Webdunia - Bharat's app for daily news and videos

Install App

Select Your Language

Notifications

webdunia
webdunia
webdunia
webdunia
Advertiesment

दूसरी लहर ने गैर-कोविड मरीजों का बुरा हाल किया: विशेषज्ञ

webdunia

DW

सोमवार, 14 जून 2021 (15:34 IST)
कोरोना की दूसरी लहर ने पिछले 2 महीनों में पहले से ही बोझिल स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को पंगु बना दिया है। कैंसर, हृदय और गुर्दे की गैर-कोविड पुरानी बीमारियों से पीड़ित भारतीयों को बुरी तरह प्रभावित किया है।
  
कोरोना की दूसरी लहर की वजह से पिछले 2 महीनों के दौरान आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं बाधित हुईं, क्योंकि कोविड-19 के मामलों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई जिसके कारण स्वास्थ्य सेवाओं के बुनियादी ढांचे के समाप्त होने के साथ-साथ स्वास्थ्य सेवाओं को कोविड देखभाल की ओर मोड़ दिया गया। विशेषज्ञों के मुताबिक, अन्य प्रमुख कारणों में कोरोना के संक्रमण का डर, गलत सूचना और लॉकडाउन के कारण आवाजाही पर प्रतिबंध शामिल हैं।
 
एम्स, नई दिल्ली के सेंटर फॉर कम्युनिटी मेडिसिन के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. हर्षल आर साल्वे कहते हैं कोविड-19 महामारी ने समुदाय से लेकर तृतीय स्तर तक स्वास्थ्य देखभाल के सभी स्तरों पर गैर-कोविड देखभाल को प्रभावित किया। कैंसर देखभाल, उच्च रक्तचाप और मधुमेह प्रबंधन जैसी पुरानी बीमारियों की देखभाल की सेवाएं कोविड देखभाल में बदलने के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुईं। लोग महामारी के कारण लगे प्रतिबंधों और भय के कारण स्वास्थ्य सेवा लेने में सक्षम नहीं थे।
 
पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें दावा किया गया था कि दूसरी लहर में अधिकांश राज्य सरकारों ने प्रतिबंध और प्रोटोकॉल लगाए हैं जिस कारण हृदय, गुर्दे, लीवर और फेफड़ों के रोगियों के नियमित उपचार और जांच से इंकार कर दिया गया है।
 
याचिकाकर्ता ने कहा कि गैर-कोविड-19 रोगियों को बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। सभी अस्पतालों में प्रमुख सर्जरी स्थगित कर दी गई है, क्योंकि डॉक्टर कोविड-19 रोगियों के इलाज में व्यस्त हैं।।। हृदय रोगियों या गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पताल में प्रवेश बहुत मुश्किल है।
 
जेपी अस्पताल, नोएडा के प्लास्टिक, सौंदर्य और पुनर्निर्माण सर्जरी विभाग के निदेशक डॉ. आशीष राय ने आईएएनएस को बताया कि कैंसर के मरीज खासकर बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि कैंसर के बुजुर्ग मरीज अक्सर अस्पताल जाने में देरी करते हैं, यह सोचकर कि इससे उनके बच्चों को कोरोना संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
 
फोर्टिस अस्पताल, गुरुग्राम में कैंसर विशेषज्ञ डॉ. राहुल भार्गव के मुताबिक कि कोरोनावायरस महामारी का खामियाजा कैंसर रोगियों को भुगतना पड़ा है। कुल मिलाकर, कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए प्रारंभिक निदान, जांच और उपचार में देरी हुई और कोरोना से संक्रमित लोगों में मृत्युदर का अधिक खतरा था।
 
शुरुआती दिनों में कैंसर का उपचार सफल हो सकता है, लेकिन रोग की उन्नत अवस्था में इसका उपचार नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों ने कहा कि कोविड काल में सक्रिय कैंसर रोगियों या पिछले पांच वर्षों से पीड़ित कैंसर रोगियों की मृत्युदर भी बढ़ी है।(आईएएनएस)

Share this Story:

Follow Webdunia Hindi

अगला लेख

यूपी के शामली में प्रधान के उत्पीड़न से पलायन का क्या है मामला