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जेल है तो सारी टेंशन फेल है

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, बुधवार, 27 दिसंबर 2017 (18:10 IST)
लंदन । अब लगता है कि पुरुष खुशी-खुशी गर्भनिरोधक का इस्तेमाल करेंगे क्योंकि एक जेल जो आ गया है। अमेरिकी वैज्ञानिकों के बनाए जेल को गर्भनिरोधक जेल कह सकते हैं। बस इसे कंधे पर मलना होगा। जानकारों का कहना है कि इसे दुनियाभर में 400 सौ मर्दों पर आजमाया जाएगा। 
 
कैसे काम करता है ये जेल
 
अब इस नए जेल पर उम्मीदें टिकी हैं। कंधे पर लगाए जाने वाले इस जेल में दो सिंथेटिक हार्मोन्स हैं – टेस्टेस्टेरॉन और प्रोजेस्टीन का एक फॉर्म। प्रोजेस्टीन उतने टेस्टेस्टेरॉन नहीं बनने देगा, जिससे सामान्य स्तर के शुक्राणु पैदा हो सकें। यानि बच्चे पैदा करने के लिए जिन हार्मोन्स की जरूरत होती है, वे इस जेल के प्रभाव से नहीं बन पाएंगे। यानि शुक्राणु ही नहीं बनेंगे और न ही इसका कोई बुरा असर होगा।
 
आधा चम्मच जेल कंधे पर मलो
 
जिन पुरुषों पर यह जेल आजमाया जाएगा उन्हें हर दिन याद से बस आधा चम्मच जेल कंधे पर मलना है। ऐसा माना जा रहा है कि यह जेल शरीर के अंदर खून के प्रवाह में शामिल हो जाएगा और अपना काम कर देगा। वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी में मेडिसिन की प्रोफेसर और इस रिचर्स की अहम सदस्य स्टैफिनी पेज को पूरा भरोसा है कि अगर मर्द इसे नियम से इस्तेमाल करेंगे तो यह पर्याप्त असरदार साबित होगा।  
 
फिर मर्द भी गर्भनिरोध में अपनी भूमिका बहुत आसानी से निभा पाएंगे। तो यह माना जाता है कि पुरुषों के जिम्मेदार कंधे इस जेल के छोटे से बोझ को आसानी उठा पाएंगे और अवांछित गर्भ की समस्या से दोनों ही साथियों को मुक्ति मिल जाएगी। विदित हो कि अभी तक फिलहाल पुरुषों के लिए गर्भनिरोधक के नाम पर सिर्फ कॉन्डम और नसबंदी की सुविधा ही उपलब्ध है। 
 
वैज्ञानिकों के एक समूह ने घोषणा की है कि उन्होंने इस पुरुष गर्भनिरोधक जेल विकसित किया है जिसका दूसरा ट्रायल अप्रैल 2018 में शुरू होगा। हालांकि इसका परीक्षण पहले से भी किया जा रहा है। 
 
ट्रायल में शामिल पुरुषों को जेल की एक पंप बॉटल दी जाएगी जिसमें से पुरुषों को आधा चम्मच जेल अपने कंधे और बाजू के ऊपरी हिस्से पर हर दिन करीब 4 महीने के लिए लगाना होगा। 
 
जेल के सक्रिय केमिकल्स में नेस्टेरॉन नाम का प्रोजेस्टिन और टेस्टोस्टेरॉन का सिंथेटिक फॉर्म शामिल है। स्पर्म सेल्स बनाने के लिए शरीर को टेस्टोस्टेरॉन की जरूरत होती है जबकि प्रोजेस्टिन, वीर्यकोष को टेस्टोस्टेरॉन का उत्पादन करने से रोक देता है। 
 
अप्रैल 2018 में जो लेटेस्ट ट्रायल होगा वह साल 2012 में हुए परीक्षण की ही नकल होगा जिसमें यह बात साबित हो गई थी कि यह जेल 90 प्रतिशत पुरुषों में स्पर्म को संकेद्रित या जमा देता है। मुख्य अनुसंधानकर्ता स्टेफनी पेज कहती हैं, 'मैं इस बात को लेकर आश्वस्त हूं कि अगर पुरुष इस जेल का इस्तेमाल हर दिन करें और सही तरीके से इसे लगाएं तो यह पूरी तरह से असरदार होगा।' 
 
जेल लगाने के बाद करीब 72 घंटों तक पुरुषों के स्पर्म उत्पादन में गिरावट आ जाएगी। ट्रायल के शुरुआती 4 महीने तक फीमेल पार्टनर्स को महिला गर्भनिरोधक लेने के लिए कहा जाएगा जबकि पुरुषों के स्पर्म लेवल में कितनी गिरावट हो रही है, इसकी निगरानी की जाएगी। 
 
अनुसंधानकर्ताओं का कहना है कि अगर यह परीक्षण सफल हो भी जाता है तब भी इस पुरुष गर्भनिरोधक जेल को बाजार में आने और पब्लिक तक पहुंचने में और कई वर्ष लग सकते हैं। 

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