डॉ. रूपेश जैन राहत घनघोर तिमिर चहुंओर या हो फिर मचा हाहाकार कर्मों का फल दुखदायी या फिर ग्रहों का अत्याचार प्रतिकूल हो जाता अनुकूल लेकर बस आपका नाम आदिपुरुष, आदीश जिन आपको बारम्बार प्रणाम।।1।। आता-जाता रहता सुख का पल और दु:ख का कोड़ा...