Kids Poem गुड़ का ढेला देख छबीली, चींटी मन ही मन मुस्काई। अभी चढ़ूंगी इस पर्वत पर, कोई मुझे न रोके भाई। चींटा बोला बहन संभलकर, सोच समझकर इस पर चढ़ना। गरमी पाकर गुड़ का ढेला, कर देता है शुरू पिघलना। गुड़ के ढेले पर चढ़कर ही,...