लगी हुई थी हम बच्चों को, बहुत दिनों से आस। दादा-दादी की शादी के, होंगे साल पचास। स्वर्ण जयंती जल्दी होगी, हम सोचें मुस्काएं। कब दादा को दूल्हा, दादीजी को दुल्हन बनाएं। और शीघ्र ही प्यारा-प्यारा-सा, शुभ दिन वह आया। दादा-दादी को जब हमने, नख-शिख पूर्ण सजाया। ...