दादाजी हैं अस्सी के, अस्सी के रे अस्सी के। दादाजी ये, सोहन के, मोहन, टीना, जस्सी के। उफ़! गरमी इतनी ज्यादा, बहता खूब पसीना है। सर पर बैठ गया आकर, कड़क जून का महीना है। बच्चे मांग रहे पैसे, दादाजी से लस्सी के। दादाजी ने पलट दिया, बटुआ...