Hanuman Chalisa

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia

जगन्नाथ रथ यात्रा 2026: पुरी जाने से पहले जान लें ये 5 जरूरी नियम

Advertiesment
Rules for pulling Jagannath Rath
जगन्नाथ रथयात्रा में शामिल होने जा रहे हैं तो जान लें कि वहां पर किन नियमों का आपको करना होगा पालन। इसके पहले यह भी जानना जरूरी है कि रथ निर्माण, ओसर घर, छर पहनरा, गुंडीचा मार्जन, रथयात्रा का आरंभ, गुंडिचा मंदिर आगमन, हेरा पंचमी, बहुड़ा यात्रा और पुन: मंदिर आगमन कब होता है और कब किस रस्म में शामिल हों।

जगन्नाथ रथ यात्रा: पुण्य, रथों का रहस्य और नियम

पुरी की विश्वप्रसिद्ध जगन्नाथ रथ यात्रा आस्था का एक ऐसा समंदर है, जहाँ भगवान खुद अपने गर्भगृह से निकलकर भक्तों के बीच आते हैं। आइए इस पावन यात्रा से जुड़ी खास बातों को नए अंदाज़ में समझते हैं।
 

यात्रा में शामिल होने का महापुण्य

इस अलौकिक यात्रा का हिस्सा बनने के लिए किसी विशेष पात्रता की आवश्यकता नहीं है। कोई भी साधारण व्यक्ति इसमें शामिल हो सकता है।
मान्यता: जो भी भक्त इस पावन रथयात्रा में सम्मिलित होता है, उसे 100 यज्ञों के समान पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

तीनों रथों की अनूठी संरचना (एक नज़र में)

नंदीघोष (या गरुड़ध्वज): ऊँचाई 45 फीट, पहियों की संख्या 16, पवित्र रस्सी का नाम शंखाचुड़ा नाड़ी।
तालध्वज: ऊँचाई 43 फीट, पहियों की संख्या 14, पवित्र रस्सी का नाम बासुकी।
दर्पदलन (या पद्म रथ): ऊँचाई 42 फीट, पहियों की संख्या 14 और पवित्र रस्सी का नाम स्वर्णचूड़ा नाड़ी।
 

यात्रा का मार्ग और अवधि

दूरी: इन तीनों विशाल रथों को भक्तों द्वारा खींचकर 3 किलोमीटर दूर स्थित 'गुंडिचा मंदिर' ले जाया जाता है।
विश्राम: गुंडिचा मंदिर में भगवान 10 दिनों तक आराम करते हैं।
वापसी: यात्रा के 11वें दिन महाप्रभु पुनः अपने मुख्य जगन्नाथ मंदिर लौट आते हैं।
 

रथ खींचने के नियम: जहाँ भक्ति में कोई भेद नहीं

भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने के लिए किसी भी प्रकार का कठोर नियम या सामाजिक बंधन नहीं है:
सबके नाथ जगन्नाथ: यहाँ जाति, धर्म, प्रांत या देश की कोई सीमा नहीं है। दुनिया का कोई भी व्यक्ति या भक्त इन रथों को खींच सकता है।
खींचने का क्रम: भक्तगण एक निश्चित क्रम से तीनों रथों की रस्सियों को श्रद्धापूर्वक खींचते हैं।
मोक्ष की प्राप्ति: ऐसी अटूट धार्मिक मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन से भगवान जगन्नाथ का रथ खींचता है, वह जीवन-मरण के चक्र (आवागमन) से हमेशा के लिए मुक्त हो जाता है।

  • रथ खींचने के दौरान धोती पहना जरूरी है।
  • रथ खींचने के दौरान पवित्रता का ध्यान रखें।
  • तीनों रथ को क्रमवार खींचे।
  • कम से कम तीन कदम और आप जितनी देर आसानी से और सुरक्षित रहकर रस्सी खींच सकें, खींचें। रस्सी दूसरों के लिए छोड़ दें ताकि अन्य भक्तों को भी यह सौभाग्य मिल सके।
  • गुंडिचा मंदिर में दर्शन जरूर करें।
 

कैसे करें जाने की तैयारी:

1. यदि आप उड़ीसा से बाहर रहते हैं तो आपको अभी से वहां पर ठहरने का इंतजाम करना होगा। अन्यथा आप परेशान हो जाएंगे क्योंकि वहां पर रहने के सीमित साधन है।
2. आपको पुरी के बाहर में कहीं ठहने का स्थान मिलता है तो उसे हायर कर सकते हैं।
3. जगन्नाथ पुरी में मंदिर के सामने ही समुद्र है इस संपूर्ण क्षेत्र में घुमने के लिए आपको कम से कम 3 दिन का प्लान करना चाहिए।
4. तीन दिन का खर्च कम से कम 4 से 5 हजार का आ सकता हैं।
5. जगन्नाथ मंदिर दर्शन, चिलका वन्यजीव अभयारण्य, अथरनाला ब्रिज, पुरी का गुंडिचा मंदिर और समुद्री तट पर आप जा सकते हैं।
6. यदि आप पुरी से कुछ किलोमीटर दूर कोणार्क मंदिर को देखने का प्लान भी कर रहे हैं तो 1 दिन और आपको रुकना होगा।
7. रथ यात्रा के दौरान बहुत भीड़ होती है। ऐसे में आप यदि अपने परिवार के साथ जा रहे हैं तो सुरक्षा का भी ध्यान रखें।
8. बच्चों के साथ जा रहे हैं तो हमारी सलाह है कि आप यात्रा के दर्शन दूर से ही करें बाद में मंदिर में भगवान जगन्नाथ के दर्शन करें।
9. पूरी में आप पहले दिन जगन्नाथ मंदिर के दर्शन करें और रथयात्रा का आनंद लें। दूसरे दिन गुंडिचा मंदिर जा सकते हैं। तीसरे दिन समुद्र का आनंद ले सकते हैं।
 

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

शुक्र का बुध के नक्षत्र में प्रवेश, इन 4 राशियों की चमकेगी किस्मत, तुरंत करें ये 3 उपाय