Samvatsari Maha parva : संवत्सरी महापर्व जैन धर्म का सबसे महत्वपूर्ण पर्व है, और इस दिन 'मिच्छामी दुक्कड़म्' कहने की परंपरा का बहुत गहरा धार्मिक महत्व है। यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और क्षमा का प्रतीक है। वर्ष 2025 में मिच्छामी दुक्कड़म् या संवत्सरी महापर्व 28 अगस्त 2025, गुरुवार को मनाया जाएगा।
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क्या है मिच्छामी दुक्कड़म् का अर्थ? 'मिच्छामी दुक्कड़म्' प्राकृत भाषा का एक शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ है:
• मिच्छामी: क्षमा करना या क्षमा मांगना।
• दुक्कड़म्: दुष्कृत्य या बुरे कर्म।
इस प्रकार, इसका पूरा अर्थ होता है 'मेरे द्वारा जाने-अनजाने में किए गए सभी बुरे कर्मों के लिए मुझे क्षमा करें।' यह केवल एक व्यक्ति से नहीं, बल्कि इस संसार के हर जीव से मांगी गई माफी है, चाहे वह मनुष्य हो, पशु हो या कोई सूक्ष्म जीव।
संवत्सरी पर इसे क्यों कहते हैं? पर्युषण पर्व आठ दिनों का होता है, जिसमें जैन धर्म के अनुयायी उपवास, स्वाध्याय और ध्यान के माध्यम से अपनी आत्मा को शुद्ध करते हैं। संवत्सरी इस पर्व का अंतिम दिन होता है, जिसे क्षमावाणी पर्व भी कहते हैं।
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इस दिन 'मिच्छामी दुक्कड़म्' कहकर लोग साल भर में मन, वचन और कर्म से की गई हर गलती के लिए क्षमा मांगते हैं। यह एक तरह से अपने कर्मों का लेखा-जोखा है। इस दिन माफी मांगने से मन में भरा हुआ क्रोध, वैर-भाव और ईर्ष्या का भाव समाप्त हो जाता है।
जैन धर्म के अनुसार, जब तक आप अपने मन से किसी के प्रति बैर नहीं निकालेंगे, तब तक आप आत्मिक शांति और प्रगति नहीं कर सकते। 'मिच्छामी दुक्कड़म्' हमें सिखाता है कि क्षमा करना और क्षमा मांगना दोनों ही एक आत्मा के उत्थान के लिए बहुत जरूरी हैं। यह एक-दूसरे के प्रति मैत्री और प्रेम का भाव जगाता है।
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