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फनी बाल कविता : मेला

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प्रभुदयाल श्रीवास्तव

mela fair
अम्मा यह है कैसा मेला
धक्कम-मुक्की रेलम-पेला,
अम्मा यह कैसा है मेला।
 
ऊंचे-ऊंचे लगे हिंडोले।
एक तरफ हैं चकरी-झूले।
भीड़ लगी है दुकानों में।
 
शोर चुभ रहा है कानों में।
चाट-पकौड़ी खूब बिक रही।
देखो कितनी भीड़ जुट रही।
 
खेल तमाशे ढोल-ढमाके,
लोग दिख रहे चंग बजाते।
हम भी जरा हिंडोला झूलें।
थोड़ी चाट-पकौड़ी ले लें।


(वेबदुनिया पर दिए किसी भी कंटेट के प्रकाशन के लिए लेखक/वेबदुनिया की अनुमति/स्वीकृति आवश्यक है, इसके बिना रचनाओं/लेखों का उपयोग वर्जित है...)

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