इनमें बलात्कार जैसे संगीन आरोप भी हैं, लेकिन हकीकत में उस पर पहले 4 केस ही दर्ज थे, जिनमें से 2 में बरी हो चुका था। सुप्रीम कोर्ट ने इंदौर पुलिस के एडीसीपी दीशेष अग्रवाल और चंदननगर टीआइ इंद्रमणि पटेल को नोटिस जारी कर पूछा है कि झूठा शपथ-पत्र देने के लिए उन पर क्यों न कार्रवाई की जाए। कोर्ट ने आदेश में लिखा था कि पुलिस ने इस मामले में साफ झूठा बोला है। मामला एक व्यक्ति के जीवन और उसकी स्वतंत्रता का है। एडीसीपी और टीआइ को नोटिस जारी किया गया था।

जुआ कांड में पुलिस की भूमिका : इंदौर की महू तहसील के मानपुर थाना क्षेत्र में कुछ दिन पूर्व आईएएस वंदना वैद्य के फार्महाउस पर पकड़े गए जुआ कांड सामने आया था। इस मामले में एसपी यांगचेन डोलकर ने चार पुलिसकर्मियों को लाइन अटैच किया था। मामले के आरोपी जगदीश कुबड़ा से पूछताछ के बाद यह कार्रवाई की गई। पूछताछ में खुलासा हुआ कि जुए के आयोजन के लिए ‘पटेल पैलेस’ से जुड़े महेंद्र पटेल से संपर्क हुआ था, जिसने न केवल जगह उपलब्ध कराई बल्कि पुलिस से सेटिंग होने का भी दावा किया था। पुलिस पहले ही महेंद्र पटेल को आरोपी बना चुकी है। कार्रवाई में उप निरीक्षक त्रिलोक बोरासी, सहायक उप निरीक्षक सुरेश भदौरिया, सहायक उप निरीक्षक नीलेश यादव और आरक्षक सुशांत को लाइन अटैच किया गया था। इन सभी के जुआ कांड में संलिप्त होने के आरोप हैं।

गुना कैश कांड (मार्च 2026): रुठठियाई पुलिस चौकी पर वाहन चेकिंग के दौरान 1 करोड़ का संदिग्ध कैश पकड़ा गया था, लेकिन पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर 20 लाख के सेटलमेंट के बाद गाड़ी छोड़ दी। इस मामले में डीआईजी ने सख्त रुख अपनाते हुए थाना प्रभारी सहित 4 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया है।

टीआई रविंद्र गुर्जर मांग रहे थे रिश्वत : विजयनगर थाने के टीआई तो रिश्वत मांगने के मामले में हेड कांस्टेबल से भी आगे निकल गए। उन्होंने बच्चों से ही रिश्वत मांग ली थी। हालांकि मामला 2023 का है, जब एक फरियादी ने अपने परिचितों को थाने से छुड़वाने के लिए थाना प्रभारी सहित थाने में तैनात सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबलों से बात करने की कोशिश की थी। पर इस दौरान सब-इंस्पेक्टर और कांस्टेबलों ने थाना प्रभारी के नाम पर रिश्वत की मांग की थी। इससे परेशान होकर शिकायतकर्ता ने थाना प्रभारी रविंद्र गुर्जर, सब-इंस्पेक्टर संजय धुर्वे, आरक्षक लोकेंद्र सिसोदिया एवं एक अन्य कांस्टेबल को रिश्वत देकर अपने परिजनों को थाने से छुड़वाया था। पुलिस कमिश्नर संतोष सिंह ने सभी पुलिसकर्मियों को दंडित करते हुए पूर्व थाना प्रभारी रविंद्र गुर्जर को सब-इंस्पेक्टर बना दिया और सब-इंस्पेक्टर रहे संजय धुर्वे के प्रमोशन को रोक दिया गया।

हिरासत में मौतें: प्रदेश के ही छतरपुर जिले में हिरासत में हुई संदिग्ध मौतों ने पुलिसिया कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। यहां पुलिस कस्‍टडी में हुई मौतों के बाद लगातार पुलिस के तौर तरीकों पर सवाल उठ रहे हैं।  

इंदौर के राऊ थाने में हंगामा: पुलिस के दुर्व्‍यवहार के कई मामले सामने आते रहे हैं। लेकिन हाल ही में राऊ में पुलिस द्वारा कथित तौर पर दुर्व्यवहार के बाद स्थानीय निवासियों और कार्यकर्ताओं ने थाने में हंगामा किया था। पुलिस प्रशासन पर कई तरह के आरोप लगाए थे।
Edited By : Naveen R Rangiyal

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