Hanuman Chalisa

यौमे-ए-आशुरा : क्या है इसका महत्व और कर्बला में क्यों मनाया जाता है मुहर्रम, जानिए...

Webdunia
कर्बला कहां है, क्या है इसकी कहानी : - इराक की राजधानी बगदाद से 100 किलोमीटर दूर उत्तर-पूर्व में एक छोटा-सा कस्बा है- कर्बला। यहां पर तारीख-ए-इस्लाम की एक ऐसी नायाब जंग हुई, जिसने इस्लाम का रुख ही बदल दिया। इस कर्बला की बदौलत ही आज दुनिया के हर शहर में 'कर्बला' नामक एक स्थान होता है जहां पर मुहर्रम मनाया जाता है।
 
हिजरी संवत के पहले माह मुहर्रम की 10 तारीख को (10 मुहर्रम 61 हिजरी अर्थात 10 अक्टूबर 680) मुहम्मद साहिब के नवासे हजरत हुसैन को इराक के कर्बला में उस समय के खलीफा यजीद बिन मुआविया के आदमियों ने कत्ल कर दिया था। इस दिन को 'यौमे आशुरा' कहा जाता है।
 
कहते हैं कि कर्बला में एक तरफ 72 और दूसरी तरफ यजीद की 40,000 सैनिकों की सेना थी। 72 में मर्द-औरतें और 51 बच्चे शामिल थे। हजरत हुसैन की फौज में कई मासूम थे, जिन्होंने यह जंग लड़ी। हजरत हुसैन की फौज के कमांडर अब्बास इब्ने अली थे। उधर यजीद की फौज की कमान उमर इब्ने सअद के हाथों में थी।
 
क्या हैं जंग का कारण : इस्लाम के पांचवें खलीफा अमीर मुआविया ने खलीफा के चुनाव के वाजिब और परम्परागत तरीके की खिलाफत करते हुए अपने बेटे यजीद को अपना उत्तराधिकारी नियुक्त कर दिया, जो जुल्म और अत्याचारों के लिए मशहूर था।
 
यजीद ने अपनी खिलाफत का ऐलान कर अन्य लोगों के अलावा हजरत हुसैन से भी उसे खलीफा पद की मान्यता देने के लिए कहा गया। इमाम हुसैन ने ऐसा करने से इनकार कर दिया और इसी इनकार की वजह से कर्बला पर युद्ध का मंजर छा गया और हुसैन शहीद हो गए। इसी कारण हजरत हुसैन को शहीद-ए-आजम कहा जाता है।
 
हजरत हुसैन ने मुट्ठीभर लोगों के साथ अपने जमाने के सबसे बड़े जालिम और ताकतवर शासक के खिलाफ बहादुरी और सब्र के जो जौहर दिखलाए, उसे दुनिया कभी नहीं भूल सकती। इस हादसे की याद में मुहर्रम मनाया जाता है। दरअसल यह कोई त्योहार नहीं, मातम का दिन है। हजरत हुसैन की शहादत यह पैगाम देती है कि इनसान को हक व सचाई के रास्ते पर चलना चाहिए।
 
इस जंग के बाद ही न मालूम कैसे शिया और सुन्नी दो अलग वर्ग बन गए। धीरे-धीरे शहादत का यह दिन सिर्फ शियाओं के महत्व का ही क्यों रह गया यह भी मालूम नहीं, जबकि हुसैन साहिब ने तो जुल्म और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाई थी किसी सम्प्रदाय विशेष के खिलाफ नहीं।
 
यौमे आशुरा यानी मोहर्रम माह की दस तारीख, इस दिन को पूरे विश्व में बहुत अहमियत, अज्मत और फजीलत वाला दिन माना जाता है। 

सम्बंधित जानकारी

Show comments
सभी देखें

ज़रूर पढ़ें

2026 का दूसरा चंद्र ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों को रहना होगा बेहद सावधान

ज्योतिषीय भविष्यवाणी: शनि के रेवती नक्षत्र में आते ही बदल सकते हैं देश के हालात

2026 में दुर्लभ संयोग 2 ज्येष्ठ माह, 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, भारत में होंगी 3 बड़ी घटनाएं

2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण कब लगेगा? 5 राशियों पर अशुभ असर, 3 की चमकेगी किस्मत, जानें तारीख और उपाय

Nautapa 2026: नौतपा क्या है? जानें इसके कारण और लक्षण

सभी देखें

धर्म संसार

14 May Birthday: आपको 14 मई, 2026 के लिए जन्मदिन की बधाई!

Aaj ka panchang: आज का शुभ मुहूर्त: 14 मई 2026: गुरुवार का पंचांग और शुभ समय

गुरु प्रदोष व्रत 2026: जानें महत्व, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त

वास्तु टिप्स: खुशहाल घर और खुशहाल जीवन के 10 सरल उपाय vastu tips

अपरा एकादशी को क्यों कहते हैं अचला एकादशी, जानिए दोनों का अर्थ और फायदा

अगला लेख