Publish Date: Wed, 27 May 2026 (15:12 IST)
Updated Date: Wed, 27 May 2026 (15:06 IST)
इतिहास और धार्मिक महत्व
इस्लामी मान्यता के अनुसार, अल्लाह ने हज़रत इब्राहीम की परीक्षा लेने के लिए उन्हें सपना दिखाया कि वे अपने प्रिय पुत्र इस्माईल की कुर्बानी दें। इब्राहीम ने इसे अल्लाह का आदेश माना और अपने बेटे से इस बारे में बात की। इस्माइल ने भी अल्लाह की इच्छा के आगे सिर झुका दिया।
जब इब्राहीम अपने बेटे की कुर्बानी देने लगे, तब अल्लाह ने उनकी निष्ठा और ईमानदारी देखकर इस्माइल की जगह एक दुंबा (मेंढ़ा) भेज दिया। इस घटना को अल्लाह के प्रति पूर्ण समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।
इसी याद में मुसलमान हर वर्ष ईद उल अजहा मनाते हैं और जानवर की कुर्बानी देते हैं। कुर्बानी का मांस आमतौर पर तीन हिस्सों में बांटा जाता है:
1. परिवार के लिए
2. रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए
3. गरीब और जरूरतमंद लोगों के लिए
यह त्योहार कब मनाया जाता है?
ईद उल अजहा इस्लामी कैलेंडर के आखिरी महीने ज़िलहिज्जा की 10वीं तारीख को मनाई जाती है। यह हज के समापन के समय आता है, इसलिए इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।
मुख्य संदेश
* अल्लाह के प्रति समर्पण
* त्याग और बलिदान
* गरीबों की मदद और सामाजिक समानता
* परिवार और समुदाय के साथ मिलकर खुशियां बांटना
भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, सऊदी अरब और दुनिया के कई देशों में यह त्योहार बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जाता है।
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